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भारत की एनआरआई राष्ट्रविरोधी गुलाम सरकार के असली प्रधानमंत्री ब्राहमण शिरोमणि प्रणव चले बुश की कदमवोशी के लिए

बंगाल के ब्राह्मण ही अगुवा हैं वैश्विक उत्तर आधुनिक मनुस्मृति रंगभेद आधारित यहूदी श्वेत सवर्ण साम्राज्यवाद का। प्रणव के बयानों से साफ जाहिर है कि भारतीय और अमेरिकी जनता को झांसे में रखकर विपक्ष को कोई मौका दिये बगैर भारतीय सत्तावर्ग कैसे अपना वर्चस्व कायम रखने में कामयाब है। बंगाल में नन्दीग्राम नरसंहार से पहले १९७९ में ही वामपन्थियों ने दलितों का कत्लेआम किया था मरीचझांपी ने। ब्राह्मणवादी सत्तावर्ग ने इतिहास की हत्या की है। महादेश के भूगोल को विभाजन का पर्याय बना दिया है। मातृभाषा और संस्कृति, मातृभूमि से निर्लज्ज बलात्कार जारी है। वामपंथी बंगाल में सिंगुर और नंदीग्राम, रिजवानूर त्रासदी के मध्य तसलिमा से निजात पाने के बाद अब भूमि सुधार के दूसरा चरण लागू करने की तैयारी में हैं ताकि बागी सर्वहारा को जमीन, आजीविका और जीवन से वंचित करते हुए गेस्टापो को और मजबूत बनाया जाये। यह सारा खेल प्रणव बुद्ध बुश गठजोड का है़।


