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कारपोरेट राजनीति में मुख और मुखौटा का विभ्रम, नूरा कुश्ती और विज्ञापनी जन प्रतिबद्धता, साम्राज्यवाद विरोध

वर्चस्व के खेल में नरसंहार की संस्कृति और मृगतृष्णा में तब्दील लोकतंत्र





कारपोरेट राजनीति में मुख और मुखौटा का विभ्रम, नूरा कुश्ती और विज्ञापनी जन प्रतिबद्धता, साम्राज्यवाद विरोध
वर्चस्व के खेल में नरसंहार की संस्कृति और मृगतृष्णा में तब्दील लोकतंत्र
वोटों की राजनीति में दांव पर देश, स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता, मानवाधिकार और नागरिक अधिकार। कत्लगाह में तब्दील जनपद तमाम।
पलाश विश्वास

सोनिया गांधी ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली से संघ परिवार पर करारा प्रहार के साथ चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इटालियन कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अपनी नानी के पिता की राह पर नेहरु गांधी वंश की विरासत के मुताबिक भारत की खोज पर निकले हैं। यह अश्वमेध यज्ञ का नया नाम है और राह भी उनकी मूलनिवासी आदिवासी इलाकों से होकर गुजर रही है। ओड़ीशा में गरीबी से पहली दफा मुखातिब राहुल मीडिया को मर्मस्पर्शी बाइट देने में बिजी हैं। तो इस बीच राजधानी में माकपा मुख्यालय पर माकपाई हमलावर संघियों से भिड़ गये। मराठा मानुष विवाद पर राजनीति की गर्म तवा पर रोटी सेंकने से वंचित वामपंथियों को त्रिपुरा में भारी जीत का जश्न न मनाते मनाते शानदार मुद्दा मिल गया है। अब मुसलमानों से कहा जा सकता है कि उनके वजूद के लिए हिन्दुत्व और संघ परिवार कितना खतरनाक है। तोगड़िया ने भी लगे हाथों बाल ठाकरे को चुनौती दे डाली है कि हिम्म्त हो तो मुंबई में रह रहे पांच लाख बांग्लादेशियों को निकाल बाहर करें। तसलिमा के निष्कासन के बाद वामपंथ के हित में यह तो सोने पर सुहागा हो गया।

भारतीय जनता को क्या हासिल हुआ?
मूलनिवासी मारे जा रहे हैं। सेज और रसायन, परमाणु, शहरीकरण, औदौगीकरण के बहाने जीवन आजीविका पर हमले अनन्त। भारतीय संसद के अमेरिकी बजट सत्र में पेश आम बजट और रेलवे बजट से नवउदारवाद का परचम लहराया और लोकलुभावन जैस मीडिया हाइप भी खूब हुआ। क्रकेट कार्निवाल अलग। पर राहत क्या मिली? मुद्राफीति पर अंकुश नहीं लगा। मंहगाई आसमान छूने लगा। सेनसेक्स शाइनिंग इण्डिया का एकमात्र पैमाना शेयर सूचकांक धराशायी। भारतीय अर्थ व्यवस्था को अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जौड़ने का नतीजा निकलने लगा है। पर होश किसे है? राष्ट्रीयता और भूमिपुत्र की समस्याओं को नजरअंदाज करके वोटबैंक की राजनीति से सत्तावर्ग की रंग बिरंगी पार्टियां मातृभूमि से बलात्कार कर रही है। इतिहास से हम सबक नहीं लेते। सोवियत संघ के विघटन के बाद राष्ट्रीयता जैसे मुद्दे को लेकर बचकानी राजनीति हो रही है। गोरखालैंड की आग फिर सुलगने लगी है। सुबास घीसिंग का दामन छोड़कर वामपंथी विमल गुरुंग को उठालकर बंगाली ब्राहमण वर्चस्व बनाये रखने के फिराक में है। नन्दीग्राम नरसंहार की बरसी १४ मार्च को है। नैनो ने सिंगुर को धो डाला। त्रिपुरा की जीत के जश्न मध्ये साम्प्रदायिकता, हिन्दुत्व और फासीवाद के खिलाफ अभियान शुरू करने का बहाना भी मिल गया है।

