कारपोरेट राजनीति में मुख और मुखौटा का विभ्रम, नूरा कुश्ती और विज्ञापनी जन प्रतिबद्धता, साम्राज्यवाद विरोध
वर्चस्व के खेल में नरसंहार की संस्कृति और मृगतृष्णा में तब्दील लोकतंत्र
कारपोरेट राजनीति में मुख और मुखौटा का विभ्रम, नूरा कुश्ती और विज्ञापनी जन प्रतिबद्धता, साम्राज्यवाद विरोध
वर्चस्व के खेल में नरसंहार की संस्कृति और मृगतृष्णा में तब्दील लोकतंत्र
वोटों की राजनीति में दांव पर देश, स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता, मानवाधिकार और नागरिक अधिकार। कत्लगाह में तब्दील जनपद तमाम।
पलाश विश्वास
सोनिया गांधी ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली से संघ परिवार पर करारा प्रहार के साथ चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इटालियन कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अपनी नानी के पिता की राह पर नेहरु गांधी वंश की विरासत के मुताबिक भारत की खोज पर निकले हैं। यह अश्वमेध यज्ञ का नया नाम है और राह भी उनकी मूलनिवासी आदिवासी इलाकों से होकर गुजर रही है। ओड़ीशा में गरीबी से पहली दफा मुखातिब राहुल मीडिया को मर्मस्पर्शी बाइट देने में बिजी हैं। तो इस बीच राजधानी में माकपा मुख्यालय पर माकपाई हमलावर संघियों से भिड़ गये। मराठा मानुष विवाद पर राजनीति की गर्म तवा पर रोटी सेंकने से वंचित वामपंथियों को त्रिपुरा में भारी जीत का जश्न न मनाते मनाते शानदार मुद्दा मिल गया है। अब मुसलमानों से कहा जा सकता है कि उनके वजूद के लिए हिन्दुत्व और संघ परिवार कितना खतरनाक है। तोगड़िया ने भी लगे हाथों बाल ठाकरे को चुनौती दे डाली है कि हिम्म्त हो तो मुंबई में रह रहे पांच लाख बांग्लादेशियों को निकाल बाहर करें। तसलिमा के निष्कासन के बाद वामपंथ के हित में यह तो सोने पर सुहागा हो गया।
भारतीय जनता को क्या हासिल हुआ?
मूलनिवासी मारे जा रहे हैं। सेज और रसायन, परमाणु, शहरीकरण, औदौगीकरण के बहाने जीवन आजीविका पर हमले अनन्त। भारतीय संसद के अमेरिकी बजट सत्र में पेश आम बजट और रेलवे बजट से नवउदारवाद का परचम लहराया और लोकलुभावन जैस मीडिया हाइप भी खूब हुआ। क्रकेट कार्निवाल अलग। पर राहत क्या मिली? मुद्राफीति पर अंकुश नहीं लगा। मंहगाई आसमान छूने लगा। सेनसेक्स शाइनिंग इण्डिया का एकमात्र पैमाना शेयर सूचकांक धराशायी। भारतीय अर्थ व्यवस्था को अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जौड़ने का नतीजा निकलने लगा है। पर होश किसे है? राष्ट्रीयता और भूमिपुत्र की समस्याओं को नजरअंदाज करके वोटबैंक की राजनीति से सत्तावर्ग की रंग बिरंगी पार्टियां मातृभूमि से बलात्कार कर रही है। इतिहास से हम सबक नहीं लेते। सोवियत संघ के विघटन के बाद राष्ट्रीयता जैसे मुद्दे को लेकर बचकानी राजनीति हो रही है। गोरखालैंड की आग फिर सुलगने लगी है। सुबास घीसिंग का दामन छोड़कर वामपंथी विमल गुरुंग को उठालकर बंगाली ब्राहमण वर्चस्व बनाये रखने के फिराक में है। नन्दीग्राम नरसंहार की बरसी १४ मार्च को है। नैनो ने सिंगुर को धो डाला। त्रिपुरा की जीत के जश्न मध्ये साम्प्रदायिकता, हिन्दुत्व और फासीवाद के खिलाफ अभियान शुरू करने का बहाना भी मिल गया है।
इसी बीच अमेरिकी बजटसत्र के अभिभाषण, संसद और संसद के बाहर नूरा कुश्ती, तमाम बयानों के बावजूद भारत अमेरिका परमाणु समझौते पर सभी पार्टियों की मिलीभगत से दांव पर लग गयी हैं भारत की स्वत्तन्त्रता और सम्प्रभुता। द्वितीय विश्वयुद्ध, भारत चीन युद्ध, तेलंगाना किसान विद्रोह, ढिमरी ब्लाक, श्रीकाकुलम, नक्सलबाड़ी से लेकर सिंगुर नन्दीग्राम तक सत्ता वर्ग और साम्राज्यवादियों के हितों को सर्वोपरि रखने वाले वामपंथी भोपाल गैस त्रासदी के जिम्मेवार डाउज को न्यौता देकर नंदीग्राम में जनसंहार से बाज नहीं आये। शरणार्थी आन्दोलन और पुनर्वास आन्दोलन का दम भरने के बावजूद देशभर से दलित बंगाली शरणार्थियों को मरीचझांपी बुलाकर गोलियों से भून डाला। शहरीकरण और विकास के बहाने भूमि सुधार, किसान आंदोलन, खाद्य आंदोलन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और मार्क्सवाद लेनिनवाद माओवाद तक को रेजीमेंटेड गेस्टापो वाहिनी का औजार बना दिया कारपोरेट साम्राज्यवाद के हित में। वियतनाम के कसाई का पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत। फिर बुश बुद्ध प्रणव प्रियठबंधन। बंगाल को बंगभूमि बनाने का अभियान। परमाणु समझौते का विरोध, पर अमेरिकी और पश्चमी उद्योगपतियों, कारपोरेटों, पूंजीपतियों के कदमों में बिछ जाना और ऐन चुनाव से पहले, करीब पूरे पांच साल तक वाशिंगटन के गुलामों की सरकार को कदम कदम पर समर्थन के बाद समर्थन वापसी की बंदरघुड़की। पुरोहित तन्त्र से और क्या उम्मीद रखेंगे इस देश के वध्य मूलनिवासी। अरुणाचल पर चीनी दावे पर खामोश और विदेश नीति पर यह गठजोड़?
मुख और मुखौटा के विभ्रम के आर पार सत्य का दर्शन असम्भव है। वामपंथी और संघ परिवार एक दूसरे के घोषित दुश्मन पर मनुवादी वै्श्विक उत्र आधुनिक साम्राज्यवाद और ब्राह्मणवादी वर्चस्व को कायम रखने के लिए दोनों मनमोहन के साथ। ये मकियां देते हैं। पर सरकार को पूरा सहयोग। वे नरम हैं और अमेरिका के कंधे पर सवार हिन्दुत्व को ग्लोबल साम्राज्यवाद के यहूदी श्वेत गठजोड़ से जुड़कर अश्पृश्यता और रंगभेद को और मजबूत करने को बेताब। ये मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा तो वे मु्स्लिम विरोधी। पर कुल जमा हासिल? अमेरिकी इटालियन उपनिवेश।
अब प्रणव मुखर्जी के बयानों पर तनिक गौर फरमायें। सोनिया और मनमोहन युद्ध के तेवर में हैं तो बंगाल के ये पुरोहित शान्तिजल छिड़कते हुए भारत अमेरिका परमाणु करार के लिए सरकार को कुर्बान न करने क राग अलाप रहे हैं। किसे कौन धोखा दे रहा है? करार की प्रक्रया जारी है। सरकार गिरते गिरते दस्तखत भी हो जायेंगे। फिर चलेगी नूरा कुश्ती। जनता लड़ मरे मराठा मानुष, भूमिपुत्र, गोरखालैणड, राम सेतु, मन्दिर मसजिद, मिथ्या आरक्षण, आदि मसलों को लेकर और इनका देश को बेचने का कारोबार जारी रहे। विरोध की नौटंकी जारी रहे और पूरा देश सेज में तब्दील हो जाये, जिसपर कारपोरेट आका सुहागरात मनाये बलाकार उत्सव में। कम्प्यूटर, नेट, मोबाइल, टीवी और अंग्रेजी के मार्फत नीली क्रांति चरम पर है। प्रतिरओध की आशंका नहीं है। देश की सुरक्षा सेना में ३७ लाख जवान और निजी सेनाएं पचालस लाख के करीब। सचमुच वामपंथी दक्षिणपंथी मिलकर इस देश को सोवियत संघ बना ही लेंगे। जनपद हुए खत्म । अब प्रदेश बन जायेंगे राष्ट्र। हर कोई होगा विस्थापित , बेनागरिक। तब मराठा मानुष और भूमिपुत्रों को किसी आंदोलन की जरुरत नहीं होगी। तीन छोटे राज्य बनाकर उत्तर भारत में राष्ट्रीयता मसले की हवा निकाल दी। पूर्वोत्तर और कश्मीर में पचास साल से सैन्य शासन है। जब सारे प्रदेश के लोग बाहरी लोगों के खिलाफ खड़े हो जायेंगे तब भारत देश की दरकार क्या रहेगी? मजे से बनते रहेगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री। रूस और यूक्रेन की तर्ज पर एक दूसरे पर साधेंगे परमाणु निशाना और रक्षा सौदों में कमीशन खोरी बेहिसाब।
विदेशी शेयर बाजारों की मंदी और मँहगाई के पिछले दस माह के उच्च स्तर पर पहुँच जाने के समाचारों के बीच देश के शेयर बाजारों को शुक्रवार को जोरदार झटका लगा। बीएसई का सेंसेक्स 557 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 150 अंक की डुबकी लगाई।विदेशी शेयर बाजारों की मंदी और मँहगाई के पिछले दस माह के उच्च स्तर पर पहुँच जाने के समाचारों के बीच देश के शेयर बाजारों को शुक्रवार को जोरदार झटका लगा। बीएसई का सेंसेक्स 557 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 150 अंक की डुबकी लगाई। आलोच्य सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति की दर में बढ़ोतरी मुख्यत मछली के दाम में छह प्रतिशत वृद्धि हुई है और मटन पाँच प्रतिशत, साग सब्जी एवं फल चार प्रतिशत, उड़द, दूध और रागी दो-दो प्रतिशत और चना एक प्रतिशत बढ़ा है।आलोच्य सप्ताह के दौरान खाद्य तेलों की तेजी ने भी मुद्रास्फीति बढ़ाने में मदद की। सूरजमुखी के तेल में आठ प्रतिशत, आयातित खाद्य तेलों में पाँच प्रतिशत, बिनौला और चावल छिल्का तेल में दो-दो प्रतिशत और नारियल, मूंगफली, रेपसीड और सरसों के तेल तथा गुड़ में एक-एक प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान घी के दाम में एक प्रतिशत और खांडसारी के दाम में दो प्रतिशत की कमी आई।कच्चे तेल की रिकॉर्ड कीमतों और यूरो के मुकाबले डॉलर के पिघलने के समाचारों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आज सोने के भाव नए शिखर पर पहुँच गए। स्थानीय सर्राफा बाजार आज महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में बंद है।सिंगापुर से प्राप्त खबरों में चाँदी भी सोने से पीछे नहीं है और सटोरिया लिवाली से इसने 27 वर्ष के नए भाव का रिकॉर्ड बनाया।सिंगापुर में सोना हाजिर कामकाज में 991.90 डॉलर प्रति ट्राय औंस बोला गया। कल न्यूयार्क में यह 985.70-986.50 डॉलर प्रति ट्राय औंस था।विश्लेषकों का मानना है कि इस स्तर को देखते हुए सोने ने 1000 डॉलर का रिकॉर्ड बनाने की दिशा में मजबूती से कदम रखा है। न्यूयॉर्क कोमेक्स फ्यूचर्स में सोने के भाव 995 डालर प्रति ट्राय औंस के करीब थे।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुए हमलों पर गंभीर चिन्ता व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि देश में धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करने वालों के प्रति सख्ती से निपटा जाना चाहिए।श्रीमती गाँधी ने यहाँ रामलीला मैदान पर पार्टी द्वारा आयोजित एक विशाल रैली में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा पिछले दिनों उत्तर भारतीयों के खिलाफ किए गए हमलों और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भड़काने वाले बयानों का सीधे उल्लेख किए बिना कहा कि धार्मिक तथा क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करनेवालों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश सबका है और किसी भी नागरिक को किसी भी हिस्से में रहने का पूरा अधिकार है और उनके जान-मान की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।
सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि न तो कांग्रेस और न ही इसके सहयोगी दल 2009 के पहले चुनाव चाहते हैं। भारत-अमेरिका असैन्य करार की खातिर सरकार को भेंट चढ़ाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अमेरिका से कह दिया है कि करार को अमली जामा पहनाने के लिए वह निर्धारित समय के भीतर काम नहीं कर सकता।समय पूर्व चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने एक टीवी चैनल से कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय (2009) पर चुनाव चाहते हैं।गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं हैं क्योंकि वाम दलों के रुख से हम भली-भाँति परिचित हैं।उन्होंने ये बातें परमाणु करार को प्रभावी बनाने की स्थिति में सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में वाम दलों की धमकी से जुड़े सवाल के जवाब में कहीं।मुखर्जी ने कहा मैं नहीं मानता कि कोई भी समय पूर्व चुनाव की सोच रहा है। गठबंधन का कोई भी सहयोगी या समर्थक समय पूर्व चुनाव की बात नहीं कर रहा हैं। भाकपा महासचिव एबी वर्धन द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को कल भेजे गए धमकी भरे पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने पत्र को नहीं देखा है बल्कि इसके बारे में सिर्फ अखबारों में पढ़ा।उन्होंने हालाँकि माकपा महासचिव प्रकाश करात द्वारा लिखे पत्र का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने संप्रग वाम समिति की बैठक जल्द बुलाने की बात कही थी।आईएईए के साथ बातचीत पूरी करने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी हासिल करने के संबंध में अमेरिकी सीनेटरों द्वारा तय की गई मई तक की समय सीमा के बारे में उन्होंने कहा उनकी चुनाव प्रक्रिया के कारण निश्चित तौर पर समय सीमा है। इसलिए उन्होंने इसकी चर्चा की।उन्होंने कहा कि लेकिन जहाँ तक भारत का सवाल है तो हमने उनसे कहा कि किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करना हमारे लिए संभव नहीं है।
अमेरिका के साथ असैनिक एटमी करार मुद्दे पर गठित संप्रग-वाम समिति की अगली बैठक कब होगी इसका पता कल चलने की उम्मीद है। यह जानकारी माकपा महासचिव प्रकाश करात ने दी।
पार्टी की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में करात ने कहा कि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी अन्य पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं और संप्रग-वाम समिति की बैठक बुलाएंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वाम दल जल्दबाजी में नहीं हैं और वे बैठक होने तक इंतजार करेंगे कि आखिर आईएईए में क्या हुआ। उन्होंने आईएईए के साथ भारत केंद्रित सुरक्षा मानक समझौते के मसौदे का उल्लेख करते हुए कहा, मैंने दस्तावेज नहीं देखा है।
संप्रग-वाम समिति की बैठक 15 मार्च तक बुलाने के संबंध में उनकी ओर से प्रणव मुखर्जी को लिखे गए पत्र के संबंध में पूछे जाने पर करात ने कहा कि उन्होंने इस बात की खबरें मिलने के बाद यह पत्र लिखा था कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है।
समय सीमा के संबंध में पूछे जाने पर माकपा नेता ने मजाकिया लहजे में कहा कि अमेरिका ने मई तक समय सीमा निर्धारित की है इसलिए हमारे पास वक्त है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी इच्छा के अनुसार आईएईए के साथ बातचीत को मार्च तक पूरा कर लिया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं ने रविवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय पर हमला किया और जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान संघ व माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष में 10 लोग घायल हो गए। इस बीच, संघ ने केरल में माकपा के कार्यकर्ताओं द्वारा संघ और भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं पर किए गए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि माकपा के अलोकतांत्रिक और फासिस्ट तरीकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा इसका कड़ा मुकाबला किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के ए. के. गोपालन भवन स्थित माकपा मुख्यालय पर सुबह 11 बजे उस वक्त हमला किया, जब माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक चल रही थी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय समिति की बैठक पिछले तीन दिनों से चल रही है।
सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ और पथराव किया। इस हमले में माकपा की दिल्ली प्रदेश इकाई के सचिव योगेंद्र शर्मा और केंद्रीय समिति के सदस्य पुष्पेंद्र सहित 10 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों अस्पताल ले जाया गया है। हमले में मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों को चोटें भी आई हैं।
सूत्रों के अनुसार जब हमलावर पथराव और तोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त वहां पुलिस भी मौजूद थी। इस घटना को केरल के कन्नूर जिले में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष से जोड़कर देखा रहा है।
इस बीच, संघ के कार्यकारी मंडल के वरिष्ठ सदस्य राम माधव ने कहा कि पिछले सप्ताह केरल में संघ के पांच कार्यकर्ताओं की नृशंस हत्या कर दी गई तथा 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और 200 से अधिक मकानों में तोड़फोड़ किए गए। उन्होंने कहा कि केरल में संघ तथा कुछ राष्ट्रवादी ताकतों के बढ़ते प्रभाव के कारण माकपा ने राज्य सरकार के परोक्ष समर्थन से संघ कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए हैं। माधव ने कहा कि संघ माकपा के ऐसी अलोकतांत्रिक और फासिस्ट कार्रवाई का कड़ा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि केरल में पिछले कुछ वर्षो से माकपा ने संघ के कार्यकर्ताओं पर हिंसक कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है और अगले सप्ताह 14 से 16 मार्च तक उत्तरप्रदेश में वृंदावन में आयोजित संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल प्रतिनिधिसभा की बैठक में इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा इसका जवाब देने की रणनीति तय की जाएगी। माधव ने कहा कि केरल में शांति की बहाली के लिए वहां की राज्य सरकार अपनी ओर से कोई प्रयास करेगी तो संघ सहयोग दे सकता है लेकिन संघ माकपा से कोई बातचीत नहीं करेगा, क्योंकि अब तक का संघ का पिछला अनुभव इसके ठीक विपरीत है, क्योंकि माकपा शांतिप्रयासों में विश्वास ही नहीं करती है। उन्होंने कहा कि संघ माकपा के आतंक के सामने कभी झुकनेवाला नही है और उसका कड़ा प्रतिरोध करेगा। उन्होंने कहा कि केरल में माकपा द्वारा संघ के कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के विरोध में हिंदू मंच द्वारा यहां माकपा मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया गया। माधव ने आरोप लगाया कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान माकपा मुख्यालय से प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया, जिसमें 15 से 20 कार्यकर्ता घायल हुए हैं।
संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को चुनावी बिगुल बजाते हुए किसानों की समस्याओं के लिए राजग सरकार को दोषी ठहराया और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पर आतंकवाद के साथ नरमी बरतने का आरोप लगाया।
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सोनिया ने पूर्ववर्ती भाजपानीत राजग सरकार पर आरोप लगाया कि किसान जो लंबे समय से परेशान हाल है और कर्ज के बोझ से दबा है, उसकी सिर्फ और सिर्फ एक ही वजह है और वह वजह है राजग सरकार की नीतियां। उन्होंने कहा कि राजग के नेता अब घडि़याली आंसू बहा रहे हैं, लेकिन अब घडि़याली आंसू बहाने का कोई मतलब नहीं है। सोनिया ने किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संप्रग सरकार के शासनकाल में गेंहू और धान के समर्थन मूल्य जिस हद तक बढ़ाए गए हैं, पिछली राजग सरकार में वैसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फिर भी कुछ लोग हमारी आलोचना कर रहे हैं। यह तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटने वाली बात हो गई। लेकिन मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहती हूं कि उन्होंने अपने शासनकाल में क्या किया।
सोनिया ने आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी को खास निशाना बनाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में हमारे प्रधानमंत्री पर इस बारे में बेवजह के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, लेकिन भाजपा के उस बड़े नेता से हमें प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है, जिनके गृहमंत्री रहते कंधार से लेकर लालकिला तक और संसद, अक्षरधाम और रघुनाथ मंदिर तक क्या-क्या हुआ। राजग शासनकाल में तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह द्वारा कुख्यात आतंकियों को विमान में बैठाकर कंधार ले जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आतंकियों की किस तरह से मेहमाननवाजी की गई, यह बात किसी से छुपी नहीं है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भाजपा को सीधे निशाना बनाते हुए कहा कि मैं यह याद दिलाना चाहता हूं कि 2004 से पहले भाजपा की छह साल की सरकार में किसानों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उस दौरान किसानों के हालात बहुत खराब थे। कृषि में जितना निवेश होना चाहिए था नहीं किया गया। किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य नहीं दिया गया और न ही गांव और ग्रामीणों का ख्याल रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों द्वारा की गई अधिक पैदावार को बोझ समझती रही। उस अतिरिक्त उत्पाद का भंडारण किए जाने की बजाय उसकी कोशिश यही रही कि कैसे जल्दी से जल्दी भंडारों को खाली किया जाए, भले ही उससे नुकसान क्यों न हो। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपनी इस कोशिश में विदेशों को घाटे पर ही अनाज बेचना शुरू कर दिया और दूसरी ओर वे इंडिया शाइनिंग का नारा दे रहे थे।
किसानों के कर्जे माफ किए जाने के लिए कांग्रेस द्वारा ायोजित धन्यवाद अभिनंदन रैली में सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में उत्तार भारतीयों के विरुद्ध हुई हिंसक वारदात का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए ऐसा करने वालों को चेतावनी दी जो लोग क्षेत्र के आधार पर भेदभाव करते हैं उनके खिलाफ नरमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश सब का है। देश पर हर नागरिक का अधिकार है। भारत का नागरिक किसी भी क्षेत्र में हो, उसके जान माल की रक्षा सब की जिम्मेदारी है। सोनिया गांधी ने कहा कि हमारे विरोधी लाख कोशिश करें, अफवाहें फैलाएं, लाख गलत इलजाम लगाएं, हमें बिलकुल परवाह नहीं है। संप्रग सरकार प्रगति की राह पर चल रही है। आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, लेकिन मैं एक बात कहना चाहती हूं कि आतंकवाद का मुकाबला हो या देश की प्रगति। हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय एकता इसकी बुनियादी शर्त है।
