क्रांति के मसीहा वामपंथी अमेरिकी साम्राज्यवाद विरोधी मुहिम के बहाने मुसलमानों का भयादोहन कर रहा है और संघ परिवार ग्लोबल हिन्दू राष्ट्र के ख्वाब में मशगुल अमेरिका परस्ती में पाखणडी वामपंथियों और सत्ताधारी गुलामों से पीछे नहीं हैं कतई। गांधीवाद एक सवर्ण फर्जीवाड़ा है मूलनिवासियों को अनन्तकाल तक गुलाम रखने के लिए। तो समाजवादी वर्णशंकर विचारधारा है, सत्ता की अवैध संतान। आम जनता भारत महादेश के मूसनिवासियों के कत्लेआम में सबके हाथ खून से सराबोर। आम बजट से कोई राहत नहीं मिली। कारपोरेट बढ़ रहे हैं। सेनसेक्स पतन से तबाह हो रहे हैं आम निवेशक और सत्तावर्ग के खजाने लबालब। राजनीति और अर्थव्यवस्था के सारे तन्त्र प्राकृतिक संसाधनों की लूट से सम्बद्ध। मूलनिवासी मारे जायें, इसी आखेट में साथ साथ हैं सारे हत्यारे। बस, दिखावे का विरोध है। नूरा कुश्ती है। ताकि वध्य को बलि का अंदेशा न हो।
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