इसी बीच अमेरिकी बजटसत्र के अभिभाषण, संसद और संसद के बाहर नूरा कुश्ती, तमाम बयानों के बावजूद भारत अमेरिका परमाणु समझौते पर सभी पार्टियों की मिलीभगत से दांव पर लग गयी हैं भारत की स्वत्तन्त्रता और सम्प्रभुता। द्वितीय विश्वयुद्ध, भारत चीन युद्ध, तेलंगाना किसान विद्रोह, ढिमरी ब्लाक, श्रीकाकुलम, नक्सलबाड़ी से लेकर सिंगुर नन्दीग्राम तक सत्ता वर्ग और साम्राज्यवादियों के हितों को सर्वोपरि रखने वाले वामपंथी भोपाल गैस त्रासदी के जिम्मेवार डाउज को न्यौता देकर नंदीग्राम में जनसंहार से बाज नहीं आये। शरणार्थी आन्दोलन और पुनर्वास आन्दोलन का दम भरने के बावजूद देशभर से दलित बंगाली शरणार्थियों को मरीचझांपी बुलाकर गोलियों से भून डाला। शहरीकरण और विकास के बहाने भूमि सुधार, किसान आंदोलन, खाद्य आंदोलन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और मार्क्सवाद लेनिनवाद माओवाद तक को रेजीमेंटेड गेस्टापो वाहिनी का औजार बना दिया कारपोरेट साम्राज्यवाद के हित में। वियतनाम के कसाई का पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत। फिर बुश बुद्ध प्रणव प्रियठबंधन। बंगाल को बंगभूमि बनाने का अभियान। परमाणु समझौते का विरोध, पर अमेरिकी और पश्चमी उद्योगपतियों, कारपोरेटों, पूंजीपतियों के कदमों में बिछ जाना और ऐन चुनाव से पहले, करीब पूरे पांच साल तक वाशिंगटन के गुलामों की सरकार को कदम कदम पर समर्थन के बाद समर्थन वापसी की बंदरघुड़की। पुरोहित तन्त्र से और क्या उम्मीद रखेंगे इस देश के वध्य मूलनिवासी। अरुणाचल पर चीनी दावे पर खामोश और विदेश नीति पर यह गठजोड़?

मुख और मुखौटा के विभ्रम के आर पार सत्य का दर्शन असम्भव है। वामपंथी और संघ परिवार एक दूसरे के घोषित दुश्मन पर मनुवादी वै्श्विक उत्र आधुनिक साम्राज्यवाद और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को कायम रखने के लिए दोनों मनमोहन के साथ। ये मकियां देते हैं। पर सरकार को पूरा सहयोग। वे नरम हैं और अमेरिका के कंधे पर सवार हिन्दुत्व को ग्लोबल साम्राज्यवाद के यहूदी श्वेत गठजोड़ से जुड़कर अश्पृश्यता और रंगभेद को और मजबूत करने को बेताब। ये मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा तो वे मु्स्लिम विरोधी। पर कुल जमा हासिल? अमेरिकी इटालियन उपनिवेश।

अब प्रणव मुखर्जी के बयानों पर तनिक गौर फरमायें। सोनिया और मनमोहन युद्ध के तेवर में हैं तो बंगाल के ये पुरोहित शान्तिजल छिड़कते हुए भारत अमेरिका परमाणु करार के लिए सरकार को कुर्बान न करने क राग अलाप रहे हैं। किसे कौन धोखा दे रहा है? करार की प्रक्रया जारी है। सरकार गिरते गिरते दस्तखत भी हो जायेंगे। फिर चलेगी नूरा कुश्ती। जनता लड़ मरे मराठा मानुष, भूमिपुत्र, गोरखालैणड, राम सेतु, मन्दिर मसजिद, मिथ्या आरक्षण, आदि मसलों को लेकर और इनका देश को बेचने का कारोबार जारी रहे। विरोध की नौटंकी जारी रहे और पूरा देश सेज में तब्दील हो जाये, जिसपर कारपोरेट आका सुहागरात मनाये बलाकार उत्सव में। कम्प्यूटर, नेट, मोबाइल, टीवी और अंग्रेजी के मार्फत नीली क्रांति चरम पर है। प्रतिरओध की आशंका नहीं है। देश की सुरक्षा सेना में ३७ लाख जवान और निजी सेनाएं पचालस लाख के करीब। सचमुच वामपंथी दक्षिणपंथी मिलकर इस देश को सोवियत संघ बना ही लेंगे। जनपद हुए खत्म । अब प्रदेश बन जायेंगे राष्ट्र। हर कोई होगा विस्थापित , बेनागरिक। तब मराठा मानुष और भूमिपुत्रों को किसी आंदोलन की जरुरत नहीं होगी। तीन छोटे राज्य बनाकर उत्तर भारत में राष्ट्रीयता मसले की हवा निकाल दी। पूर्वोत्तर और कश्मीर में पचास साल से सैन्य शासन है। जब सारे प्रदेश के लोग बाहरी लोगों के खिलाफ खड़े हो जायेंगे तब भारत देश की दरकार क्या रहेगी? मजे से बनते रहेगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री। रूस और यूक्रेन की तर्ज पर एक दूसरे पर साधेंगे परमाणु निशाना और रक्षा सौदों में कमीशन खोरी बेहिसाब।