भारत की एनआरआई राष्ट्रविरोधी गुलाम सरकार के असली प्रधानमंत्री ब्राहमण शिरोमणि प्रणव चले बुश की कदमवोशी के लिए
पलाश विश्वास
बंगाल के ब्राह्मण ही अगुवा हैं वैश्विक उत्तर आधुनिक मनुस्मृति रंगभेद आधारित यहूदी श्वेत सवर्ण साम्राज्यवाद का। प्रणव के बयानों से साफ जाहिर है कि भारतीय और अमेरिकी जनता को झांसे में रखकर विपक्ष को कोई मौका दिये बगैर भारतीय सत्तावर्ग कैसे अपना वर्चस्व कायम रखने में कामयाब है। बंगाल में नन्दीग्राम नरसंहार से पहले १९७९ में ही वामपन्थियों ने दलितों का कत्लेआम किया था मरीचझांपी ने। ब्राह्मणवादी सत्तावर्ग ने इतिहास की हत्या की है। महादेश के भूगोल को विभाजन का पर्याय बना दिया है। मातृभाषा और संस्कृति, मातृभूमि से निर्लज्ज बलात्कार जारी है। वामपंथी बंगाल में सिंगुर और नंदीग्राम, रिजवानूर त्रासदी के मध्य तसलिमा से निजात पाने के बाद अब भूमि सुधार के दूसरा चरण लागू करने की तैयारी में हैं ताकि बागी सर्वहारा को जमीन, आजीविका और जीवन से वंचित करते हुए गेस्टापो को और मजबूत बनाया जाये। यह सारा खेल प्रणव बुद्ध बुश गठजोड का है़।क्रांति के मसीहा वामपंथी अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी मुहिम के बहाने मुसलमानों का भयादोहन कर रहा है और संघ परिवार ग्लोबल हिन्दू राष्ट्र के ख्वाब में मशगुल अमेरिका परस्ती में पाखणडी वामपंथियों और सत्ताधारी गुलामों से पीछे नहीं हैं कतई। गांधीवाद एक सवर्ण फर्जीवाड़ा है मूलनिवासियों को अनन्तकाल तक गुलाम रखने के लिए। तो समाजवादी वर्णशंकर विचारधारा है, सत्ता की अवैध संतान। आम जनता भारत महादेश के मूसनिवासियों के कत्लेआम में सबके हाथ खून से सराबोर। आम बजट से कोई राहत नहीं मिली। कारपोरेट बढ़ रहे हैं। सेनसेक्स पतन से तबाह हो रहे हैं आम निवेशक और सत्तावर्ग के खजाने लबालब। राजनीति और अर्थव्यवस्था के सारे तन्त्र प्राकृतिक संसाधनों की लूट से सम्बद्ध। मूलनिवासी मारे जायें, इसी आखेट में साथ साथ हैं सारे हत्यारे। बस, दिखावे का विरोध है। नूरा कुश्ती है। ताकि वध्य को बलि का अंदेशा न हो।
अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था की गुलामी बजरिए भारतीय कारपोरेट सत्तावर्ग आम जनता को लोकतन्त्र और समाजवाद देने की कोशिश कर रहा है। शाइनिंग इण्डिया के सेनसेक्स के जरिए एनआरआई राजनेता सुपरपावर हिन्दू राष्ट्र का खावाब बेच रहा है। बजट वाशिंगटन में तय होता है। विश्वबैंक तय करता है आर्थिक नीतियां। किसानों और गरीबों को राहत के दावे किये जाते हैं। रेलवे को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया जाता है। हावड़ा स्टेशन को फाइव स्टार होटल बनाया जैता है। फुटकर बाजार को शापिंग माल में बदल दिया जाता है। हत्या के लिए बलिप्रदत्त मूलनिवासियों के सारे हक हकूक छीनकर देशभर में भूमिपुत्र के नाम पर आत्मघाती हिंसा भड़कायी जाती है। किसानों की आत्महत्या का सिलसिला खत्म नहीं होती।
पक्ष विपक्ष की राजनीति से हालात नहीं बदलते। कानून बदलकर जनता को निशस्त्र करने के खेल में सभी एक दूसरे के मददगार। रोज संविधान की हत्या हो रही है। आधी आवादी विस्थापन को अभिशप्त। भावी पीढ़ी की शिक्षा और चिकित्सा अब क्रय शक्ति पर निर्भर। पर आयातित नीली क्रान्ति का करतब देखिये, केन्द्र और राज्यों में स्ता में भागेदारी की मारामारी के बावजूद सभी सत्ता केंन्द्र सुरक्षित हैं। केन्द्र की सरकार गिर नहीं सकती वाम दक्षिण बंदरघुड़कियों के बावजूद।
प्रणव कितने मजे से कह गये कि चुनाव समय से पहले नहीं होंगे। यकीनन। आम सहमति से ही इस महादेश का विभाजन हुआ है। आम सहमति से ही देश का टुकड़ा टुकड़ा करने को तैयार है सत्तावर्ग, जिसे अपने अमेरिकी श्वेत यहूदी आकाओं के हुक्म तामील जो करने हैं।
तमाशबीन भीड़ नपुंसक आक्रोश के गर्भपात को वसन्त का वज्रनिनाद समझने की खुशफहमी में जीती रहेगी। दुश्मनों की पहचान की तमीज न हो तो महासंग्राम की बात की जा सकती है, नतीजेऔर नियति बदली नहीं जा सकती।
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी अमेरिका यात्रा के दौरान सोमवार को राष्ट्रपति बुश से मुलाकात कर सकते हैं। बुश से उनकी बातचीत में असैनिक परमाणु करार के छाए रहने की संभावना है।
दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे मुखर्जी सोमवार सुबह पौने नौ बजे [भारतीय समय के मुताबिक सवा छह बजे शाम] विदेश मंत्री कोंडालीजा राइस से मुलाकात करेंगे। राइस और प्रणब के बीच भारत अमेरिकी संबंधों को व्यापक करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। दोनों के बीच बातचीत के एजेंडे में परमाणु करार भी शामिल है। राइस से भेंट के बाद मुखर्जी विदेश मंत्रालय में बैठक के बाद प्रणब कारनेगी एंडोमेंट के वरिष्ठ विश्लेषकों और विशेषज्ञों से बंद कमरे में बातचीत करने वाले हैं।
प्रणब की अमेरिका यात्रा का महत्वपूर्ण पल सोमवार दोपहर उनका व्हाइट हाउस जाना होगा। व्हाइट हाउस में वह अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफन हैडले से बातचीत करेंगे। प्रणब वहां बुश से मिल सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक प्रणब मुखर्जी की बैठकों में परमाणु करार को अधिक महत्व दिया जाएगा। बुश प्रशासन करार के नाजुक मुद्दे पर प्रणव और भारत सरकार के विचार जानना चाहता है। बहुत संभव है बुश प्रशासन उन्हें करार की बाबत समय-सीमा की सीधी सूचना भी दे सकता है।
संसद के बजट सत्र का मध्यावकाश हो गया है। राज्यसभा में कल से जबकि लोकसभा में बुधवार शाम के बाद अवकाश घोषित कर दिया गया था। दोनों सदनों की बैठकें १५ अप्रैल से फिर शुरू होंगी।
नागरिक परमाणु करार पर आईएईए के साथ सुरक्षा करार को अंतिम रूप देने तथा इस मामले पर अमेरिका के साथ चर्चा के लिए विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी 24 मार्च से वाशिंगटन का दौरा करेंगे।
अपनी पहली अमेरिका यात्रा के दौरान मुखर्जी अमेरिकी प्रेजिडेंट जॉर्ज बुश से मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर विचार करेंगे। मुखर्जी इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफन हेडले समेत कैबिनेट और प्रशासनिक अफसरों से भी बातचीत करेंगे।
दो दिन के इस दौरे पर मुखर्जी के साथ विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भी होंगे। सूत्रों के मुताबिक मुखर्जी आईएईए के साथ सुरक्षा समझौते पर प्रगति के बारे में भी बुश प्रशासन को बताएंगे।
किसानों के ऋण की माफी के लिए २००८-०९ के आम बजट प्रस्तावों में ६० हजार करोड़ रूपये के पैकेज की घोषणा बजट सत्र के पहले भाग का केन्द्र बिन्दु रहा, क्योंकि दोनों ही सदनों में बजट पर बहस के दौरान यह मुद्दा पूरी तरह से छाया रहा। कृषि और किसानों के हित को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपने विचार पुरजोर ढंग से रखें। रेल बजट में किरायों में कमी और पिछले वर्ष २५ हजार करोड़ रूपये का मुनाफा भी इस सत्र का एक मुख्य बिन्दु था, कीमतों में बढ़ोत्तरी, आर्थिक मुद्दे, नक्सलवाद और विदेश नीति पर जमकर बहस हुई। साथ ही दोनों सदनों ने कई कानूनों को भी पारित किया।