भारत की खोज अभियान के तहत शुक्रवार को यहाँ आए कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी उड़ीसा के कालाहांडी, बोलनगीर और कोरापुट ( केबीके) क्षेत्र की गरीबी और पिछड़ेपन से द्रवित हो गए और उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाएँगे।
अपने इस अभियान के दौरान यहाँ लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पहली जनसभा को संबोधित करते हुए गाँधी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( संप्रग) सरकार ने सालाना न्यूनतम 100 मानव श्रम दिवस उपलब्ध करवा कर गरीबों के लिए सबसे सफल राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शुरू की है।
दो माह में 33 प्रतिशत की गिरावट
नई दिल्ली- आम बजट से निराश और वैश्विक शेयर बाजारों की गिरावट को देखते हुए बीते सप्ताह बम्बई शेयर बाजार में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि पिछले दो महीने में यहाँ 33 प्रतिशत की गिरावट हो चुकी है।
बीते सप्ताह उठापटक के बीच बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 1603.12 अंक तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 451.90 अंक ऊपर नीचे बंद हुए।
अमेरिका के आर्थिक आँकडे कमजोर आने से वहाँ की अर्थव्यवस्था के मंदे की गिरफ्त में और जकड़ जाने के भय से शुक्रवार को शेयर बाजारों में खासी गिरावट देखी गई। देश में आगामी वित्त वर्ष के 29 फरवरी को पेश बजट में शेयर बाजारों के लिए ऐसा कुछ नहीं है, जिससे तेजी की उम्मीद बँधे। ऊपर से अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था के मंदी के दुष्चक्र में फँसने की पुष्टि कर दी। इससे अनुमान लगाए जा रहे है कि अगले सप्ताह भी मंदी का दौर बना रहेगा।
बजट में अल्पकालिक कैपीटल गेन टैक्स को 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने से कारोबारियों को निराशा हुई है, हालाँकि उद्योग जगत ने कुल मिलाकर बजट प्रस्तावों को सराहा है और विश्वास जताया है कि यदि वैश्विक संकेत उत्साहवर्द्धक मिलते हैं तो अगले कुछ दिनों में बाजार में स्थिरता आ सकती है।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख का कहना है कि बजट प्रस्ताव आम तौर पर ठीक ठाक हैं और इससे उपभोक्ता माँग बढ़ेगी, किंतु कैपीटल गेन टैक्स को लेकर बाजार खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले यह सुविधा थी कि एसटीटी से होने वाली आय को कंपनी अपनी देनदारियों में शामिल कर सकती थी। अब यह सुविधा खत्म कर दी गई है। उधर टैक्स को भी 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
कारोबारियों का कहना है कि बजट प्रावधानों से एफएमसीजी, ऑटोमोबाईल, कृषि और औषधि क्षेत्र की कंपनियों के आसार अच्छे हैं, किंतु सीमेंट को लेकर स्थिति उत्साहवर्द्धक नजर नहीं आ रही है।
उठापटक के इस दौर के बावजूद बीएसई का सेंसेक्स 1603.12 अंक अर्थात नौ प्रतिशत बढ़कर छह महीने के न्यूनतम स्तर 15975.52 अंक पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी 451.90 अंक घट कर 4771.60 अंक पर बंद हुआ।
बीते महीने के अंतिम सप्ताह के दौरान वर्ष 2008-09 का रेल बजट और 2007-08 के लिए आर्थिक समीक्षा भी पेश की गई। रेल बजट में यात्री और माल भाड़े में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं करने के साथ ही इनमें रियायतें और रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और विस्तार पर जोर रहा।
आम बजट में कर घटाए जाने से दुपहिया, छोटी कार, औषधि, उपभोक्ता उत्पाद और पूँजीगत वस्तुओं के क्षेत्र के लिए काफी संभावनाएँ बनी हैं। मारुति सुजूकी और ह्यंदे जैसी छोटी यात्री कार बनाने वाली कंपनियों ने उत्पाद शुल्क घटाए जाने के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में देर नहीं लगाई और अपनी कारों के दाम कम किए जाने की घोषणा भी कर दी है।
दुपहिया वर्ग की कंपनियों ने भी इसका अनुसरण किया है। टायर उद्योग के लिए रियायतों से इनके दाम घटाने का सिलसिला भी शुरू हो गया। इस्पात कतरन पर सीमा शुल्क शून्य किए जाने से इसके सस्ते होने की उम्मीद जताई गई है।
बीते दो महीने में रियलिटी क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा। इसका सूचकांक 78 प्रतिशत गिर गया। इसके बाद 56 प्रतिशत के साथ बैंकेक्स और कैपिटल गुड्स इंडेक्स करीब 50 प्रतिशत गिरा।
...तो रद्द कर दें एटमी करार
माकपा की केन्द्र सरकार को नसीहत
नई दिल्ली (भाषा), रविवार, 9 मार्च 2008( 10:42 IST )
माकपा ने कहा कि सरकार को केवल संप्रग-वामदल समिति के निष्कर्ष के आधार पर भारत अमेरिका परमाणु करार पर अगला कदम उठाना चाहिए और अगर समिति इसे मंजूरी नहीं देती है तो सरकार को समझौता निरस्त कर देना चाहिए।
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि आज भी विएना में बातचीत चल रही है। इस बातचीत में हमारी चिंताओं को दूर किया जाता है या नहीं यह समिति की अगली बैठक में ही पता चलेगा।
उन्होंने कहा संप्रग ने लिखित तौर पर सहमति दी है कि सरकार समिति के निष्कर्ष के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगी। यदि समिति कहती है कि यह समझौता सही नहीं है तो सरकार को इस पर अमल करना पड़ेगा।
येचुरी ने कहा कि संप्रग के कुछ साझीदारों तक का भी मानना है कि वामदलों की चिंताएँ जायज हैं और पार्टियाँ इन चिंताओं का निदान चाहती हैं। उन्होंने कहा सरकार का मानना है कि यह समझौता राष्ट्रहित में है, लेकिन हमारा मानना है कि ऐसा नहीं है। फिलहाल बातचीत जारी है।
भाकपा महासचिव एबी बर्धन की समर्थन वापसी की धमकी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा हमारा एजेंडा परमाणु समझौते को लेकर है न कि सरकार की स्थिरता या समय से पूर्व चुनाव। इस बारे में सरकार को निर्णय लेना है।
येचुरी ने साथ ही विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का अस्तित्व परमाणु समझौते से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह पूछे जाने पर कि संप्रग-वामदल पेनल की अगली बैठक कब होगी, उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के एक-दो दिनों में वापस लौटने की संभावना है। टीम की वापसी के बाद ही अगली बैठक होगी।
करार पर स्थिति स्पष्ट करें-आडवाणी
रायपुर (वार्ता), शनिवार, 8 मार्च 2008( 22:40 IST )
लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने परमाणु समझौते पर उत्पन्न विरोधाभास स्थिति के बारे में कांग्रेस एवं वाम दलों से स्थिति स्पष्ट करने की माँग की है।
आडवाणी ने शनिवार को यहाँ महिला सशक्तिकरण दिवस पर महिला सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद कहा कि परमाणु समझौते पर बहुत ही विरोधाभास की स्थिति है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में अस्थिरता एवं अनिश्चित की स्थिति देश के हित में नहीं है। इसलिए दोनों ही पार्टियों को इस बारे में देश के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केन्द्र में जो हालात हैं, उससे लोकसभा चुनावों के 2008 में ही होने की संभावनाएँ काफी बढ़ गई है। अगर ऐसी स्थिति बनती है, तो जिन राज्यों में इस वर्ष चुनाव होने हैं वहाँ भी साथ में ही चुनाव करवाए जाने चाहिए।
आडवाणी ने देश में बदलाव का माहौल होने का दावा करते हुए कहा कि इस बार के संसदीय चुनावों में मनमोहन सरकार के कामकाज की तुलना निश्चित रूप से एनडीए सरकार के कामकाज से होगी।
माकपा मुख्यालय पर हमला, 8 जख्मी
नई दिल्ली (वार्ता), रविवार, 9 मार्च 2008( 15:54 IST )
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने रविवार को माकपा के मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें आठ लोगों के घायल होने की खबर है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के एके गोपालन भवन स्थित माकपा मुख्यालय पर सुबह 11 बजे उस वक्त हमला किया, जब पार्टी की सर्वोच्च इकाई केंद्रीय समिति की बैठक चल रही थी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय समिति की बैठक पिछले तीन दिनों से चल रही है।
सूत्रों ने बताया कि संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ और पथराव किया। इस हमले में माकपा की दिल्ली प्रदेश इकाई के सचिव योगेन्द्र शर्मा और केंद्रीय समिति के सदस्य पुष्पेन्द्र सहित आठ व्यक्तियों के घायल होने की खबर है। आठों को अस्पताल ले जाया गया है। हमले के दौरान मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों को चोटें भी आई हैं।
सूत्रों के अनुसार जब हमलावर पथराव और तोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त वहाँ पुलिस भी मौजूद थी। इस घटना को केरल के कन्नूर जिले में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
चुनाव निर्धारित समय पर ही-प्रणब
नई दिल्ली (भाषा), शनिवार, 8 मार्च 2008( 19:42 IST )
सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि न तो कांग्रेस और न ही इसके सहयोगी दल 2009 के पहले चुनाव चाहते हैं। भारत-अमेरिका असैन्य करार की खातिर सरकार को भेंट चढ़ाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।
मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अमेरिका से कह दिया है कि करार को अमली जामा पहनाने के लिए वह निर्धारित समय के भीतर काम नहीं कर सकता।
समय पूर्व चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने एक टीवी चैनल से कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय (2009) पर चुनाव चाहते हैं।
गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं हैं क्योंकि वाम दलों के रुख से हम भली-भाँति परिचित हैं।
उन्होंने ये बातें परमाणु करार को प्रभावी बनाने की स्थिति में सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में वाम दलों की धमकी से जुड़े सवाल के जवाब में कहीं।
मुखर्जी ने कहा मैं नहीं मानता कि कोई भी समय पूर्व चुनाव की सोच रहा है। गठबंधन का कोई भी सहयोगी या समर्थक समय पूर्व चुनाव की बात नहीं कर रहा हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या परमाणु करार के लिए सरकार की कुर्बानी सही रहेगी, इसके संबंध में कांग्रेस में कोई बहस है तो मुखर्जी ने कहा कोई भी फिलहाल चुनाव कराने की बात नहीं कर रहा है। किसी चीज के लिए सरकार को भेंट चढ़ाने की चर्चा नहीं है।