विदेशी शेयर बाजारों की मंदी और मँहगाई के पिछले दस माह के उच्च स्तर पर पहुँच जाने के समाचारों के बीच देश के शेयर बाजारों को शुक्रवार को जोरदार झटका लगा। बीएसई का सेंसेक्स 557 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 150 अंक की डुबकी लगाई।विदेशी शेयर बाजारों की मंदी और मँहगाई के पिछले दस माह के उच्च स्तर पर पहुँच जाने के समाचारों के बीच देश के शेयर बाजारों को शुक्रवार को जोरदार झटका लगा। बीएसई का सेंसेक्स 557 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 150 अंक की डुबकी लगाई। आलोच्य सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति की दर में बढ़ोतरी मुख्यत मछली के दाम में छह प्रतिशत वृद्धि हुई है और मटन पाँच प्रतिशत, साग सब्जी एवं फल चार प्रतिशत, उड़द, दूध और रागी दो-दो प्रतिशत और चना एक प्रतिशत बढ़ा है।आलोच्य सप्ताह के दौरान खाद्य तेलों की तेजी ने भी मुद्रास्फीति बढ़ाने में मदद की। सूरजमुखी के तेल में आठ प्रतिशत, आयातित खाद्य तेलों में पाँच प्रतिशत, बिनौला और चावल छिल्का तेल में दो-दो प्रतिशत और नारियल, मूंगफली, रेपसीड और सरसों के तेल तथा गुड़ में एक-एक प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान घी के दाम में एक प्रतिशत और खांडसारी के दाम में दो प्रतिशत की कमी आई।कच्चे तेल की रिकॉर्ड कीमतों और यूरो के मुकाबले डॉलर के पिघलने के समाचारों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आज सोने के भाव नए शिखर पर पहुँच गए। स्थानीय सर्राफा बाजार आज महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में बंद है।सिंगापुर से प्राप्त खबरों में चाँदी भी सोने से पीछे नहीं है और सटोरिया लिवाली से इसने 27 वर्ष के नए भाव का रिकॉर्ड बनाया।सिंगापुर में सोना हाजिर कामकाज में 991.90 डॉलर प्रति ट्राय औंस बोला गया। कल न्यूयार्क में यह 985.70-986.50 डॉलर प्रति ट्राय औंस था।विश्लेषकों का मानना है कि इस स्तर को देखते हुए सोने ने 1000 डॉलर का रिकॉर्ड बनाने की दिशा में मजबूती से कदम रखा है। न्यूयॉर्क कोमेक्स फ्यूचर्स में सोने के भाव 995 डालर प्रति ट्राय औंस के करीब थे।




कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुए हमलों पर गंभीर चिन्ता व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि देश में धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करने वालों के प्रति सख्ती से निपटा जाना चाहिए।श्रीमती गाँधी ने यहाँ रामलीला मैदान पर पार्टी द्वारा आयोजित एक विशाल रैली में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा पिछले दिनों उत्तर भारतीयों के खिलाफ किए गए हमलों और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भड़काने वाले बयानों का सीधे उल्लेख किए बिना कहा कि धार्मिक तथा क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करनेवालों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश सबका है और किसी भी नागरिक को किसी भी हिस्से में रहने का पूरा अधिकार है और उनके जान-मान की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।



सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि न तो कांग्रेस और न ही इसके सहयोगी दल 2009 के पहले चुनाव चाहते हैं। भारत-अमेरिका असैन्य करार की खातिर सरकार को भेंट चढ़ाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अमेरिका से कह दिया है कि करार को अमली जामा पहनाने के लिए वह निर्धारित समय के भीतर काम नहीं कर सकता।समय पूर्व चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने एक टीवी चैनल से कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय (2009) पर चुनाव चाहते हैं।गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं हैं क्योंकि वाम दलों के रुख से हम भली-भाँति परिचित हैं।उन्होंने ये बातें परमाणु करार को प्रभावी बनाने की स्थिति में सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में वाम दलों की धमकी से जुड़े सवाल के जवाब में कहीं।मुखर्जी ने कहा मैं नहीं मानता कि कोई भी समय पूर्व चुनाव की सोच रहा है। गठबंधन का कोई भी सहयोगी या समर्थक समय पूर्व चुनाव की बात नहीं कर रहा हैं। भाकपा महासचिव एबी वर्धन द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को कल भेजे गए धमकी भरे पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने पत्र को नहीं देखा है बल्कि इसके बारे में सिर्फ अखबारों में पढ़ा।उन्होंने हालाँकि माकपा महासचिव प्रकाश करात द्वारा लिखे पत्र का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने संप्रग वाम समिति की बैठक जल्द बुलाने की बात कही थी।आईएईए के साथ बातचीत पूरी करने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी हासिल करने के संबंध में अमेरिकी सीनेटरों द्वारा तय की गई मई तक की समय सीमा के बारे में उन्होंने कहा उनकी चुनाव प्रक्रिया के कारण निश्चित तौर पर समय सीमा है। इसलिए उन्होंने इसकी चर्चा की।उन्होंने कहा कि लेकिन जहाँ तक भारत का सवाल है तो हमने उनसे कहा कि किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करना हमारे लिए संभव नहीं है।

अमेरिका के साथ असैनिक एटमी करार मुद्दे पर गठित संप्रग-वाम समिति की अगली बैठक कब होगी इसका पता कल चलने की उम्मीद है। यह जानकारी माकपा महासचिव प्रकाश करात ने दी।

पार्टी की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में करात ने कहा कि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी अन्य पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं और संप्रग-वाम समिति की बैठक बुलाएंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वाम दल जल्दबाजी में नहीं हैं और वे बैठक होने तक इंतजार करेंगे कि आखिर आईएईए में क्या हुआ। उन्होंने आईएईए के साथ भारत केंद्रित सुरक्षा मानक समझौते के मसौदे का उल्लेख करते हुए कहा, मैंने दस्तावेज नहीं देखा है।

संप्रग-वाम समिति की बैठक 15 मार्च तक बुलाने के संबंध में उनकी ओर से प्रणव मुखर्जी को लिखे गए पत्र के संबंध में पूछे जाने पर करात ने कहा कि उन्होंने इस बात की खबरें मिलने के बाद यह पत्र लिखा था कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है।

समय सीमा के संबंध में पूछे जाने पर माकपा नेता ने मजाकिया लहजे में कहा कि अमेरिका ने मई तक समय सीमा निर्धारित की है इसलिए हमारे पास वक्त है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी इच्छा के अनुसार आईएईए के साथ बातचीत को मार्च तक पूरा कर लिया गया।



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं ने रविवार को मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय पर हमला किया और जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान संघ व माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष में 10 लोग घायल हो गए। इस बीच, संघ ने केरल में माकपा के कार्यकर्ताओं द्वारा संघ और भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं पर किए गए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि माकपा के अलोकतांत्रिक और फासिस्ट तरीकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा इसका कड़ा मुकाबला किया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के ए. के. गोपालन भवन स्थित माकपा मुख्यालय पर सुबह 11 बजे उस वक्त हमला किया, जब माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक चल रही थी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय समिति की बैठक पिछले तीन दिनों से चल रही है।

सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ और पथराव किया। इस हमले में माकपा की दिल्ली प्रदेश इकाई के सचिव योगेंद्र शर्मा और केंद्रीय समिति के सदस्य पुष्पेंद्र सहित 10 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों अस्पताल ले जाया गया है। हमले में मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों को चोटें भी आई हैं।

सूत्रों के अनुसार जब हमलावर पथराव और तोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त वहां पुलिस भी मौजूद थी। इस घटना को केरल के कन्नूर जिले में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष से जोड़कर देखा रहा है।