भारत ने आज जमीन से जमीन तक मार करने वाली परमाणु क्षमता वाली मिसाइल अग्नि - एक, का सफल परीक्षण प्रक्षेपण किया। बंगाल की खाड़ी में उड़ीसा तट के निकट व्हीलर द्वीप पर स्थित सैनिक अड्डे से इस मिसाइल का प्रक्षेपण किया गया। हमारे संवाददाता ने बताया कि इस आधुनिक मिसाइल का यह दूसरा प्रक्षेपण था।
कुछ दिन पहले के-१५ सामरिक बेस्ट प्रक्षेपास्त्र और ब्राहमोस की सफल परीक्षण के बाद प्रतिरक्षा वैज्ञानिक और थलसेना ने मिलकर आज फिर अग्नि-१ प्रक्षेपण की व्यावहारिक परीक्षण की है। १५ मीटर लम्बी और मध्यम दूरगामी ये प्रक्षेपास्त्र थलसेना की मिसाइल ग्रुप में शामिल हो चुका है। लेकिन थलसेना ने मौजूद करके रखा गया इसी मिसाइलों से आज एक मिसाइल को चुनकर ये परीक्षण की है। प्रक्षेपास्त्र की लक्ष्यभेद करने का जो टारगेट रखा गया था वो भी हासिल किया गया था।
सरकार ने आतंकवादियों, उग्रवादियों, उपद्रवियों और नक्सलियों की हिंसा के शिकार हुए लोगों की सहायता के लिए एक नई केंद्रीय योजना शुरू करने का फैसला किया है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दास मुंशी ने कहा कि यह योजना सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों पर भी लागू होगी। इसे एक ऐतिहासिक योजना बताते हुए श्री दासमुंशी ने कहा कि हिंसा में मारे गए निर्दोष नागरिकों के परिवारों और स्थाई रूप से विक्लांग हुए लोगों को सहायता दी जाएगी।
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कल प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से मुलाकात की। समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने आपसी मामलों के अलावा जलवायु परिवर्तन के बारे में चर्चा की।



अफ्रीकी नेताओं ने भारत से अफ्रीका की तेजी से प्रगति के लिये सिंचाई, दक्षता विकास और टेक्नोलोजी के हस्तांतरण में मदद करने का अनुरोध किया है। कल नयी दिल्ली में भारत-अफ्रीका परियोजना भागीदारी-२००८ के चौथे सम्मेलन में घाना गणराज्य के उपराष्ट्रपति अलहाजी अलीयू महामा ने अफ्रीका के विकास कार्यक्रमों में भारत की भागीदारी के प्रयत्नों की प्रशंसा की। तंजानिया के उपराष्ट्रपति डाक्टर अली मोहम्मद शेन ने भारत से आग्रह किया कि वह अफ्रीका के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोग करे।



तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि ल्हासा में हिंसक विरोध प्रदर्शन बंद हो जाएं तो वे चीनी नेताओं के साथ बातचीत के लिए पेइचिंग तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने तिब्बत के संकट पर चीन के साथ बातचीत में विश्व के नेताओं की मदद मांगी। कल धर्मशाला में उन्होंने कहा कि वे चीन के राष्ट्रपति हू चिन्ताओ से भी मिलने को तैयार हैं।

दलाई लामा का ये बयान ऐसे समय आया है जब बातचीत के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद, चीन ने उनके साथ बातचीत से इन्कार कर दिया है।