वाम दलों ने परमाणु करार को प्रभावी बनाने से जुड़े मुद्दे पर अपना रुख कड़ा कर लिया है, जिससे समय पूर्व चुनाव के कयास लगाए जाने लगे हैं।
भाकपा महासचिव एबी वर्धन द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को कल भेजे गए धमकी भरे पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने पत्र को नहीं देखा है बल्कि इसके बारे में सिर्फ अखबारों में पढ़ा।
उन्होंने हालाँकि माकपा महासचिव प्रकाश करात द्वारा लिखे पत्र का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने संप्रग वाम समिति की बैठक जल्द बुलाने की बात कही थी।
विदेशमंत्री ने कहा इसमें उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि हमारी व्यवस्था के अनुसार हमें मिलना चाहिए। हमने अखबारों में पढ़ा है कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है। इसलिए 15 मार्च तक बैठक निर्धारित कीजिए। वाम दलों की धमकियों को बहुत ज्यादा महत्व न देते हुए मुखर्जी ने कहा कि इसमें नया कुछ भी नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि संप्रग वाम की अगली बैठक में अगर वाम दल करार पर आगे नहीं बढ़ने की माँग करते हैं तो मुखर्जी ने कहा उनकी क्या माँग होगी और हमारा क्या जवाब होगा, इससे निपटना मैं जानता हूँ।
आईएईए के साथ बातचीत पूरी करने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी हासिल करने के संबंध में अमेरिकी सीनेटरों द्वारा तय की गई मई तक की समय सीमा के बारे में उन्होंने कहा उनकी चुनाव प्रक्रिया के कारण निश्चित तौर पर समय सीमा है। इसलिए उन्होंने इसकी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि लेकिन जहाँ तक भारत का सवाल है तो हमने उनसे कहा कि किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करना हमारे लिए संभव नहीं है।
शस्त्र व्यापारी सुरेश नंदा गिरफ्तार
रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप
नई दिल्ली (भाषा) , रविवार, 9 मार्च 2008( 13:30 IST )
रक्षा सौदों में रिश्वत लेने के आरोपी शस्त्र व्यापारी सुरेश नंदा, उनके बेटे और दो अन्य व्यक्तियों को सीबीआई ने पिछले साल डाले गए आयकर विभाग के छापे के दौरान बरामद बैंक खाता पुस्तिकाओं का ब्यौरा छुपाने की साजिश के आरोप में शनिवार की रात मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने नंदा उनके बेटे आयकर विभाग के उपनिदेशक आशुतोष वर्मा और चार्टर्ड एकाउंटेंट बिपिन शाह के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद कल रात इन लोगों को मुंबई में गिरफ्तार किया।
सूत्रों ने बताया कि वर्मा 1999 के बैच के भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी हैं। उन पर पिछले साल फरवरी में आयकर विभाग के छापों के दौरान बरामद बैंक खाता पुस्तिकाओं को छिपाने में नंदा और उनके बेटे की मदद करने का आरोप है।
नंदा उनके बेटे संजीव नंदा वर्मा और शाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। संजीव नंदा बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में भी मुख्य आरोपी है।
नंदा के चार्टर्ड एकाउंटेंट और आयकर अधिकारियों पर आयकर विभाग के आदेशों से छेड़छाड़ कर नियमों को नंदा के पक्ष में करने की कोशिश का आरोप है।
आयकर विभाग ने शस्त्र व्यापारी नंदा के नई दिल्ली, गाजियाबाद, गोआ और मुंबई स्थित 16 परिसरों की तलाशी ली थी और लाखों रुपए की नकद राशि तथा कई दस्तावेज बरामद करने का दावा किया था।
आयकर अधिकारियों का कहना था कि बरामद दस्तावेजों से नंदा की बेहिसाब संपत्ति का संकेत मिलता है, जो करोड़ों रुपए की है। नंदा पर सीबीआई ने 1150 करोड़ रुपए के बराक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली तथा बख्तरबंद रिकवरी वाहन खरीदने संबंधी सौदे में रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।
सीबीआई के प्रवक्ता ने जी. मोहंती ने कहा िक नंदा और उनके साथियों को उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वे लोग होटल में मीटिंग कर रहे थे।
निजी सुरक्षा उद्योग देगा 10 लाख नौकरियाँ
नई दिल्ली (भाषा), रविवार, 9 मार्च 2008( 12:43 IST )
रोजगार मुहैया कराने में निजी सुरक्षा उद्योग एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है जो हर साल युवाओं के लिए 10 लाख नौकरियाँ पैदा कर रहा है। निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या हर साल 25 प्रतिशत बढ़ रही है और देश में इस तरह की लगभग 15 हजार एजेंसियाँ पंजीकृत हैं।
सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (सीएपीएसआई) के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए निजी सुरक्षाकर्मी काम में सामने आने वाली विभिन्न परिस्थितियों से निपट सकें इसके लिए भर्ती किए गए लोगों को 20 दिन का आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है।
सीएपीएसआई के अध्यक्ष कंवर विक्रमसिंह का कहना है देश में पंजीकृत 15 हजार निजी सुरक्षा एजेंसियां हर साल 10 लाख नई नौकरियाँ पैदा कर रही हैं। यह आँकड़ा अन्य किसी सेवा क्षेत्र द्वारा मुहैया कराए जाने वाले रोजगार की तुलना में सर्वाधिक है।
उद्योग वृद्धि की मदद निजी सुरक्षा एजेंसी (नियमन) अधिनियम 2005 के तहत की जा रही है। यह कानून इस उद्देश्य से लाया गया था कि इस तरह की एजेंसियाँ पुलिस बलों के अनुपूरक के रूप में काम करेंगी। हालाँकि इसे गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों ने ही क्रियान्वित किया है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता सहायक पुलिस आयुक्त राजन भगत का कहना है पुलिस के लिए हर जगह अपने कर्मी तैनात करना संभव नहीं है। निजी सुरक्षा एजेंसियों को पुलिस की मदद करने के लिए उत्साहित करना एक अच्छा कदम है।
उन्होंने कहा निजी सुरक्षा एजेंसियां हमारे लिए मददगार हैं खासकर शॉपिंग मॉल्स व्यक्तिगत समारोहों या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से। भगत ने कहा कि समय समय पर पुलिस निजी सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा संबंधी मामलों पर चर्चा करती रहती है।
सोमनाथ चटर्जी का सपना..?
नई दिल्ली (भाषा), शनिवार, 8 मार्च 2008( 22:18 IST )
लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने संसद और विभिन्न राज्यों की विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने को अपना सपना बताते हुए उम्मीद जताई कि इससे संबंधित विधेयक उनके कार्यकाल में पारित हो जाएगा।
चटर्जी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'पोषाहार से सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण' विषय पर यहाँ इंडिया गेट के पास आयोजित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के काफी समय से संसद में पेश होने की बात है। उनको उम्मीद है कि यह विधेयक उनके कार्यकाल के दौरान संसद में पारित होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिया जाना संविधान का एक हिस्सा है। संविधान ने महिलाओं को काफी अधिकार प्रदान किए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण महिलाएँ उनका पूरा-पूरा लाभ उठाने में असमर्थ रहती हैं। आज महिला में उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के लिए एक संसदीय फोरम भी गठित किया गया है। वह काफी अच्छी तरह से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों को संसद में उठाया जाना चाहिए। चटर्जी ने कहा कि इस प्रदर्शनी से लोगों में निश्चित रूप से पोषाहार के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि देश ने अनेक क्षेत्रों में भारी प्रगति की है, लेकिन पोषाहार का स्तर आज भी बहुत कम है और यह दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। इसका मुख्य कारण लोगों को पोषाहार के बारे में सही जानकारी का भारी अभाव है। इससे बच्चे और गर्भवती महिलाएँ बड़ी संख्या में एनीमिया की शिकार हैं और दिन-प्रतिदिन उनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
चटर्जी ने पोषाहार के संबंध में किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि पोषाहार के लिए हम जितनी अधिक राशि खर्च करते हैं, उसके मुकाबले पोषाहार की कमी के कारण पैदा होने वाली समस्या पर 27 गुना अधिक खर्च करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि देश में चल रही कुपोषण की समस्या का मुकाबला हम सबको मिलकर करना है और गैर सरकारी संगठन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राहुल ने की युवा शक्ति की हिमायत
गुणपुर (उड़ीसा), रविवार, 9 मार्च 2008( 11:05 IST )
राहुल गाँधी ने देश की राजनीति में युवा शक्ति की हिमायत करते हुए शनिवार को इस बात पर दु:ख व्यक्त किया कि वर्तमान में उनकी पार्टी सहित किसी भी राजनीतिक दल में युवाओं के लिए जगह नहीं है।
कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गाँधी ने कहा कि मैंने देखा कि कांग्रेस सहित किसी भी पार्टी में युवाओं के लिए जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को बदलने के लिए आपको नई ताकत से काम करना होगा और इस अभियान में युवाओं को शामिल करना होगा।
'भारत की खोज' यात्रा पर निकले राहुल ने अपने पिता दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की स्मृति में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि परिवर्तन तभी संभव है जब युवा राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होंगे।
यह जगह कांग्रेस पार्टी और गाँधी परिवार के उत्तराधिकारी राहुल के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजीव गाँधी ने तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में आत्मघाती आतंकवादी हमले में अकाल मौत का शिकार होने से पहले यहीं अपनी अंतिम राजनीतिक जनसभा को संबोधित किया था।
राहुल ने कहा कि मेरे पिता के निधन के 17 साल बीत गए हैं। वह सिर्फ मेरे पिता ही नहीं थे वास्तव में भारतीय युवा की आवाज थे। राजीव गाँधी के निधन से युवा शक्ति की आवाज थम गई।
राहुल गाँधी ने अपने भाषणों में उड़ीसा सरकार पर हमला जारी रखते हुए कहा कि पहले उन्हें लगता था कि उत्तरप्रदेश सबसे पिछड़ा राज्य है, लेकिन उड़ीसा के दौरे के बाद उनकी यह धारणा बदल गई है।