इस बीच, संघ के कार्यकारी मंडल के वरिष्ठ सदस्य राम माधव ने कहा कि पिछले सप्ताह केरल में संघ के पांच कार्यकर्ताओं की नृशंस हत्या कर दी गई तथा 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और 200 से अधिक मकानों में तोड़फोड़ किए गए। उन्होंने कहा कि केरल में संघ तथा कुछ राष्ट्रवादी ताकतों के बढ़ते प्रभाव के कारण माकपा ने राज्य सरकार के परोक्ष समर्थन से संघ कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए हैं। माधव ने कहा कि संघ माकपा के ऐसी अलोकतांत्रिक और फासिस्ट कार्रवाई का कड़ा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि केरल में पिछले कुछ वर्षो से माकपा ने संघ के कार्यकर्ताओं पर हिंसक कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है और अगले सप्ताह 14 से 16 मार्च तक उत्तरप्रदेश में वृंदावन में आयोजित संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल प्रतिनिधिसभा की बैठक में इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा इसका जवाब देने की रणनीति तय की जाएगी। माधव ने कहा कि केरल में शांति की बहाली के लिए वहां की राज्य सरकार अपनी ओर से कोई प्रयास करेगी तो संघ सहयोग दे सकता है लेकिन संघ माकपा से कोई बातचीत नहीं करेगा, क्योंकि अब तक का संघ का पिछला अनुभव इसके ठीक विपरीत है, क्योंकि माकपा शांतिप्रयासों में विश्वास ही नहीं करती है। उन्होंने कहा कि संघ माकपा के आतंक के सामने कभी झुकनेवाला नही है और उसका कड़ा प्रतिरोध करेगा। उन्होंने कहा कि केरल में माकपा द्वारा संघ के कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के विरोध में हिंदू मंच द्वारा यहां माकपा मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया गया। माधव ने आरोप लगाया कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान माकपा मुख्यालय से प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया, जिसमें 15 से 20 कार्यकर्ता घायल हुए हैं।

संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को चुनावी बिगुल बजाते हुए किसानों की समस्याओं के लिए राजग सरकार को दोषी ठहराया और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पर आतंकवाद के साथ नरमी बरतने का आरोप लगाया।

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सोनिया ने पूर्ववर्ती भाजपानीत राजग सरकार पर आरोप लगाया कि किसान जो लंबे समय से परेशान हाल है और कर्ज के बोझ से दबा है, उसकी सिर्फ और सिर्फ एक ही वजह है और वह वजह है राजग सरकार की नीतियां। उन्होंने कहा कि राजग के नेता अब घडि़याली आंसू बहा रहे हैं, लेकिन अब घडि़याली आंसू बहाने का कोई मतलब नहीं है। सोनिया ने किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संप्रग सरकार के शासनकाल में गेंहू और धान के समर्थन मूल्य जिस हद तक बढ़ाए गए हैं, पिछली राजग सरकार में वैसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फिर भी कुछ लोग हमारी आलोचना कर रहे हैं। यह तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटने वाली बात हो गई। लेकिन मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहती हूं कि उन्होंने अपने शासनकाल में क्या किया।

सोनिया ने आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी को खास निशाना बनाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में हमारे प्रधानमंत्री पर इस बारे में बेवजह के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, लेकिन भाजपा के उस बड़े नेता से हमें प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है, जिनके गृहमंत्री रहते कंधार से लेकर लालकिला तक और संसद, अक्षरधाम और रघुनाथ मंदिर तक क्या-क्या हुआ। राजग शासनकाल में तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह द्वारा कुख्यात आतंकियों को विमान में बैठाकर कंधार ले जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आतंकियों की किस तरह से मेहमाननवाजी की गई, यह बात किसी से छुपी नहीं है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भाजपा को सीधे निशाना बनाते हुए कहा कि मैं यह याद दिलाना चाहता हूं कि 2004 से पहले भाजपा की छह साल की सरकार में किसानों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उस दौरान किसानों के हालात बहुत खराब थे। कृषि में जितना निवेश होना चाहिए था नहीं किया गया। किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य नहीं दिया गया और न ही गांव और ग्रामीणों का ख्याल रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों द्वारा की गई अधिक पैदावार को बोझ समझती रही। उस अतिरिक्त उत्पाद का भंडारण किए जाने की बजाय उसकी कोशिश यही रही कि कैसे जल्दी से जल्दी भंडारों को खाली किया जाए, भले ही उससे नुकसान क्यों न हो। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपनी इस कोशिश में विदेशों को घाटे पर ही अनाज बेचना शुरू कर दिया और दूसरी ओर वे इंडिया शाइनिंग का नारा दे रहे थे।