चीन ने तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा पर तिब्बत में हिंसा का षड्यंत्र करने और शिनजियांग क्षेत्र में अलगाववादियों के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया है, जबकि चीन के कुछ असंतुष्टों ने उससे दुष्प्रचार बंद करने की अपील की है।

सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक समाचार पत्र पीपुल्स डेली ने शनिवार को कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता दलाईलामा ने 1959 में चीन के खिलाफ विफल विद्रोह करने के बाद यहां से भागने के उपरांत कभी भी हिंसा नहीं छोड़ी है।

पत्र ने कहा है कि दलाईलामा तिब्बत की स्वतंत्रता की छूट हासिल करने के लिए चीन सरकार पर दबाव डालने के वास्ते पेइचिंग ओलंपिक को बंधक बनाने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले पत्र ने यह भी आरोप लगाया कि दलाईलामा चीन के मुस्लिम बहुल उत्तर पश्चिी शिनजियांग क्षेत्र में एक स्वतंत्र पूर्व तुर्किस्तान की मांग कर रहे अलगाववादियों के साथ आतंकी हमले करने की योजना बना रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि तिब्बत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के लिए उनके समर्थकों ने पूर्व तुर्किस्तान के आतंकी गुटों के साथ साठगांठ मजबूत की है और तिब्बत में आतंकी गतिविधियों की योजना बनाई है। इस बीच 29 चीनी असंतुष्टों के एक दल ने इंटरनेट पर जारी अपील में चीन से दुष्प्रचार बंद करने को कहा है। इस दल ने संयुक्त राष्ट्र के जांच दल को तिब्बत में आने की इजाजत देने और दलाईलामा के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की भी अपील की।








चुनाव २००९, आर्थिक, राजनीतिक तथा अंतर्राष्ट्रीय मामलों से संबंधित यूपीए सरकार की नीतियों के साथ विवाद के परिपेक्ष में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज से हैदराबाद में शुरू हो गया है। हमारी संवाददाता ने बताया कि तीन वर्ष बाद हो रहे इस सम्मेलन में पार्टी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति पर विचार किये जाने के प्रस्ताव के मददेनजर महत्व बढ़ गया है। सम्मेलन में अमरीका परमाणु समझौते से लेकर महंगाई तक की चर्चा होगी।

अधिवेशन को जाने वाले सारे रास्ते लाल रंग से भरा हुआ। देश के कोने-कोने से आए हुए हजार से ज्यादा प्रतिनिधि इस अधिवेशन में भाग ले रहे हैं। पार्टी के सेन्टर से

क्ररेटेरियल सदस्यों के साथ-साथ दुनियाभर के २६ राज्य से आए हुए लगभग ३० प्रतिनिधि इस सदन की चर्चाओं में भाग लेंगे। भारत अमरीका परमाणु समझौता को लेकर महंगाई, तेलंगाना के लिए अलग राज्य का दर्जा, तीसरी प्रत्यांगनाएं, खासकर के आने वाले लोकसभा चुनावों को मध्य नजर पार्टी के राजनीतिक वियोदक बहुत से मुद्दों पर आने वाले चार दिन ये अधिवेशन चर्चा करेंगी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय महासचिव ए. बी. बर्धन ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारात, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक महासचिव देवव्रत बिस्वास, आर एस पी के महासचिव टी० जे० चन्द्रचूड़न और अबानी रॉय जैसे शीर्ष नेता सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।



हिंदुस्तान, इकनॉमिक टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा ने बढ़ती महंगाई को पहली हेडलाइन बनाया है। राष्ट्रीय सहारा ने लिखा है-होली के रंग में महंगाई की भंग, मुद्रास्फीति पांच दशमलव नौ-दो फीसद पर, खाद्य पदार्थ और महंगे। इकनॉमिक टाइम्स ने भी लिखा है-रंग में भंग : महंगाई बढ़ी। हिंदुस्तान लिखता है-महंगाई की मार बेशुमार। दैनिक जागरण ने बढ़ती का नाम महंगाई शीर्षक से संपादकीय में लिखा है कि माना कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत छलांग लगा रही है और उससे भारत पर असर पड़ रहा है लेकिन आखिर इसका क्या औचित्य कि उन वस्तुओं के दाम भी थामे नहीं थम रहे, जिनका उत्पादन देश में होता है अथवा जिनकी कमी दूर करने के लिए आयात का सहारा लिया जा रहा है।दैनिक ट्रिब्यून ने दलाई लामा के चीन से वार्ता के प्रस्ताव को अपनी पहली सुखर्ंी बनाया है तो अमर उजाला की सुर्खी भारत सरकार का वह बयान है जिसमें कहा गया है, सरबजीत के बदले नहीं छोड़ेंगे कैदी। अन्य अखबारों ने भी इस खबर को अपने पहले पृष्ठ पर जगह दी है। अमर उजाला ने संपादकीय में बेटियों का जज्बा शीर्षक से लिखा है कि सरबजीत की बहादुर बेटियों ने साफ कह दिया है कि उनके पिता की रिहाई के बदले अगर पाकिस्तान किसी आतंकवादी को छोड़ने की मांग करता है तो उन्हें रिहाई नहीं चाहिए। दांव पर लगी पिता की जिंदगी से घबराकर हायतौबा मचाने के बजाए ऐसा साहसिक बयान देकर उन्होंने जता दिया है कि उनके लिए देशभक्ति के मायने क्या हैं।