उन्होंने कहा कि वह युवाओं को युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के साथ काम करने का मौका देंगे जो देश का असली युवा संगठन है। राहुल ने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।
इधर युवा कांग्रेस राहुल गाँधी गांधी के राज्य के चार दिवसीय दौरे में जनसभाओं के दौरान व्यापक सदस्यता अभियान चला रहा है।
राहुल ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक अलग कार्यदल का गठन किया है कि संगठन में सभी राज्यों के युवाओं को प्रतिनिधित्व मिले। कल उन्होंने निर्धनताग्रस्त कालाहांडी जिले का दौरा किया था। (भाषा)
किसान मामले में कांग्रेस जिम्मेवार-राजनाथ
नई दिल्ली (वार्ता), शुक्रवार, 7 मार्च 2008( 22:23 IST )
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह ने शुक्रवार को कहा कि किसानों की समस्याओं के लिए राजग की सरकार नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार ही जिम्मेवार है, क्योंकि आजादी के 60 वर्षो में से 50-52 वर्ष इस देश में कांग्रेस का ही शासन रहा है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) द्वारा आयोजित 'वीरांगना सम्मेलन' के उद्घाटन के बाद सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह द्वारा संसद में किसान समस्याओं के लिए राजग सरकार को दोषी बताए जाने के आरोप निराधार और बेबुनियाद है, क्योंकि यह सर्वविदित है कि आजादी के 60 वर्षो में से करीब 50-52 वर्षो तक देश में कांग्रेस का ही शासन रहा है और उसकी किसान विरोधी नीतियाँ वर्तमान किसान समस्याओं के लिए जिम्मेवार है।
संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की समस्याओं के राजग सरकार द्वारा उचित समाधान नहीं, करने से उत्पन्न स्थिति के कारण ही 60 हजार करोड़ रुपए की कर्जमाफी करने का फैसला करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज देश में सभी क्षेत्रों में अस्थिरता और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि विशेषकर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के चार वर्ष के कार्यकाल के दौरान आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। सिंह ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियाँ और आंतरिक सुरक्षा गंभीर चिन्ता का विषयय बन गया है।
अगला दशक कंप्यूटर क्रांति का-कलाम
वाराणसी (वार्ता), शुक्रवार, 7 मार्च 2008( 19:45 IST )
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का मानना है कि अगला दशक पर्सनल कंप्यूटर में क्रांति का होगा।
डॉ. कलाम ने शुक्रवार को यहाँ सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज में 'बौद्ध धर्म और विश्व संस्कृति' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में कंप्यूटर बहुत छोटे आकार के और एक-दूसरे से वायरलेस प्रणाली से जुड़े होंगे।
उन्होंने कहा कि ये कंप्यूटर बेहद सस्ते होंगे और मौजूदा क्षमता से तीन गुना ज्यादा गणनाएँ कर सकेंगे। यह माना जा रहा है कि 2019 तक कंप्यूटर मानव मस्तिष्क के विकास में भी सहायक होगा और 2029 तक इसकी क्षमता मनुष्य के मस्तिष्क से एक हजार गुना ज्यादा होगी।
उन्होंने कहा कि मेरा हमेशा से मानना रहा है कि मनुष्य का सृजनशील दिमाग किसी भी शक्तिशाली कंप्यूटर से ज्यादा ताकतवर है। एक आम आदमी का मस्तिष्क किसी सर्वाधिक परिष्कृत कंप्यूटर से भी एक कदम आगे सोच सकता है।
कर्ज माफी महिलाओं के हित में-सोनिया
नई दिल्ली (भाषा), शनिवार, 8 मार्च 2008( 15:31 IST )
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सरकार द्वारा किसानों को 60 हजार करोड़ रुपए की कर्ज माफी को जायज ठहराते हुए इसे महिलाओं के हित में उठाया गया कदम बताया और कहा कि इससे किसानों में आत्मविश्वास बढ़ेगा।
सोनिया गाँधी शनिवार को यहाँ 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' पर आयोजित एक समारोह में 15 महिलाओं को 'श्रम शक्ति पुरस्कार' प्रदान कर रही थीं। उन्होंने कहा कि किसी भी संकट में सबसे अधिक महिलाएँ ही प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए जब किसान आत्महत्या करते हैं तो वे इस कदम से केवल अपना जीवन ही समाप्त नहीं करते इससे उनकी पत्नी और बच्चे भी प्रभावित होते हैं।
सोनिया ने कहा कि संप्रग ने अपने नए बजट में किसानों को 60 हजार करोड़ रुपए की कर्ज माफी की घोषणा की है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार के इस फैसले से करीबन 4 करोड़ किसानों को राहत मिलेगी उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह सुख-सुकून का जीवन व्यतीत कर सकेंगे।
उन्होंने महिलाओं के हित में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि आयकर में छूट दी गई और उनसे संबंधित कानूनों में सुधार किया गया। सरकार द्वारा बनाए जा रहे स्वयं सहायता समूह और माइक्रो फाइनेंस योजना से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र की महिलाओं को बहुत लाभ मिल रहा है, उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। यह योजनाएँ पूरे देश में लागू की जा रही हैं।
राजीव ने बनाया महिलाओं को आत्मनिर्भर : सोनिया ने कहा कि राजीव गाँधी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बराबर का दर्जा देने के लिए पंचायतराज व्यवस्था की शुरुआत की थी और उन्हें इस बात का गर्व है कि आज बड़ी संख्या में महिलाएँ पंचायतों में चुनी जा रही हैं तथा जमीनी स्तर पर फैसला लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर वे आज राजीव के सपनों को साकार कर रही हैं।
सोनिया गाँधी ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध है और इसे रोकने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। समाज में बेटा-बेटी को समान दर्जा मिलना चाहिए। आज सबसे बड़ी आवश्यकता बच्चों को प्यार देने तथा शिक्षित स्वस्थ और समर्थ बनाने की है।
सोनिया गाँधी ने बच्चों की देखभाल में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे बच्चों की देखभाल करके इस पवित्र कार्य में बहुत बड़ा योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज 15 महिलाओं को मुश्किल के समय में भी अच्छे कार्यों के लिए आज स्त्री श्रम शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। निश्चित रूप से देश की अन्य महिलाओं को इससे प्रेरणा मिलेगी और आगे बढ़ने के उनके हौसले बुलंद होंगे। समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह की पत्नी गुरुशरण कौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
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सोनिया ने साधा भाजपा पर निशाना
नई दिल्ली (वार्ता), रविवार, 9 मार्च 2008( 16:58 IST )
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुए हमलों पर गंभीर चिन्ता व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि देश में धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करने वालों के प्रति सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
श्रीमती गाँधी ने यहाँ रामलीला मैदान पर पार्टी द्वारा आयोजित एक विशाल रैली में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा पिछले दिनों उत्तर भारतीयों के खिलाफ किए गए हमलों और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भड़काने वाले बयानों का सीधा उल्लेख किए बिना कहा कि धार्मिक तथा क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव करने वालों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश सबका है और किसी भी नागरिक को किसी भी हिस्से में रहने का पूरा अधिकार है और उनके जान-माल की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।
भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए श्रीमती गाँधी ने कहा कि देश में आतंकवाद की चुनौती से निपटने के मामले में उनकी पार्टी को पूर्व उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से प्रमाण-पत्र लेने की जरूरत नहीं है, जिनके शासन काल में लालकिला, संसद भवन, अक्षरधाम, रघुनाथ मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर आतंकवादी हमले हुए और आतंकवादियों की मेहमाननवाजी करते हुए उन्हें कंधार पहुँचाया गया।
आडवाणी का सीधा नाम नहीं लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा के उसी वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह पर संसद में आतंकवाद को लेकर इल्जाम लगाए। आतंकवाद की चुनौती को देश के विकास और प्रगति में बाधक बताते हुए श्रीमती गाँधी ने कहा कि सरकार सख्ती से उसका मुकाबला कर रही है। आतंकवाद का मुकाबला हो या देश की प्रगति इसके लिए हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय एकता एक बुनियादी शर्त है।
मप्र के योजनाकार गुजरात से सीखें
http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0803/08/1080308055_1.htm
शरद जैन
मध्यप्रदेश की यह नियति रही है कि पिछले 25 वर्षों में किसी भी सरकार ने प्रदेश हित में ऐसी कोई बड़ी परियोजना क्रियान्वित कर पूर्ण नहीं की है, जिसका कि शिलान्यास एवं उद्घाटन उसी सरकार के पाँच वर्ष के कार्यकाल में संपन्न किया गया हो।
मध्यप्रदेश में विकास-गति के संबंध में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई यह टिप्पणी हमारे योजनाकारों के लिए शर्मसार करने वाली चुनौती है कि उन्होंने किस प्रकार सरदार सरोवर बाँध जलाशय से दो सुरंगें बनवाकर पर्याप्त जल नीचे से निकाल लिया। केवल पाँच सौ दिनों में सात सौ किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डालकर नर्मदा का पानी पाकिस्तान के सामने खड़े पोरबंदर तक ले जाया गया तथा पाइप लाइन भी इतनी विशाल कि उसमें मारुति कार भी सुगमता से चलाई जा सके।
मध्यप्रदेश में भोपाल नगर से नर्मदा की दूरी मात्र 45 किलोमीटर है, लेकिन भोपाल पानी के लिए तरसता रहता है, जबकि नर्मदा को मैं सिर्फ डेढ़ वर्ष में 700 किलोमीटर दूरी पर स्थित पोरबंदर तक ले गया हूँ।
उपरोक्तानुसार गुजरात ने सरदार सरोवर जलाशय से जो दो सुरंगें बनाई हैं, उनका व्यास 7 मीटर तथा जल प्रवाह 11 से 12 हजार क्यूसिक फुट प्रति सेकंड है। इसके अतिरिक्त गुजरात ने इस बाँध जलाशय को सिंचाई हेतु 456 किलोमीटर लंबी मुख्य नहरों एवं हजारों किलोमीटर छोटी-मोटी नहरों से जोड़ दिया है, जिससे 6 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। फलतः वहाँ का किसान मालामाल हो रहा है। इन नहरों से जो एक विशाल नदी के समकक्ष ही हैं, कई मृतप्राय नदियों में पानी डालकर उन्हें भी पुनर्जीवित कर दिया गया है।
