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मई 2008

 

• Fire in Sodepur Garment Store Expses the Shopping Insecurity with Twelve Deaths

In a freak accident, Tweleve people died from carbon monoxide poisoning and asphyxiation after a fire and the deadly gas formed, spread into a readymade garment centre through air conditioning ducts from the floors above in Sodepur, Bengal.

Fire and Deaths in a Sodepur Garment Store exposes the insecurity of consumors in neo global market economy of Shining Sensex India. The Garment store is developed on lines of Shopping Mall, which monoplises the garment market along with Srinekatan, already a Big Brand in West Bengal.IN A terrible tragedy, 12 people died from carbon monoxide poisoning and asphyxiation after a fire started on the floor above a readymade garment centre in Sodepur in the outskirts of Kolkata on Friday noon. Though the fire was devastating, no one died of burn injuries. Among the dead, 10 were men and one was a woman. Many more fell ill and had to be hospitalised and are still unconscious. The death toll has been going up by the hour. There was palpable tension outside the hospitals.   और पढ़ें...
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• क्रिकेट कार्निवाल में शाहरूख खान के कोलकाता नाइट राइडर्स टीम में अन्ततछ रवीन्द्रनाथ और महाबली खली। नीली क्रान्ति के विपणन में बेशर्म सांस्कृतिक संक्रमण का अद्भुत तामाशा। तमाशबीन पश्चिम बंगीय पोंगापंथी मार्क्सवादी पूंजीवादी सवर्ण बांग्ला राष्ट्रीयता।

रवीन्द्र के दलित विमर्श पर बंगाल में चर्ची नहीं होती। हालांकि अस्पृश्.ता के विरुद्ध और बौद्धधर्म के पक्ष में लिख नृत्य नाटिका चंडालिनी का मंचन सबसे ज्याद होता है। नोबेल पुरस्कार पाने से पहले तक अस्पृश्य थे रवीन्द्रनाथ और उन्हे पुरी के मन्दिर में प्रवे नहीं करने दिया गया। गीतांजलि अन्त्यज सूफी संत दर्शन बाउल संस्कृति से प्रेरित है और अछूतों के पक्ष में रवीन्द्रनाथ ने राशियार चिठि जैसी रचनाएं तक लिखीं। रथेर रशि में उन्होंन बाकायदा अस्पृश्य मूलनिवासियों के नेतृत्व में परिवर्तन की बात की। पर नोबेल पदकधारी मूलनिवासियों के सबसे महान कवि पर सवर्ण सत्तावर्ग ने ऐसा कब्जा जमाया कि उनके दलित विमर्श पर चर्चा ही शुरु नहीं हुई। हिन्दी में भी ऐसे सवर्ण मसीहा मौजूद हैं जो साहि्य विरासत का इस्तेमाल सवर्म हित में करते हैं और साहित्य अकादमी, सरकार, हिंदी प्रसार से लेकर जसम जलेस तक में अग्रगामी हैं। ऐसे ही एक महान मसीहा कवि केदार नाथ सिंह और उनके पिट्ठू प्रकाशक हरिश्चन्द्र पांडे मेरी पुस्तक रवींन्द्र का दलित विमर्श की पांडुलिपि वर्षों से दबाये हुए हैं।

रवीन्द्रनाथ का भूमंडलीय बाजार में कारपोरेट इस्तेमाल कोई नयी बात नहीं है। रवीन्द्र नोबेल पदक और रवीन्द्र विरासत गंवाने वाले कविगुरु के सपनों की तपस्याभूमि विश्वभारती इस आपाधापी में सबसे आगे है। पोंगापंथियों ने वोटबैंक समीकरण और मूलनिवासी सफाया एजंडा के तहत अंधाधुंध शहरीकरण और पूंजीवादी विकास में रवीन्द्र का भरपूर इस्तेमाल किया। पाक फौजी हुकूमत ने भारतीय राष्ट्रीयता के जनक और विश्व बन्धुत्व के प्रवक्ता जिस कवि पर प्रतिबन्ध लगाकर बांग्ला भाषा आन्दोलन और बांग्लादेश मुक्तिसंग्राम की जमीन तैयार की, जिस कवि के रोमांटिक गीत आमार बांग्ला आमि तोमाय भालोबासि होंठों पर सजाकर तीस लाख आजादी के दीवाने बंगालियों ने, हिन्दुओं और मुसलमानों ले विभाजन और मजहब के नाम पर दो राष्ट्र सिद्धान्त को खारिज करके हंसते हंसते शहादते दी, लाखों मां बहनों ने आजादी की कीमत बतौर अपनी अस्मत तक दांव पर लगा दिया, हमलावरो के सामूहिक बलात्कार और उनके नाजायज गर्भ को झेल लिया, उस रवीन्द्रनाथ का इस्तेमाल मूलनिवासी सफाया अभियान में हो रहा है। बेशर्म बुद्ध बुश प्रणव तिकड़ी ने साम्राज्यवादी, सामन्ती पूंजीवादी मनुस्मृति व्यवस्थ और रंगभेदी श्वेत नवउदारवादी सार्वभौम बाजार में खड़ा कर दिया रवीन्द्रनाथ को। जलेस प्रलेस ने प्रेमचंद को पूंजीवादी विकास का पक्षधर साबित किया तो उन्ही की पोंगापंथी पश्चिम पंग सरकार ने रवीन्द्र जयंती पर सरकारी विज्ञापन जारी करते हुए रवीन्द्रनाथ को शहरीकरण. औद्यौगीकरण, सेज, कैमिकल हब और परमाणु ऊर्जी का प्रवक्ता बना दिया है। तो शाहरूख खान ने अप्रवासी कारपोरेट सवर्ण सत्तावर्ग के अंधाधुंध मुनाफे के लिए रवीन्द्रनाथ को भुनाया तो क्या गुनाह किया? खासकर तब जबकि लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी की अगुवाई में शान्तिनिकेतन अब प्रोमोटरों बिल्दरों माफिया के हवाले है? आनन्दबाजार प्रकाशन सूह ने रवीन्द्र को नीली क्रानित में समाहित करने की मुहिम छेड़कर बांग्ला भाष का बतौर वेश्यावृत्ति इस्तेमाल जारी रखा है अपने गुलाम संस्कृतिकर्मियों के जरिए। जिनमें कोई साहित्य अकादमी अध्यक्ष है तो कोई प्रतिरोध आन्दोलन का मसीहा। इस कार्रवाई को सत्ता और सत्तावर्ग का पूरा समर्थन है तो शाहरुख की आलोचना किस आधार पर?   और पढ़ें...
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• It is Darkness all Over as the Marxist Gestapo in West Bengal Plays Black Magic of Hegemony Load Shedding and Nonstop Ethnic cleansing Continues!