तसलीमा नसरीन के भारत छोड़ने पर हिंदुस्तान ने तसलीमा का दर्द शीर्षक से लिखा है कि यह एक स्वाधीनचेता लेखक की अकसर नियति होती है कि वह दमन और निर्वासन भुगते। दैनिक भास्कर लिखता है कि यहां के बौद्धिक और लेखकीय समाज से तसलीमा को पूरा सहयोग और समर्थन मिला, लेकिन वह जनभावनाओं पर भारी नहीं पड़ सका।

आतंकवाद के पीड़ितों को मुआवजा देने का मंत्रिमंडल का फैसला दैनिक भास्कर और जनसत्ता की पहली हेडलाइन है। शिवानी हत्याकांड में दोषियों को सोमवार को सजा सुनाए जाने की खबर भी अखबारों में छाई हुई है।

सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीना अब काफी महंगा पड़ेगा। राजस्थान पत्रिका ने लिखा है-कश लगाने पर भारी जुर्माना, होगा कानून में संशोधन। हिंदुस्तान लिखता है-पांच हजार की पड़ जाएगी एक सिगरेट। राष्ट्रीय सहारा के अनुसार-खुलेआम धूम्रपान पर अब लगेगा एक हजार रुपए जुर्माना। बकौल अमर उजाला दफ्तर में कश यानी मुसीबत को न्यौता।

बसंत उत्सव मनाते और होली खेलते बच्चों और महिलाओं की रंगीन तस्वीरें दैनिक जागरण, अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका और जनसत्ता के मुखपृष्ठ पर है।

दैनिक भास्कर ने खबर दी है कि होश उड़ा देगी गर्मी, सबसे गर्म वर्षों में होगा २००८।

चीन के चिनच्यांग प्रांत में जबर्दस्त भूकंप आया है। यह इलाका चीन-तिब्बत सीमा पर है। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता सात दशमलव दो आंकी गई जो इस इलाके का अब तक का सबसे बड़ा भूकंप है। अभी तक जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है।

बांग्लादेश में कल शाम राजधानी ढाका में भूकम्प का हल्का झटका महसूस किया गया। हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि रिक्टर पैमाने पर चार दशमलव चार की तीव्रता वाला यह भूकम्प नारायणगंज, मेमनसिंह और संगाइल में महसूस किया गया। भूकम्प का केन्द्र ढाका से ९३ किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में था। जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ।

आठ मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति शून्य दशमलव आठ एक प्रतिशत बढ़कर, पांच दशमलव नौ-दो प्रतिशत हो गई है। ऐसा फलों, सब्जियों और दालों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ है।



भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड -सेबी ने सर्राफा बाजार से कहा है कि वह गैर -आईपीओ शेयरों पर कारोबार के पहले ही दिन प्राइस बैंड न लगाये। सेबी ने सभी स्टॉक एक्सचेंजों से इस पर तत्काल अमल करने को कहा है। इस कदम का उद्देश्य प्रतिभूति में निवेशकों के हितों की रक्षा करना और प्रतिभूति बाजार का विनियमन करना है।

फिलहाल स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा विलय, आमेलन, पूंजीगत कटौती और अन्य स्टॉक एक्सचेंज में सीधे सूचीबद्ध कराने जैसे मामलों में, कारोबार के पहले ही दिन प्राइस बैंड लगाने की व्यवस्था है। सेबी ने कहा है कि अन्य मामलों में, कारोबार के पहले दिन प्राइस बैंड लगाने की व्यवस्था कायम रहेगी।

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भारत के सन्‌ २०१८ तक विश्व बाजार पर छाने वाले देशों चीन, ब्राजील और रूस में शामिल हो जाने की संभावना है। ब्रिटेन स्थित चार्टर्ड मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट के एक अध्ययन के अनुसार आगामी वर्षों में कार्य और प्रबंधनशैली, परीक्षा समान होगी जिसमें यह देखा जायेगा कि व्यापार और प्रबंधन के संगठन इस परीक्षा के लिए कैसी तैयारी करते हैं।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि आने वाले दिनों में व्यापार जगत पर भारत, ब्राजील, रूस, चीन, पूर्वी यूरोप और अन्य विकासशील देशों का प्रभाव बढ़ जायेगा।



आईएईए के मसौदे को मंजूरी दे सकते हैं वाम दल!

