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6 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (1)
आपने देश की स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता, लोकतन्त्र को दांव पर लगाकर नवउदारवादी नई विश्व व्यवस्था के नाम पर देश की अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। जीवन और आजीविका के नैसर्गिक संसाधनों से लैस कृषि की हत्या कर दी। प्राकृतिक संसाधनों को अमेरिकी श्वेत यहूदी आकाओं के हवाल करते हुए देशभर में मूलनिवासी अछूतों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के कत्लेआम का बंदोबस्त चाकचौबन्द कर दिया। मलाईदार तबके के ग्लोबल सत्तावर्ग के साझेदार और पराजीवी नौकरशाहों, काले कारोबारियों, बिल्डरों, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, बाहुबलियों और माफिया से गढजोड़ करके रंग बिरंगे झण्डों और विचारधाराओं के तहत खले बाजार से श्रमजीवी आम जनता को बेदखल कर दिया। आजीविका और जीवन से विस्थापन का कारोबार शुरूकिया। गली गली में नीली क्रान्ति के दरवाजे खोल दिये। कम्प्यूटर, टीवी, मीडिया के जरिए जनता को अफीम का आदी बनाकर प्रतिरोध की सारी दीवारें ध्वस्त कर दी। नई पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित करते हुए लाचार अपाहिज बना दिया। बार, रेस्तरां, साइबर रियेलिटी, शापिंग माल, अटो मोबाइल, शराब, फैशन, क्रिकेट कार्निवाल, फैशन, ब्राण्ड, स्टाइल और भोग के जरिये सम्भोग से समाधि का राजमार्ग तैयार कर दिये महानगरों से राजपथ तक। और पढ़ें...