किसानों के कर्जे माफ किए जाने के लिए कांग्रेस द्वारा ायोजित धन्यवाद अभिनंदन रैली में सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में उत्तार भारतीयों के विरुद्ध हुई हिंसक वारदात का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए ऐसा करने वालों को चेतावनी दी जो लोग क्षेत्र के आधार पर भेदभाव करते हैं उनके खिलाफ नरमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश सब का है। देश पर हर नागरिक का अधिकार है। भारत का नागरिक किसी भी क्षेत्र में हो, उसके जान माल की रक्षा सब की जिम्मेदारी है। सोनिया गांधी ने कहा कि हमारे विरोधी लाख कोशिश करें, अफवाहें फैलाएं, लाख गलत इलजाम लगाएं, हमें बिलकुल परवाह नहीं है। संप्रग सरकार प्रगति की राह पर चल रही है। आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, लेकिन मैं एक बात कहना चाहती हूं कि आतंकवाद का मुकाबला हो या देश की प्रगति। हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय एकता इसकी बुनियादी शर्त है।

भारत की खोज अभियान के तहत शुक्रवार को यहाँ आए कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी उड़ीसा के कालाहांडी, बोलनगीर और कोरापुट ( केबीके) क्षेत्र की गरीबी और पिछड़ेपन से द्रवित हो गए और उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाएँगे।


अपने इस अभियान के दौरान यहाँ लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पहली जनसभा को संबोधित करते हुए गाँधी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( संप्रग) सरकार ने सालाना न्यूनतम 100 मानव श्रम दिवस उपलब्ध करवा कर गरीबों के लिए सबसे सफल राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शुरू की है।
दो माह में 33 प्रतिशत की गिरावट

नई दिल्ली- आम बजट से निराश और वैश्विक शेयर बाजारों की गिरावट को देखते हुए बीते सप्ताह बम्बई शेयर बाजार में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि पिछले दो महीने में यहाँ 33 प्रतिशत की गिरावट हो चुकी है।

बीते सप्ताह उठापटक के बीच बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 1603.12 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 451.90 अंक ऊपर नीचे बंद हुए।

अमेरिका के आर्थिक आँकडे कमजोर आने से वहाँ की अर्थव्यवस्था के मंदे की गिरफ्त में और जकड़ जाने के भय से शुक्रवार को शेयर बाजारों में खासी गिरावट देखी गई। देश में आगामी वित्त वर्ष के 29 फरवरी को पेश बजट में शेयर बाजारों के लिए ऐसा कुछ नहीं है, जिससे तेजी की उम्मीद बँधे। ऊपर से अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था के मंदी के दुष्चक्र में फँसने की पुष्टि कर दी। इससे अनुमान लगाए जा रहे है कि अगले सप्ताह भी मंदी का दौर बना रहेगा।

बजट में अल्पकालिक कैपीटल गेन टैक्स को 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने से कारोबारियों को निराशा हुई है, हालाँकि उद्योग जगत ने कुल मिलाकर बजट प्रस्तावों को सराहा है और विश्वास जताया है कि यदि वैश्विक संकेत उत्साहवर्द्धक मिलते हैं तो अगले कुछ दिनों में बाजार में स्थिरता आ सकती है।

दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख का कहना है कि बजट प्रस्ताव आम तौर पर ठीक ठाक हैं और इससे उपभोक्ता माँग बढ़ेगी, किंतु कैपीटल गेन टैक्स को लेकर बाजार खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले यह सुविधा थी कि एसटीटी से होने वाली आय को कंपनी अपनी देनदारियों में शामिल कर सकती थी। अब यह सुविधा खत्म कर दी गई है। उधर टैक्स को भी 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।

कारोबारियों का कहना है कि बजट प्रावधानों से एफएमसीजी, ऑटोमोबाईल, कृषि और औषधि क्षेत्र की कंपनियों के आसार अच्छे हैं, किंतु सीमेंट को लेकर स्थिति उत्साहवर्द्धक नजर नहीं आ रही है।

उठापटक के इस दौर के बावजूद बीएसई का सेंसेक्स 1603.12 अंक अर्थात नौ प्रतिशत बढ़कर छह महीने के न्यूनतम स्तर 15975.52 अंक पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी 451.90 अंक घट कर 4771.60 अंक पर बंद हुआ।

बीते महीने के अंतिम सप्ताह के दौरान वर्ष 2008-09 का रेल बजट और 2007-08 के लिए आर्थिक समीक्षा भी पेश की गई। रेल बजट में यात्री और माल भाड़े में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं करने के साथ ही इनमें रियायतें और रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और विस्तार पर जोर रहा।