निर्मल पाठकFriday, March 21, 2008 22:42 [IST]
नई दिल्ली: वामपंथी दल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भारत केंद्रित सुरक्षा उपायों संबंधी मसौदे को एजेंसी के बोर्ड के समक्ष पेश करने की अनुमति दे सकते हैं। ऐसा हुआ तो इसका अर्थ होगा कि वाम दलों को मसौदा मंजूर है। बोर्ड की मंजूरी के बाद ही मसौदा समझौते की शक्ल लेगा। बोर्ड की बैठक मई के पहले पखवाड़े में होने की संभावना है।

रणनीतिकारों का तर्क : यूपीए के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिए हैं वाम दल मसौदे को आईएईए के बोर्ड में भेजने पर सहमत हो सकते हैं। वामदलों को मनाने में लगे सरकार के रणनीतिकारों का तर्क है कि आईएईए बोर्ड में स्थिति साफ नहीं है। हो सकता है कि वह समझौते को खारिज कर दे।

कई परीक्षाएं शेष : बोर्ड ने यदि मंजूरी दी भी, तो समझौते को एनएसजी की परीक्षा पास करनी होगी। उसके बाद अमेरिकी कांग्रेस में अंतिम परीक्षा पास होने के बाद भारत सरकार के दस्तखत होने पर ही करार को अमल में लाया जा सकेगा। अंतिम मंजूरी को लेकर वामदलों ने अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि रणनीतिकारों के मुताबिक वामदलों ने इसे खारिज भी नहीं किया है।











चर्चा के लिए अमेरिका जाएंगे प्रणब

Sunday, March 23, 2008 08:50 [IST]
नई दिल्ली. नागरिक परमाणु करार पर आईएईए के साथ सुरक्षा करार को अंतिम रूप देने तथा इस मामले पर अमेरिका के साथ चर्चा के लिए विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी 24 मार्च से वाशिंगटन का दौरा करेंगे।

अपनी पहली अमेरिका यात्रा के दौरान मुखर्जी अमेरिकी प्रेजिडेंट जॉर्ज बुश से मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर विचार करेंगे। मुखर्जी इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफन हेडले समेत कैबिनेट और प्रशासनिक अफसरों से भी बातचीत करेंगे।

दो दिन के इस दौ

एजेंसीरे पर मुखर्जी के साथ विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भी होंगे। सूत्रों के मुताबिक मुखर्जी आईएईए के साथ सुरक्षा समझौते पर प्रगति के बारे में भी बुश प्रशासन को बताएंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों के विरोध के कारण ये समझौता अटका पड़ा है। इसके पहले प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि परमाणु समझौते पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण (आईएईए) के साथ सुरक्षा मापदंडों पर बातचीत पूरी हो गई है।



विदेश मंत्री मुखर्जी सोमवार को वॉशिंगटन में राष्ट्रपति बुश से मिलेंगे

21/03/2008




(वी.ओ.ए न्यूज़)


Indian External Affairs Minister Pranab Mukherjee
भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी संभवतः सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से वॉशिंगटन में मिलेंगे और उन्हें भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे के बारे में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ हुई बातचीत की प्रगति के बारे में जानकारी देंगे ।



श्री मुखर्जी विदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार अमेरिका जा रहे हैं । वह अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और बुश प्रशासन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उच्च अधिकारियों से भी मिलेंगे ।



सुश्री राइस और श्री मुखर्जी सोमवार को विदेश मंत्रालय में द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने के कई पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जिनमें नागरिक परमाणु पहल भी शामिल होगी ।



श्री मुखर्जी, जो परमाणु समझौते पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामपंथी दलों की समन्वय समिति के अध्यक्ष भी हैं, श्री बुश से द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करने के लिए भी कहेंगे, जिसमें परमाणु सौदे पर विशेष जोर दिया जाएगा । हालांकि बातचीत में परमाणु मुद्दा छाए रहने की उम्मीद है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि इस स्तर की बैठक केवल एक या दो मुद्दों तक सीमित नहीं होती ।






जानबूझकर साझा कार्यक्रम से हटी सरकार : वामदल

एजेंसीSunday, March 23, 2008 20:12 [IST]
हैदराबाद. वाम नेताओं ने केंद्र की यूपीए सरकार पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम में निहित स्वतंत्र विदेश नीति से जानबूझकर हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने भाजपा व कांग्रेस से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प को समय की जरूरत बताया।

