भारत के तीन राज्यों में ब्राह्यणवादी वर्चस्व और वोटबैंक समायोजन के साथ ससत्तारुढ़ वामपंथी मु्क में मुश्किल में। क्योंकि देशभर में नक्सलबाड़ी में वसन्त के वज्र निनाद के तीस साल बाद माओवाद का असर भारी है। आन्ध्र, ओड़ीशा, बिहार, बंगाल, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र समेत अनेक राज्यों में जनता माओवाद को विकल्प बतौर सोचने लगी है। लोकतान्तरिक रास्ता अख्तियार करके नेपाली माओवादियों ने सत्ता से जुड़े कम्य्युनिस्टों का नेपाल में सफाया ही नहीं कर दिया , बल्कि भारतीय पाखण्डी कोमरेडों के होश भी उड़ा दिये हैं।
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