आम बजट में कर घटाए जाने से दुपहिया, छोटी कार, औषधि, उपभोक्ता उत्पाद और पूँजीगत वस्तुओं के क्षेत्र के लिए काफी संभावनाएँ बनी हैं। मारुति सुजूकी और ह्यंदे जैसी छोटी यात्री कार बनाने वाली कंपनियों ने उत्पाद शुल्क घटाए जाने के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में देर नहीं लगाई और अपनी कारों के दाम कम किए जाने की घोषणा भी कर दी है।

दुपहिया वर्ग की कंपनियों ने भी इसका अनुसरण किया है। टायर उद्योग के लिए रियायतों से इनके दाम घटाने का सिलसिला भी शुरू हो गया। इस्पात कतरन पर सीमा शुल्क शून्य किए जाने से इसके सस्ते होने की उम्मीद जताई गई है।

बीते दो महीने में रियलिटी क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा। इसका सूचकांक 78 प्रतिशत गिर गया। इसके बाद 56 प्रतिशत के साथ बैंकेक्स और कैपिटल गुड्स इंडेक्स करीब 50 प्रतिशत गिरा।






...तो रद्‍द कर दें एटमी करार
माकपा की केन्द्र सरकार को नसीहत

नई दिल्ली (भाषा), रविवार, 9 मार्च 2008( 10:42 IST )






माकपा ने कहा कि सरकार को केवल संप्रग-वामदल समिति के निष्कर्ष के आधार पर भारत अमेरिका परमाणु करार पर अगला कदम उठाना चाहिए और अगर समिति इसे मंजूरी नहीं देती है तो सरकार को समझौता निरस्त कर देना चाहिए।

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि आज भी विएना में बातचीत चल रही है। इस बातचीत में हमारी चिंताओं को दूर किया जाता है या नहीं यह समिति की अगली बैठक में ही पता चलेगा।

उन्होंने कहा संप्रग ने लिखित तौर पर सहमति दी है कि सरकार समिति के निष्कर्ष के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगी। यदि समिति कहती है कि यह समझौता सही नहीं है तो सरकार को इस पर अमल करना पड़ेगा।

येचुरी ने कहा कि संप्रग के कुछ साझीदारों तक का भी मानना है कि वामदलों की चिंताएँ जायज हैं और पार्टियाँ इन चिंताओं का निदान चाहती हैं। उन्होंने कहा सरकार का मानना है कि यह समझौता राष्ट्रहित में है, लेकिन हमारा मानना है कि ऐसा नहीं है। फिलहाल बातचीत जारी है।

भाकपा महासचिव एबी बर्धन की समर्थन वापसी की धमकी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा हमारा एजेंडा परमाणु समझौते को लेकर है न कि सरकार की स्थिरता या समय से पूर्व चुनाव। इस बारे में सरकार को निर्णय लेना है।

येचुरी ने साथ ही विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का अस्तित्व परमाणु समझौते से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह पूछे जाने पर कि संप्रग-वामदल पेनल की अगली बैठक कब होगी, उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के एक-दो दिनों में वापस लौटने की संभावना है। टीम की वापसी के बाद ही अगली बैठक होगी।



करार पर स्थिति स्पष्ट करें-आडवाणी


रायपुर (वार्ता), शनिवार, 8 मार्च 2008( 22:40 IST )






लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने परमाणु समझौते पर उत्पन्न विरोधाभास स्थिति के बारे में कांग्रेस एवं वाम दलों से स्थिति स्पष्ट करने की माँग की है।

आडवाणी ने शनिवार को यहाँ महिला सशक्तिकरण दिवस पर महिला सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद कहा कि परमाणु समझौते पर बहुत ही विरोधाभास की स्थिति है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में अस्थिरता एवं अनिश्चित की स्थिति देश के हित में नहीं है। इसलिए दोनों ही पार्टियों को इस बारे में देश के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केन्द्र में जो हालात हैं, उससे लोकसभा चुनावों के 2008 में ही होने की संभावनाएँ काफी बढ़ गई है। अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो जिन राज्यों में इस वर्ष चुनाव होने हैं वहाँ भी साथ में ही चुनाव करवाए जाने चाहिए।

आडवाणी ने देश में बदलाव का माहौल होने का दावा करते हुए कहा कि इस बार के संसदीय चुनावों में मनमोहन सरकार के कामकाज की तुलना निश्चित रूप से एनडीए सरकार के कामकाज से होगी।



माकपा मुख्यालय पर हमला, 8 जख्‍मी


नई दिल्ली (वार्ता), रविवार, 9 मार्च 2008( 15:54 IST )






राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने रविवार को माकपा के मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें आठ लोगों के घायल होने की खबर है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के एके गोपालन भवन स्थित माकपा मुख्यालय पर सुबह 11 बजे उस वक्त हमला किया, जब पार्टी की सर्वोच्च इकाई केंद्रीय समिति की बैठक चल रही थी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय समिति की बैठक पिछले तीन दिनों से चल रही है।

सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ और पथराव किया। इस हमले में माकपा की दिल्ली प्रदेश इकाई के सचिव योगेन्द्र शर्मा और केंद्रीय समिति के सदस्य पुष्पेन्द्र सहित आठ व्यक्तियों के घायल होने की खबर है। आठों को अस्पताल ले जाया गया है। हमले के दौरान मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों को चोटें भी आई हैं।

सूत्रों के अनुसार जब हमलावर पथराव और तोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त वहाँ पुलिस भी मौजूद थी। इस घटना को केरल के कन्नूर जिले में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।



चुनाव निर्धारित समय पर ही-प्रणब


नई दिल्ली (भाषा), शनिवार, 8 मार्च 2008( 19:42 IST )






सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि न तो कांग्रेस और न ही इसके सहयोगी दल 2009 के पहले चुनाव चाहते हैं। भारत-अमेरिका असैन्य करार की खातिर सरकार को भेंट चढ़ाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।

मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अमेरिका से कह दिया है कि करार को अमली जामा पहनाने के लिए वह निर्धारित समय के भीतर काम नहीं कर सकता।

समय पूर्व चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने एक टीवी चैनल से कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय (2009) पर चुनाव चाहते हैं।

गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं हैं क्योंकि वाम दलों के रुख से हम भली-भाँति परिचित हैं।

उन्होंने ये बातें परमाणु करार को प्रभावी बनाने की स्थिति में सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में वाम दलों की धमकी से जुड़े सवाल के जवाब में कहीं।

मुखर्जी ने कहा मैं नहीं मानता कि कोई भी समय पूर्व चुनाव की सोच रहा है। गठबंधन का कोई भी सहयोगी या समर्थक समय पूर्व चुनाव की बात नहीं कर रहा हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या परमाणु करार के लिए सरकार की कुर्बानी सही रहेगी, इसके संबंध में कांग्रेस में कोई बहस है तो मुखर्जी ने कहा कोई भी फिलहाल चुनाव कराने की बात नहीं कर रहा है। किसी चीज के लिए सरकार को भेंट चढ़ाने की चर्चा नहीं है।

वाम दलों ने परमाणु करार को प्रभावी बनाने से जुड़े मुद्दे पर अपना रुख कड़ा कर लिया है, जिससे समय पूर्व चुनाव के कयास लगाए जाने लगे हैं।

भाकपा महासचिव एबी वर्धन द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को कल भेजे गए धमकी भरे पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने पत्र को नहीं देखा है बल्कि इसके बारे में सिर्फ अखबारों में पढ़ा।

उन्होंने हालाँकि माकपा महासचिव प्रकाश करात द्वारा लिखे पत्र का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने संप्रग वाम समिति की बैठक जल्द बुलाने की बात कही थी।

विदेशमंत्री ने कहा इसमें उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि हमारी व्यवस्था के अनुसार हमें मिलना चाहिए। हमने अखबारों में पढ़ा है कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है। इसलिए 15 मार्च तक बैठक निर्धारित कीजिए। वाम दलों की धमकियों को बहुत ज्यादा महत्व न देते हुए मुखर्जी ने कहा कि इसमें नया कुछ भी नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि संप्रग वाम की अगली बैठक में अगर वाम दल करार पर आगे नहीं बढ़ने की माँग करते हैं तो मुखर्जी ने कहा उनकी क्या माँग होगी और हमारा क्या जवाब होगा, इससे निपटना मैं जानता हूँ।

आईएईए के साथ बातचीत पूरी करने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी हासिल करने के संबंध में अमेरिकी सीनेटरों द्वारा तय की गई मई तक की समय सीमा के बारे में उन्होंने कहा उनकी चुनाव प्रक्रिया के कारण निश्चित तौर पर समय सीमा है। इसलिए उन्होंने इसकी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि लेकिन जहाँ तक भारत का सवाल है तो हमने उनसे कहा कि किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करना हमारे लिए संभव नहीं है।










शस्त्र व्यापारी सुरेश नंदा गिरफ्तार
रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप

नई दिल्ली (भाषा) , रविवार, 9 मार्च 2008( 13:30 IST )






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