यहां रविवार से शुरू हुई भाकपा की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव एबी वर्धन ने कहा, ‘हमें (आईएईए के साथ) भारत केंद्रित सुरक्षा उपाय समझौते से कोई समस्या नहीं है। हमारा विरोध अमेरिका के साथ परमाणु करार से है।’ उन्होंने कहा कि करार परमाणु ऊर्जा हासिल करने का प्रयास भर नहीं है बल्कि यह सामरिक भागीदारी की कोशिश है।

करार के खिलाफ संघर्ष : वहीं कांग्रेस में शामिल हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने भी कहा कि वाम दल एटमी करार के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी हैं और वे देश को अमेरिका के सामरिक रिश्तों की जकड़न से अलग करने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। भाकपा की राष्ट्रीय कांग्रेस में माकपा, फारवर्ड ब्लॉक और रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

तीसरे विकल्प पर जोर : तीसरे विकल्प की चर्चा करते हुए वर्धन ने कहा, ‘यही समय है कि हमें लोक महत्व के मुद्दों पर साझा संघर्ष के जरिए कांग्रेस व भाजपा दोनों से अलग वाम लोकतांत्रिक विकल्प निर्मित करने का प्रयास करना चाहिए।’ करात ने भी लोगों के सामने तीसरा विकल्प पेश करने के लिए वाम एकता को जरूरी बताया।

उग्र आंदोलन की चेतावनी : आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को काबू में न रख पाने के लिए यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए वर्धन ने आवश्यक वस्तुओं में वायदा व्यापार पर रोक, आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन और व्यापक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बहाली जैसी मांगों के समर्थन में उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी।

निजी क्षेत्र में आरक्षण का समर्थन : वर्धन ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध करते हुए निजी क्षेत्र में आरक्षण का समर्थन किया। उन्होंने कर्ज माफी योजना को किसानों की समस्याएं सुलझाने के लिए नाकाफी बताया।

चार दिवसीय पार्टी सम्मेलन में 30 देशों के कम्युनिस्ट अतिथियों सहित एक हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।



परमाणु समझौते पर विपक्ष का वॉकआउट

http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2007/12/071205_parilament_nuclear.shtml


प्रणब मुखर्जी ने राज्य सभा में परमाणु समझौते पर जबाव दिया
अमरीका से परमाणु समझौते के मुद्दे पर संसद में वामपंथी दलों और पूरे विपक्ष ने बुधवार को वॉकआउट किया जबकि केंद्र सरकार ने दोहराया है कि वो परमाणु समझौते से हाथ नहीं खींचेगी.
राज्यसभा में परमाणु मसले पर बोलते हुए विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि समझौते का विरोध करने वालों का पक्ष मज़बूत नहीं है और देश में आर्थिक विकास की गति बनाए रखने के लिए सरकार समझौते से पीछे नहीं हटेगी.

प्रणब मुखर्जी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत हाइट एक्ट के तहत नहीं बल्कि 123 समझौते के तहत काम करेगा.

विदेश मंत्री का कहना था कि भारत परमाणु परीक्षण करने का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा.

प्रणब मुखर्जी का कहना था इसका जो भी परिणाम होगा हम भुगतने के लिए तैयार हैं, जैसा 1974 और 1998 में हुआ था.

वॉकआउट

करीब एक घंटे तक चला प्रणब मुखर्जी का जबाव विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर सका.

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी का कहना था, मैं संतु्ष्ट नहीं हूँ. मैं अभी भी समझौते के ख़िलाफ़ हूँ. संसद के ज़्यादातर सदस्य समझौते के पक्ष में नहीं है.

जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेता जसवंत सिंह ने इस बात पर सवाल उठाया कि सरकार समझौता लागू करने के लिए इतनी उतावली क्यों है.

उनका कहना था, थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए. लोगों को और संसद को अपने साथ लेकर चलना चाहिए.