आज गुजरात में कृषि के साथ-साथ औद्योगिक व सेवा क्षेत्र का जो विकास हुआ है, उसका मुख्य श्रेय नर्मदा जल को जाता है, क्योंकि बिना जलापूर्ति के इनका विकास कदापि संभव नहीं है। हाल ही में विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार विजयश्री का वरण किया है, उसमें नर्मदा का एक बड़े रूप में प्रत्यक्ष एवं जीवित योगदान रहा है।
नर्मदा के कुल 27 मिलियन एकड़ फुट (एमएएफ) जल में से 18 एमएएफ हमारे मध्यप्रदेश का अपना हिस्सा है, जबकि 9 एमएएफ गुजरात को आवंटित है। लेकिन वास्तविक रूप में आज गुजरात मध्यप्रदेश के हिस्से के बराबर या उससे अधिक नर्मदा जल का उपभोग कर रहा है, जबकि हम गुजरात के हिस्से के बराबर भी इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि हम अभी तक नर्मदा जल का निमाड़, महाकौशल एवं विंध्य क्षेत्र में सिंचाई हेतु पर्याप्त रूप से दोहन नहीं कर पाए हैं, जो हमारे लिए एक महती विडंबना है।
स्पष्ट है कि हमारे योजनाकार अजस्र प्रवाहित नर्मदा की महाशक्ति की पहचान करने में भारी चूक कर रहे हैं, जिसका समुचित दोहन अब तक प्रदेश को एक समृद्धिशाली, संपन्न एवं प्रमुख आर्थिक शक्ति बना सकता था।
हमारे लिए यह संतोषप्रद एवं गौरव करने वाली बात है कि भारत सरकार की नेशनल हाइडल पॉवर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) ने मध्यप्रदेश शासन की साझेदारी में नर्मदा हाइड्रोइलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन (एनएचडीसी) का गठन कर रेकॉर्ड समय में इंदिरा सागर एवं ओंकारेश्वर बाँध पॉवर हाउस परियोजनाओं को पूर्ण कर सिंचाई हेतु विशाल जलाशयों का निर्माण किया है। इन दोनों जलाशयों से 3.7 लाख हैक्टेयर नेट तथा 7.5 से 8 लाख हैक्टेयर ग्रास क्षेत्र में निश्चित ही सिंचाई हो सकेगी।
जबलपुर के निकट नर्मदा पर वर्षों पूर्व रानी अवंतिबाई सागर बाँध जो बरगी बाँध के नाम से विख्यात है, के जलाशय से लगभग 3.25 लाख हैक्टेयर नेट या 7.5 से 8 लाख हैक्टेयर ग्रास क्षेत्र में सिंचाई संभावित है। इस प्रकार इन तीनों बाँध जलाशयों से लगभग 7 लाख हैक्टेयर नेट या 15 लाख हैक्टेयर ग्रास क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।
इन तीनों जलाशयों पर लगभग 10 हजार वर्ग किलोमीटर मेन, डिस्ट्रीब्यूटरी एवं माइनर्स नहरों द्वारा सिंचाई नेटवर्क का विकसित किया जाना आज की अनिवार्य आवश्यकता है। वर्तमान में राज्य शासन द्वारा जिस मंथर गति से बिना समुचित अमले के नहरों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, उसके अनुसार अभी तक मात्र 15 प्रतिशत कार्य ही संपन्ना हो सका है।
वर्तमान में सरकार इस कार्य हेतु सिर्फ 800 करोड़ रुपए का बजट ही उपलब्ध करा पा रही है, उसमें से भी एक बड़ी राशि खर्च नहीं हो पा रही है, जबकि सारे सिंचाई नेटवर्क का कार्य संपन्न करने हेतु लगभग 5000 करोड़ रुपए की धनराशि की आवश्यकता है। वस्तुतः वर्तमान धीमी गति से सारे कार्य आगामी 10 वर्षों में भी संपन्न हो सकें, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
हमारे देश की यह नियति रही है कि पिछले 25 वर्षों में किसी भी सरकार ने प्रदेश हित में ऐसी कोई बड़ी परियोजना क्रियान्वित कर पूर्ण नहीं की है, जिसका कि शिलान्यास एवं उद्घाटन उसी सरकार के पाँच वर्ष के कार्यकाल में संपन्न किया गया हो।
हमारे प्रदेश में पूर्व कांग्रेस सरकारों की परियोजना क्रियान्वयन इच्छाशक्ति इतनी कमजोर रही है कि उसने 2003 के अंत तक लगभग 32 हजार करोड़ रुपए ताप विद्युत, सिंचाई, पेयजल, पुल-पुलियाओं एवं भवन से संबंधित सैकड़ों निर्माण कार्य आधे-धूरे छोड़ दिए,जिसमें से कई वर्तमान सरकार ने अपने स्वयं के संसाधनों से पूरे करवाए हैं। ताजा उदाहरण है तीस साल से लंबित बाणसागर परियोजना का वर्तमान सरकार द्वारा पिछले वर्ष पूर्ण किया जाना।
यह अत्यंत ही आवश्यक एवं अनिवार्य है कि प्रदेश के आठ जिलों के 15 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई से 10 लाख कृषकों को आर्थिक रूप में लाभान्वित करते हुए देश के लिए 70 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्न एवं हजारों टन फल एवं सब्जियों की आपूर्ति कर तथा 60 लाख नए रोजगार पैदा करने वाली दस हजार वर्ग किलोमीटर नर्मदा की मुख्य डिस्ट्रीब्यूटरीज एवं माइनर्स नहरों का त्वरित निर्माण करने हेतु आर्थिक बूम के इस कालखंड में राज्य सरकार इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर बीओटी के अंतर्गत कार्यान्वित करवाए।
इसके लिए देश की सुप्रसिद्ध एवं विश्वस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को आमंत्रित कर उनसे उचित शर्तों के आधार पर कृषकों के लिए खेतों में सिंचाई हेतु भरपूर पानी, औद्योगिक जल आपूर्ति तथा स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से जनता जनार्दन को पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु न्यूनतम दरें निर्धारित करने वाली कंपनियों से सारा निर्माण कार्य दो से तीन वर्षों की अवधि में पूरा करवाया जा सकता है।
ये दरें ऐसी होना चाहिए जो आगामी 20 से 25 वर्षों में निर्माण कंपनियों द्वारा निर्मित की गई नहरों की लागत एवं उनके संपूर्ण रखरखाव के व्यय के साथ-साथ उन्हें उचित लाभ भी प्राप्त करवा सकें। मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य होगा, जिसने नहरों का संपूर्ण निर्माण कार्य बीओटी के अंतर्गत पूर्ण करवाने की पहल की है। (लेखक एशियाई विकास बैंक के वित्तीय सलाहकार रह चुके हैं।)
परमाणु करार पर आगे बढ़े भारत
बर्न्स बोले, भारत अमेरिका संबंधों की मिसाल है समझौता
वाशिंगटन।
भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को समय रहते पूरा करने के लिए बुश प्रशासन ने भारत सरकार को साहसिक निर्णय लेने की सलाह दी है। समझौते के लिए सीमित समय शेष होने के अलावा बुश प्रशासन ने चेताया है कि भारत-अमेरिका को नजरअंदाज करके किसी और देश के साथ परमाणु ईंधन की व्यवस्था करने की कोशिश नहीं करे।
भारत का रुख अभी सकारात्मक
भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में प्रमुख वार्ताकार और अमेरिकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा कि हम इस समय अग्रणी भूमिका में हैं। हम एक प्रमुख देश हैं और हमारे सहयोग से ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) बाकी देशों को भारत के साथ परमाणु ऊर्जा का व्यापार करने के लिए अनुमति देगा। यह सब अमेरिका के बिना संभव नहीं हो सकता क्योकिं एनएसजी को इस संबंध में कोई भी फैसला आम सहमति से ही लेना होता है। एक सवाल के जवाब में बर्न्स ने कहा कि भारत सरकार का रुख अभी सकारात्मक है। पर फिर भी अगर माहौल समझौते के पक्ष में नहीं बन पाए और भारत कह दे कि वह अमेरिका के साथ समझौते की बात भुलाकर आगे बढ़ना चाहता है तो ऐसा कतई संभव नहीं होगा। कारण कि एनएसजी उस स्थिति में कोई फैसला ही नहीं करेगा।
आगे ले जाने के प्रति पूरी तरह गंभीर
जब कुछ समाचार रिपोर्टों के हवाले से बर्न्स से पूछा गया कि भारत दूसरे देशों के साथ नागरिक परमाणु व्यापार के लिए अमेरिका के साथ समझौते की बात बीच में ही छोड़ सकता है तो बर्न्स का कहना था कि यह पूरी तरह असंभव है क्योकिं वाशिंगटन आकर जो बात एक बार हो चुकी है वह होकर ही रहनी है। समझौते के लिए कम समय शेष रहने की बात पर जोर देते हुए बर्न्स ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि भारत सरकार इस समझौते को आगे ले जाने के प्रति पूरी तरह गंभीर है। भारत की गठबंधन सरकार के लिए राजनीति भी एक अहम सवाल है। वैसे भी हम भारत में गठबंधन के आंतरिक मसलों में दखलंदाजी नहीं करना चाहते।’ इस मौके पर बर्न्स ने भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों की बात को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और भारतीय लोगों के साथ नई रणनीतिक साझेदारी वह दम रखती है जिसे इस युग में अमेरिकी विदेशी नीति की बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में परमाणु वार्ता के गहन और जटिल माहौल के दौरान हम भारत के अच्छे दोस्त और साझेदार बनकर रहे हैं। मैं हर बैठक में शामिल रहा था। इसलिए मैं जानता हूं कि यह दौर किस प्रकार का रहा।
दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ हुए
इस पूरी वार्ता प्रक्रिया से नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं। यह और करीबी और भरोसेमंद हुए हैं। गौरतलब है कि बर्न्स विदेश सेवा के अधिकारी के रूप में अगले माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन वे विशेष दूत के रूप में काम करते रहेंगे। बर्न्स ने कहा कि मैं जानता हूं कि भारत सरकार की डॉ. अल बरदेई से आईएईए सुरक्षा उपायों पर बातचीत पूरी होने को है। यह बातचीत पूरी होने पर अगर भारत सरकार आगे बढ़ सके तो तब हम इस मसले को एनएसजी के पास ले जाएंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि एनएसजी आखिरकार भारत को स्वीकार कर लेगा और उसके बाद फाइनल वोट अमेरिकी कांग्रेस में होगा। बर्न्स ने माना कि परमाणु समझौता अब भारत-अमेरिकी संबंधों का प्रतीक बिंदु बन चुका है।
भारत को हाइड एक्ट मंजूर नहीं: प्रणब (3/3/2008)
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका एटमी करार पर अमेरिका को करारा जवाब देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत करार-123 के तहत एटमी करार पर सहमत हो सकता है। हम हाइड एक्ट की बाध्यताओं को मानने के लिए बाध्य नहीं है और न ही इस एक्ट के तहत परमाणु करार करने को तैयार है। हाइड एक्ट अमेरिका का आंतरिक मामला है। परमाणु करार के संबंध में भारत के अधिकार और बाध्यताएं 123 समझौते के तहत तय होगी। विदेशमंत्री ने ये बाते लोकसभा में विदेशनीति पर अपने बयान में कही। इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों हाइड एक्ट की बाध्यता पर बयानबाजी की थी।123 समझौते के तहत करार पर जोरगौरतलब है कि अमेरिकी विदेशमं
दैनिक भास्कर परमाणु करार से देश को नुकसान
दैनिक भास्कर, India - 14 hours ago
भाजपा इसलिए विरोध कर रही है। शनिवार को रायपुर के साइंस कालेज मैदान पर भीड़भरे महिला सशक्तीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री आडवाणी ने कहा कि देश में पहला परमाणु विस्फोट इंदिरा गांधी ने कराया था और दूसरा अटल बिहारी वाजपेयी ने। इसके बाद दुनिया में भारत को एक ताकत के रूप में देखा जाने लगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका से जो अनुबंध करने जा रहे हैं, उसमें देश का नुकसान है। हमें जब जरूरत होगी, हम परमाणु विस्फोट करेंगे। ...
