माकपा के सत्तारूढ़ होने से पहले तक बीटी रोड के आर पार और हुगली के आरपार तमाम इलाका औद्योगिक इलाका हुआ करता था। सोदपुर में बंगलक्ष्मी काटन मिल, सुलेखा और बेलघरिया में मोहिनी मिल का बाजार देशभर में था। सबकुठ अब बंद है। बंगलक्ष्मी मिल की जमीन पर पीयरलेस कालोनी है। तो बरानगर, बेलघरिया, आगरपाड़ा, सोदपुर, खड़दह, टीटीगढ़, बैरकपुर, पलता, इछापुर, श्यामनगर, कांकीनाड़ा, नैदाटी के तमाम कलकारखाने बंद हो गये। जूटपट्टी श्मशान में तब्दील हो गयी। सूती मिलों का नामोनिशान नहीं है। इन कारखानों से बेरोजगार हुए लोग इन बाजारों में छोटे मोटे कामकाज और कारोबार चलाकर पेट पालते थे। पर देखते गेखते हालात बदल गया। रिहायशी बस्तियों में सुपर मार्केट और शापिंग माल, बार और रेस्तरा, बहुमंजिली महंगी आवासीय कालोनियां बन जाने से यह तमाम इलाका अब मेहनतकश जनता के लिए चकाचौंध वाला मरघट बन गया है।
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