विपक्ष और वामदलों की आशंकाओं का जबाव देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि समझौते का भारत की विदेश नीति या सामरिक नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.



































































पाकिस्तान के पूर्व सैनिक शासक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि देश लोकतंत्र के नए युग में प्रवेश कर रहा है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर सैनिक परेड को संबोधित करते हुए श्री मुशर्रफ ने कहा कि उन्हें अपनी मातृभूमि को प्रगति और खुशहाली के पथ पर अग्रसर करने का गौरव प्राप्त है।

इस बीच, पाकिस्तान के अगले मनोनीत प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी, श्री मुशर्रफ के राजनीतिक विरोधियों द्वारा गठित गठबंधन सरकार के सदस्यों के साथ मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को संसद द्वारा श्री गिलानी के प्रधानमंत्री पद की पुष्टि किये जाने की संभावना है। श्री गिलानी ने कहा है कि वे नई सरकार की प्राथमिकताओं से संबंधित नीतिगत वक्तव्य देंगे।

भूटान के दोनों प्रमुख दलों ने कल होने वाले देश के पहले आम चुनाव के लिए प्रचार पूरा कर लिया है। यह ऐतिहासिक चुनाव भारत सहित ४० अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षकों की देखरेख में कराया जा रहा है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और ड्रक कुऐनसुम त्शोग्पा (डीपीटी) के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है क्योंकि दोनों पार्टियों के चुनावी मुद्दे लगभग एक समान हैं।

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ताईवान के मनोनीत राष्ट्रपति मा यिंग जियू ने कहा है कि अगर तिब्बत में हालात और बिगड़े, तो वे पेइचिंग ओलम्पिक के बहिष्कार पर विचार करेंगे। कल राष्ट्रपति चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाले श्री जियू के इस बयान से ताईवान और चीन के संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है। श्री जियू ने ताईपेई में कहा कि तिब्बत में स्थिति और बिगड़ने पर वे इस वर्ष के पेइचिंग ओलम्पिक में अपने खिलाड़ियों को न भेजने की संभावना पर विचार करेंगे।

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चीन के तीस बु+द्धिजीवियों के एक दल ने चीन सरकार से अपील की है कि वह इसे स्वीकार करे कि तिब्बत में विरोधियों को कुचलने की उसकी नीति विफल रही है। विदेशों में रह रहे चीनी समुदायों के लोगों के लिए वेबसाइट पर भेजे खुले पत्र में इस दल ने कहा है कि चीन के समाचार माध्यमों पर एकतरफा प्रचार से अन्तर्जातीय कलह बढी है और स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

इस बीच, ल्हासा में चीनी सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में मरने वालों की संख्या २२ हो गई है जबकि दलाई लामा की निर्वासित सरकार का कहना है कि ९९ तिब्बतियों की मौत हो चुकी है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार दंगा ग्रस्त ल्हासा में जनजीवन सामान्य हो रहा है।

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श्रीलंका की सेना का कहना है कि उत्तरी क्षेत्र में कल से हुई अलग अलग मुठभेड़ों में एलटीटीई के कम से कम साठ लड़ाकू और छह सैनिक मारे गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मीडिया केन्द्र के प्रवक्ता ने हमारे कोलम्बो संवाददाता को बताया कि कल देश के उत्तरी पश्चिमी जिले मन्नार में हुई लड़ाई में २५ तमिल टाइगर्स मारे गए और २५ घायल हुए। इससे पहले की खबरों के अनुसार सेना ने मन्नार की लड़ाई के बाद एक किलोमीटर वर्ग क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था।

सैन्य सूत्रों ने यह भी खबर दी है कि वावूनिया और वेली-ओया में हुई लड़ाई में १४ जवान मारे गए। मुहामलाई क्षेत्र में कल घमासान लड़ाई हुई थी जिसमें सात तमिल टाइगर्स मारे गए।

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दक्षिणी अफगानिस्तान में एक बम हमले में दो विदेशी सैनिक मारे गये हैं। इन सैनिकों की मौत कंधार प्रान्त में गश्त के दौरान बम हमले से हुई। अभी यह नहीं बताया गया है कि ये सैनिक किस देश के हैं। एक सप्ताह पहले ही, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल के लिए काम कर रहे चार सैनिक कंधार और हेलमंड प्रान्तों में अलग - अलग हमलों में मारे गये थे।

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इराक की राजधानी बगदाद के केन्द्र में स्थापित ग्रीन जोन पर आतंकवादियों ने हमला किया है। इसी क्षेत्र में इराकी सरकार की इमारतें और ब्रिटेन तथा अमरीका के दूतावास हैं। हालांकि इस क्षेत्र की सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं फिर भी खबरों के अनुसार आतंकवादियों ने तोपों से इस क्षेत्र पर हमला किया जो लगभग १५ मिनट तक जारी रहा। कम से कम दस विस्फोट सुने गए। इस घटना में मरने वालों की संख्या के बारे में अभी तक कोई खबर नहीं मिली है।

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जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने घोषणा की है कि उनके जीते - जी विपक्ष कभी सत्ता में नहीं आ पायेगा। ८४ वर्षीय श्री मुगाबे ने अपने एक चुनावी भाषण में विपक्षी मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज -एमडीसी पर ब्रिटेन के साथ संबंध रखकर देशद्रोह का आरोप लग