याहू! भारत आइएइए से वार्ता पूरी, चुनाव समय परवाम से तनातनी सुलझने की उम्मीद
हिन्दुस्तान दैनिक, India - 18 hours ago
इधर दिल्ली में चल रही माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक के बीच पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने भी कहा कि वाम दल एटमी करार को देश के हितों के खिलाफ मानते हैं और इसीलिए हम इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि वाम दलों की मंशा सरकार को अस्थिर करना नहीं बल्कि सरकार को डील पर आगे बढ़ने से रोकना है। नयी दिल्ली (ब्यूरो)। भारत-अमेरिका करार पर परेशानी में पड़ी सरकार जहां एक ओर वामपंथियों को मनाने की कोशिश को अंतिम रूप देने ...
आईएईए से वार्ता पूरी नहीं गिरेगी सरकार हिन्दुस्तान दैनिक
करार पर कुर्बान नहीं होगी सरकार : प्रणव खास खबर
करार पर माकपा का सरकार से फिर तकरार वेबदुनिया हिंदी
राजस्थान पत्रिका - याहू! भारत
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‘परमाणु करार को सार्वजनिक करे बुश प्रशासन’
हिन्दुस्तान दैनिक, India - 5 Mar 2008
अमेरिका के परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों ने बुश प्रशासन से भारत अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग संधि पर सांसदों को दी गई गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि दोनों देशों के सांसद एवं जनता को सही स्थिति का आकलन करने में मदद मिले। अमेरिकी विदेश विभाग ने अमेरिकी संसद के निचले सदन कांग्रेस में सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सांसदों के एक छोटे समूह को गोपनीय जानकारी दी थी और उनसे इसे एकदम गुप्त करने को भी कहा ...
एटमी डील पर हुई गुफ्तगू को सार्वजनिक करने की मांग हिन्दुस्तान दैनिक
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यूपीए सरकार के बजाय करार की राह पर
नवभारत टाइम्स, India - 7 Mar 2008
एजेंसी के साथ हुए समझौते को एनएसजी की मंजूरी मिले बिना लागू नहीं किया जा सकता, इसलिए वास्तविक जद्दोजहद एनएसजी की बैठक में होगी, जिसका भारत सदस्य नहीं है और जहां यूरोपीय देशों के सवालों के जवाब भारत की ओर से अमेरिका को देने पड़ेंगे। सूत्रों के मुताबिक मुखर्जी का अमेरिका जाना इस बात का सूचक है कि भारत अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करने पर दृढ़ है और इस मसले पर यूपीए सरकार का कार्यकाल पहले भी खत्म करने को तैयार है। ...
करार पर सरकार विवश एमएसएन भारत
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परमाणु करार पर अमेरिका का नया पेच
नवभारत टाइम्स, India - 4 Mar 2008
उल्लेखनीय है कि सोमवार को संसद में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने बयान में कहा कि भारत का हाइड कानून से कोई वास्ता नहीं है, क्योंकि यह अमेरिका का घरेलू कानून है और इसका भारत की नीतियों पर असर नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर भारत में वामदल यह आशंका जाहिर करते रहे हैं कि हाइड कानून से भारत की विदेश नीति बंध जाएगी। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने भी कहा था कि भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग हाइड कानून के अनुरूप ही ...
सरकार पर लेफ्ट का 'ऐटमी' प्रेशर
नवभारत टाइम्स, India - 6 Mar 2008
लेफ्ट के एक सीनियर नेता ने कहा कि अमेरिकियों ने करार के लिए सरकार के सामने समयसीमा तय की है और अब लेफ्ट पार्टियां भी सरकार के लिए समयसीमा तय करेंगी। ऐसे में यूपीए-लेफ्ट कमिटी की अगली बैठक बेहद अहम होगी। इस बारे में सीपीएम के मुखपत्र 'पीपल्स डेमोक्रेसी' में गुरुवार को प्रकाशित एक आलेख भी अहम है। इसमें कहा गया है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने से सरकार को रोकने के लिए लेफ्ट पार्टियां सभी जरूरी कदम उठाएंगी। ...
लेफ्ट और कांग्रेस, दोनों चाहते हैं चुनाव नवभारत टाइम्स
करार से ज्यादा अहम है सरकार: प्रणव नवभारत टाइम्स
एटमी करार : लेफ्ट ने फिर बनाया दबाव दैनिक भास्कर
नवभारत टाइम्स
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वायस औफ़ अमेरिका हमें हाइड एक्ट को भारत-अमेरिकी परमाणु करार के साथ लेकर चलना होगा- बाउचर
वायस औफ़ अमेरिका - 4 Mar 2008
भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की प्रक्रिया में हाइड एक्ट को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच अमेरिका ने आज यह संकेत दिया है कि भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग के समझौते के क्रियान्वयन में घरेलू कानून हाइड एक्ट को ध्यान में रखना जरूरी है । अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर ने भारत में पत्रकारों से कहा कि हाइड एक्ट एक घरेलू कानून है और 123 समझौता एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है । मैं समझता हूं कि हम लगातार दोनों को साथ ...
विशेषज्ञ परमाणु करार के पक्ष में: मुखर्जी
याहू! भारत, India - 5 Mar 2008
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि ज्यादातर रक्षा विश्लेषक और परमाणु वैज्ञानिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के पक्ष में हैं। लोकसभा में संतोष गंगवार ने विदेशमंत्री से पूछा था कि क्या विश्लेषकों तथा परमाणु वैज्ञानिकों ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इस प्रश्न के लिखित उत्तर में मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने जुलाई 2005 और मार्च 2006 के समझौतों के ...
परमाणु मुद्दे पर जल्द फैसले की उम्मीद:अमेरिका
दैनिक भास्कर, India - 3 Mar 2008
बुश प्रशासन भारत-अमेरिका परमाणु करार पर जल्द से जल्द निर्णय चाहती है। अमेरिका राज्य विभाग के उप प्रवक्ता टॉम केसी ने ने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता न सिर्फ दोनों देश बल्कि पूरी दुनिया के हित में है। उन्होने कहा कि अमेरिकी सरकार को पता है कि भारत सरकार आपसी राजनीति के कारण समझौते पर जल्द फैसला नहीं कर पा रही है। लेकिन हमें विश्वास है कि वे जल्द ही यह मामला सुलझा लेगी। टॉम केसी ने कहा कि अगर हम यह मौका चूक जाते हैं तो ...
करार पर संसद में प्रणव का बयान आज
नवभारत टाइम्स, India - 2 Mar 2008
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल में अमेरिका के प्रभावशाली सेनेटरों के एक ग्रुप से कहा था कि करार पर आगे बढ़ने में कुछ मुश्किलें हैं। उनका इशारा लेफ्ट पार्टियों के विरोध की ओर था। पीटीआई ।। नई दिल्ली : अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर मंगलवार से दो दिनों की भारत यात्रा पर आ रहे हैं। उनकी इस यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका परमाणु करार को अमली जामा पहनाने की दिशा में हुई प्रगति की दोनों पक्षों द्वारा समीक्षा किए ...
परमाणु समझौते में हाइड एक्ट बाध्यकारी नहीं
दैनिक भास्कर, India - 5 Mar 2008
नई दिल्ली. अमेरिका ने बुधवार को परमाणु करार पर समय सीमा के अंदर भारत से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अमेरिका ने साफ कहा कि दो देशों के बीच परमाणु व्यापार का संबंध 123 समझौते से है न कि हाइड एक्ट से। अमेरिका के सहायक विदेश सचिव रिचर्ड बाउचर ने कहा कि हाइड एक्ट अमेरिका का आंतरिक कानून है और इसका मुख्य उद्देश्य भारत के साथ परमाणु समझौते को मंजूरी देना है। हाइड एक्ट के प्रभावों पर भारत की चिंताओं को दूर करने का प्रयास ...
हाइड एक्ट से करार को खतरा नहीं
नव भारत, India - 5 Mar 2008
केन्द्र सरकार के बाद अमेरिका ने भी परमाणु करार को लेकर आश्वस्त किया है कि विवादित हाइड एक्ट से समझौते को कोई खतरा नहीं है. भारत यात्रा पर आए अमरीका के मध्य व दक्षिणी एशिया के सहायक मंत्री रिचर्ड बाउचर ने पत्रकारों से कहा, हाइड एक्ट घरेलू कानून है, जबकि भारत-अमेरिका परमाणु करार द्विपक्षीय समझौता है. उन्होंने यहां विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से भ्ोंट की और द्विपक्षीय व वैश्विक मामलों समेत परमाणु समझौते के बारे में बातचीत की. ...
परमाणु समझौते पर अमेरिका की जल्दबाजी
दैनिक भास्कर, India - 4 Mar 2008
और इस तरह वह बातचीत 12-15 घंटे तक रुकी रही, क्योंकि उस समय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोदकर प्रधानमंत्री के दल में शामिल नहीं थे। काकोदकर उस वक्त बीजिंग की यात्रा पर थे, जो पहली उड़ान पकड़ करार पर दस्तखत के मौके पर वॉशिंगटन पहुंचे। पिछले साल फिर अमेरिका ने भारत पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था (आईएईए) से बात करने का दबाव बनाया। यहां तक कि राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह को उनकी अफ्रीका यात्रा के दौरान फोन ...
