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25 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
सिंगुर नन्दीग्राम प्रतिरोध आन्दोलन का असर होता तो ग्राम बांग्ला में सफाया हो जाता वाममोर्चा का। दक्षिण २४ परगना में आरएसपी का प्रबल जनाधार है और वासंती में मंत्री की बहू की बम मारकर हत्या जैसी वारदात के साथ सहयोगी दलों पर राज्यभर में कहर बरपाने का खामियाज मोर्चा ने भुगता। उत्तर बंगाल में फारवर्ड ब्लाक की नाराजगी विपक्ष के काम आयेगी। तो दूसरी ओर राजग और भाजपा से दामन छुड़ाकर नन्दीग्राम सिंगुर जनप्रतिरोध में हमेशा आगे रहकर एसयूसी जैसे वामपंथी कैडर बेस पार्टी के सहयोग की वजह से वोटबैंक को बूथों पर अपने हक में मतो में तब्दील करने में सीमित कामयाबी ममता ने जरूर हासिल कर ली है। पूर्वी मेदिनीपुर में जहां वाम मोर्चा को जिला परिषद भी गवानी पड़ी, वहीं हुगली में सिंगुर में पंचायती पराजय के बावजूद माकपा का वर्चस्व बना रहा। उत्तर बंगाल में वैसे भी कांग्रेस की कामयाबी नयी बात नहीं है। बाकी हिस्सों में नन्दीग्राम और सिंगुर प्रतिरोध का असर हुआ ही नहीं, इसके मद्देनजर आसनन् लोकसभा चुनावों में वाममोर्चा की दस सीटें हारने की अटकले या विधानसभा चुनाव में बंगाल से माकपा के सफाये का अनुमान लगाना बंगाल के सत्तावर्ग को न समझ पाने का सबूत है। आगे पढ़ें...