Stripping of women are permitted as per law of West Bengal!So is Ethnic Cleansing!

What a symbol? Gopalkrishna Gandhi will observe a two-hour voluntary power cut daily at the Raj Bhavan from Wednesday.Now it is a perfect BUSH BUDDHA PRANAB triangle to strngthen the ageold Brahminacal system in India!   और पढ़ें...
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• सुनील उवाच- मराठा मानुष से बंगाली क्या कम है? बंगाल में रहना है तो बांग्ला सीखना अनिवार्य। मराठा मानुष के हक हकूक के लिए महाराष्ट्र में जारी शिव सेना के आन्दोलन के तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी कोई आंदोलन शुरू किया जाये? हिंदीभाषियों और तमाम गैर बांग्ला भाषियों के खिलाफ?

गोरखालैण्ड आन्दोलन के तेजी पकड़ने की पृष्ठभूमि में सवर्ण पश्चिम बंगीय बांग्ला राष्ट्रीयता के तेवर उग्र होने लगे। सत्तारूढ़ वाममोर्चा इसी सवर्ण वर्चस्व वाली बांग्ला साम्पेरदायिकता के दम पर राज कर रहा है तीन दशक से। कोलकाता नाइट राइडर और सौरभ गांगुली एक तरफ तो दूसरी ओर ब्राण्ड बुद्ध के जरिए सार्वभौम बाजार और अंधाधुंध पूंजीवादी विकास का वामपंथ। इसके समांतर बुश बुद्ध प्रणव सोमनाथ सुनील का पंचारिष्ट, पश्चिम बंगीय सवर्ण बांगला राष्ट्रीयता के जरिए गोरखालैण्ड और पंचायत चुनाव, सिंगुर और नन्दीग्राम की चुनौतियों का मुकाबला करना चाहता है सत्तावर्ग।

आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स, राजस्थान रायल्स, चेन्न्ई सुपर किंग्स, डेक्कन चार्जर्स, मुंबई इंडियन, बेंगलूर चैलेंजर, दिल्ली डेयर डेविल और पंजाब किंग्स के क्रिकेट कार्निवाल के जरिए मीडिया और बाजार ने सत्तावर्ग के लिए जो मनोरंजन और मुनाफा कमाने का रास्ता तैयार किया है, वह राष्ट्रीयताओं की अस्मिता को गुदगुदाने का काम किस खतरनाक तरीके से कर रहा है और इस खतरनाक खेल की आखिरी मंजिल क्या होगी, ताजा गोरखालैंड आन्दोलन और दिनोंदिन सुनील प्रणव, बुद्ध बुश, सोमनाथ की उग्र होती जा रही पश्चिम बंगीय बांग्ला राष्रीयता और अमेरिकी साम्राज्यवादी मनुस्मृति रंगभेदी मूलनिवासी सफाया मुहिम से साफ जाहिर है।   और पढ़ें...
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• Eat Your Nuclear, Chemical and Biological Weapons, Mr President WAR George Bush! Darling Condy Imperialism Personified!

Mind you, we are chined for thousands and thousands years deprived of our Human Rights. Deprived of Food, Education, Health Care, Livelihood, Clothing. But we Have Nots won`t bear this infinite Enslavement for eternity!

Mr Bush, it may be true as far as the upsurge of so called purchasing power owning Middle Class in India, but the fact remeians that seventy eight percent of India are suffering food insecurity.Metroes are developed with ethnic cleansing of the Ruaral People by the global ruling calss consisting of all colors of political and ideological entities. Mr Bush People starve becuase US MNCs led Ruling Nasdaq sensex class opt for Americanised XXX life style full of wine and women. They have captured all resources and Common people fastly tured in Have Nots starve worldwide! So, it happens in United states also.   और पढ़ें...
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