करार पर आगे बढ़े तो समर्थन वापस: भाकपा
याहू! भारत, India - 7 Mar 2008
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सदैव परमाणु करार का विरोध करती आ रही और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि परमाणु करार पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका से बराबर भारत सरकार पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम दबाव की निंदा करते हैं और अगर केंद्र सरकार परमाणु करार पर कुछ भी आगे बढ़ती है तो हम अपना समर्थन वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा कि हमने सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत ...
याहू! भारत समय पर ही होंगे चुनाव: प्रणव
याहू! भारत, India - 8 Mar 2008
साथ ही भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर सहयोगी दलों की धमकी को ज्ञात रुख बताते हुए उसे बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया। समय से पूर्व चुनाव कराए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय [2009] पर ही चुनाव चाहते हैं। गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं है, ...
परमाणु करार नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण होगा
सिफी, India - 4 Mar 2008
अमेरिका ने फिर कहा है कि वह चाहता है कि भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता जितनी जल्दी संभव हो सके संपन्न हो जाए। यदि किसी कारण से समझौता नहीं हो पाया तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। अमेरिकी गृह विभाग के प्रवक्ता टाम केसी ने कहा कि भारतीय सरकार को अपने आतरिंक मामलों को सुलझाकर समझौते को पूरा करने की संभावना का फायदा उठाना चाहिए। गौरतलब है कि जहां भारत में वामपंथी दल परमाणु करार का विरोध कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी में ...
करार पर अमेरिका में उठे सवाल
नव भारत, India - 6 Mar 2008
भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते को अमलीज्ाामा पहनाए ज्ााने के लिए नए सिरे से उठाए ज्ाा रहे कदमों के बीच इस समझौते के बारे में अमेरिका में कई सवाल खड़े किए ज्ाा रहे हैं. अमेरिका में इस समझौते के आलोचकों ने बुश प्रशासन से मांग की है कि वह भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बारे में सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों के ज्ावाब को सार्वज्ानिक करें. आलोचकों ने ज्ाारी एक बयान में सरकार से कहा है कि वह पिछले वर्ष अक्टूबर के दौरान ...
हाइड एक्ट का करार पर असर नहीं-प्रणब
वेबदुनिया हिंदी, India - 3 Mar 2008
सरकार ने कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत जारी है तथा इस समझौते को लेकर देश के भीतर व्यापक राजनीतिक आम सहमति बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में दिए बयान में दोहराया कि अमेरिका के हाइड एक्ट का उसके साथ भारत के असैन्य परमाणु करार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हाइड एक्ट के बारे में हाल में आए कुछ ...
याहू! भारत अमेरिका को परमाणु करार पूरा होने का भरोसा
याहू! भारत, India - 5 Mar 2008
उसने विश्वास जताया कि यहां करार को लेकर हो रहे विरोध के बावजूद भारत इस समयसीमा तक सारी औपचारिकताओं को पूरा कर लेगा। अमेरिकी विदेश उप मंत्री रिचर्ड बाउचर ने कहा कि भारत के साथ असैनिक परमाणु सहयोग करने की स्थिति में हाइड एक्ट लागू होगा। लेकिन उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि भारत के परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में करार खत्म हो जाएगा। परमाणु करार के भविष्य के बारे में यहां संवाददाता सम्मेलन में बाउचर ने कहा कि समय कम ...
एटमी करार पर अमेरिका को इंतजार
वेबदुनिया हिंदी, India - 5 Mar 2008
हमें इंतजार है कि भारत सरकार हमें क्या कहने जा रही है। हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। हम बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। हमें अमेरिकी कांग्रेस को पर्याप्त समय देना होगा। हाइड कानून के बारे में उन्होंने कहा कि यह अमेरिका के घरेलू विधायी कामकाज से जुड़ा प्रावधान है जबकि 123 समझौता सीधे भारत और अमेरिका से संबंधित है। उन्होंने कहा- मुझे दोनों के बीच कोई टकराव नजर नहीं आता। यह पूछने पर समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के ...
याहू! भारत लेफ्ट की सरकार को फिर घुड़की
याहू! भारत, India - 3 Mar 2008
भारत-अमेरिका परमाणु करार पर अमल की दिशा में एक भी कदम आगे बढ़ाने के खिलाफ मनमोहन सरकार को घुड़की दी है। माकपा ने कहा है कि देश की संप्रभुता तथा विदेश नीति की स्वतंत्रता की कीमत पर ऐसा कोई समझौता वामपंथी दलों को कतई स्वीकार्य नहीं है। माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं राज्यसभा में पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने भारत पर अमेरिकी हाइड कानून का कोई असर नहीं होने के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के दावे को खारिज करते हुए यहां एक ...
याहू! भारत हाइड व 123 के साथ चलना होगा: बाउचर
याहू! भारत, India - 4 Mar 2008
हाइड कानून के बाबत आशंकाओं के बीच अमेरिका ने भारत के साथ असैनिक परमाणु करार के कार्यान्वयन में इस घरेलू कानून पर विचार किए जाने का सुझाव दिया। अमेरिकी उप विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हाइड कानून घरेलू है और 123 कानून अंतरराष्ट्रीय है। मुझे लगता है कि हम दोनों ही कानूनों को साथ लेकर चल सकते हैं। संवाददाताओं ने उनसे पूछा था कि क्या भारत अमेरिकी परमाणु समझौते में हाइड कानून का रोल होगा। ...
भारत ने अमेरिका को दिया कड़ा संदेश
दैनिक भास्कर, India - 3 Mar 2008
हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री सहित वहां के विभिन्न आला अधिकारियों ने एटमी सहयोग के लिए हाइड एक्ट के प्रावधानों को अनिवार्य बताया है। लोकसभा में सोमवार को विदेश नीति पर अपनी ओर से बयान देते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, ‘हाइड एक्ट अमेरिकी सरकार के कार्यकारी व विधायी अंगों के बीच का प्रावधान है। अमेरिका के साथ परमाणु सहयोग पर भारत के अधिकार व दायित्व द्विपक्षीय 123 परमाणु करार से बंधे हैं और इस पर अमेरिका के साथ ...
याहू! भारत करार पर सरकार खतरे में नहीं
याहू! भारत, India - 6 Mar 2008
मोइली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से अभी बात चल रही है। इसे देखते हुए इस पूरी प्रक्रिया की बीच में समीक्षा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस करार पर सरकार न केवल घटक और समर्थक दलों को बल्कि संसद को विश्वास में लेकर आगे बढ़ रही है तथा किसी से कुछ छिपा नहीं रही है। हाइड एक्ट का हौवा खड़ा किए जाने को उन्होंने गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर तक ने स्पष्ट कर दिया है कि यह ...
करार पर समर्थन वापसी की अब लिखित चेतावनी दैनिक भास्कर
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याहू! भारत फ्रांस-भारत परमाणु संधि पर ईयू दुविधा में
याहू! भारत, India - 4 Mar 2008
ब्रजेश]। अमेरिका के साथ नाभिकीय ऊर्जा करार को लेकर जहां देश की राजनीति में बवाल मचा हुआ है, वहीं फ्रांस और भारत के बीच परमाणु संधि की संभावना से यूरोपीय संघ की सियासत में हलचल मच गई है। ईयू के महत्वपूर्ण सदस्य देश फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के नई दिल्ली के साथ असैन्य परमाणु करार में दिलचस्पी जाहिर करने से ईयू पूरी तरह से दुविधा में फंस गया है। यूरोप के 27 मुल्कों के संगठन ईयू के राजनैतिक प्रबंधकों की हैरानी इस बात ...
याहू! भारत मौजूदा स्वरूप में करार को समर्थन नहीं
याहू! भारत, India - 8 Mar 2008
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [राजग] के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी ने शनिवार को महिला सशक्तिकरण दिवस पर आयोजित महिला सम्मेलन में कहा कि भाजपा अमेरिका के साथ दोस्ती और एटमी करार के खिलाफ नहीं है पर ऐसे एटमी करार पर सरकार को वह समर्थन नही देंगी जिसमें पोखरन तीन जैसे किसी परीक्षण पर रोक हो। उन्होंने कहा कि भला इस समझौते को कैसे स्वीकार किया जा सकता है जिसमें भारत भविष्य में विस्फोट नहीं कर सकता हो। उन्होंने कहा कि ...
याहू! भारत पीएम ने की सोनिया से बातचीत
याहू! भारत, India - 7 Mar 2008
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार को लेकर जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज रात विचार विमर्श किया। सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कोर समूह ने प्रधानमंत्री निवास पर सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात परमाणु करार को लेकर गठित संयुक्त तंत्र की बैठक तत्काल बुलाए जाने की माकपा की मांग के बीच हुई है। प्रधानमंत्री और सोनिया के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई है ...
फिर बजा करार के लिए बेकरार अमेरिकी अलार्म
नवभारत टाइम्स, India - 26 Feb 2008
वॉशिंगटन: अमेरिका ने कहा है कि परमाणु करार के लिए भारत पर पड़ रहा घरेलू दबाव एक अच्छा संकेत है। अमेरिका ने फिर दोहराया कि करार की मंजूरी के लिए जुलाई तक की समयसीमा तय है। उम्मीद है कि अगले महीने भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अमेरिका यात्रा के दौरान परमाणु करार का मुद्दा छाया रहेगा। उधर अपने पहले भारत दौरे पर आए अमेरिका के रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने मंगलवार को आशा जताई कि भारत जल्द ही करार पर आगे बढ़ेगा। ...
करार पर आईएईए से बातचीत पूरी होगी : प्रणव
हिन्दुस्तान दैनिक, India - 3 Mar 2008
भारत अमेरिकी असैन्य परमाणु करार को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सुरक्षा प्रावधानों पर चल रही बातचीत पूरी की जाएगी। यह बयान भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में दिया। उन्होंने कहा कि एटमी करार पर यूपीए सरकार कायम है। उल्लेखनीय है कि सरकार को एटमी करार को लेकर सहयोगी वाम दल सहित विपक्ष के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उधर अमेरिकी प्रशासन इस बात पर लगातार दबाव बनाए हुए ...
परमाणु करार पर देश में व्यापक सहमति हो
हिन्दुस्तान दैनिक, India - 5 Mar 2008
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर देश में व्यापक सहमति बने, जि्ासका कि वाम दल शुरू से विरोध करते रहे हैं। प्रधानमंत्री सिंह ने लोकसभा में कहा कि सरकार परमाणु समझौते को पूरा करने के लिए और भी कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि समझौते को अंतिम मंज्ाूरी देने के रास्ते में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊज्ाार् एज्ोंसी (आईएईए) से संबंधित मसौदा को तैयार कर लिया गया है। ...
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