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जो मारे नहीं गये, मारे जायेंगे

वर्चस्व के झंडे गाढ़े जायेंगे

जो मारे नहीं गये, मारे जायेंगे

वर्चस्व के झंडे गाढ़े जायेंगे

नैनो का सपना सपना ही रहेगा, मध्य वर्ग भूमंडलीय खुले बाजार में गुलछर्रे उड़ाने को बेताब। शेयर सूचका विकास का पैमाना मान िलया गया निर्विवाद। देश की स्वतन्त्रता सम्प्रभुता गिरवी पर रख दी गयी। वित्तमंत्री, प्रधानमंत्री, राजनेता वाशिंगटन से तैनात किये जाने लगे। प्रणव जैसा कुलीन ब्राह्मण वास्तविक प्रधानमंत्री बतौर अमेरिका की दलाली कर रहे हैं ठीक वैसे ही, जैसे इंदिरा जमाने में नंबर दो की हैसियत से रुसी दलाली कर रहे थे। वामपंथी तब भी कांग्रेस के साथ थे नेहरु प्रगतिशील थे तो इंदिरा गांधी समाजवादी। अब सोनिया गांधी मनमोहन सिहं धर्म निरपेक्ष। देश प्रदेश की नीतियां सरकारें बदलते ही बदल जातीं ततत्काल, पर नरसिम्हा सरकार के जमाने से जारी नवउदारवाद का तूफान देखिये, थमने का नाम नहीं लेता। भाजपाइयों का हिंदुत्व हो या फिर वामपंथियों का मार्क्सवाद, मायावती का दलित आंदोलन हो या नवीन पटनायक का महान कलिंग या करुणानिधि की द्रविड़ राष्ट्रीयता, भारत को अमेरिका बना देने की आपाधापी जारी। अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील हो गया यह विभाजित, रक्ताक्त उपमहादेश। मारे जारहे हैं मुलनिवासी। सेज के बहाने, कैमिकल हब की खातिर, विदेशी पूंजी के लिए अमेरिकी रियासते बन रही हैं। प्ाकृतिक संसाधनों की खुली लूच है। मूलनिवासी आजीविका और जीवन से वंचित। पर नैनो के ख्वाब में मगन नवधनाढ्यों को नंदीग्राम, सिंगुर या लवी मुंबई का खून नजर नहीं आता। बनाने को बना दिये तीन नये राज्य, उत्तराखंड, ऱारखंड और छत्तीसगढ़। राष्रीयताएं किनारे हो गयी और हिंदुत्व का परचम लहराया। पूर्वोत्तर और कश्मीर में विशष सैन्य कानून लागू है पांच दशक से। हमने आपात काल देख लिया। नक्सलवाद का दमन देख लिया। दलितोत्थान देख लिया। हरित क्रंति और समाजवाद के बाद आपरेशन ब्लू स्टार और बाबरी ध्वंस भी देख लिए। इंदिरा और राजीव की हत्यांएं, सांप्रदायिक आंदोलन, पूर्वोत्तर और कश्मीर में आतमकवाद, खालिस्तान आंदोलन और संपूर्ण क्रांति, गैरकांग्रेसवाद का जायजा भी लिया हमने। अब अपनी कृषि, शिक्षा, भाषाओं, संस्कृतियों, लोकधुनों, गीतों, साहित्य, स्वास्थ्य, देशी तमाम कामधंधों कको तबाह होते देख रहे हैं। अमेरिकी दिवालिया अर्थयवस्था का पिछलग्गू हो गया देश। नतीजा देखिये, कैसे गोता मारता शेयर सूचकांक। फिर भी विकास दर के फर्जी आंकड़े जारी करके फरेब में फंसाया जाता हमें। आररक्षण और वेतनमान के जरिये खुशामदी तबका राजकाज में मददगार। टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर और मीडिया भी मनुष्य और प्कृति के चौतरफा सर्वनाश के लिए गोलबंद। किसान या भूखों मर रहे हैं या आत्महत्.ा कर रहे हैं। किस देश के निवासी हैं हम? जिस देश में गंगा बहती है और तमाम नदियां बिक गयीं। रहने को घर नहीं, सारा जहां हमारा। मूलनिवासियों को जड़ों से उखाड़कर वे वंदेमातरम गाते हुए गला काट रहे हैं। कातिल नीली संस्कृति ने पांव पसार लिये हैं। एकजुट हैं ब्राह्मण, यहूदी और श्वेत रंगभेदी कारपोरेट साम्राज्यवाद। छह हजार जातियों में बंटा यह देश हमलावरों से बचा नहीं सकता हमें और हम कायल हैं मनमोहन, चिदम्वरम, आडवाणी, मायावती, बुद्धदेव,नरेंद्र मोदी, वसुंधरा, नवीन, देशमुख, सचिन, सानिया, सोनिया, राहुल , प्रियंका, अमिताभ, ऐश, गांगुली, अंबानी, टाटा जैसे उत्तर आधुनिक आइकनों के। हमें कौन बचायेगा?

राज ठाकरे मराठा मानुष की बात करते हैं। मुंबई में जो कहर उनका बरपा उत्तर भारतीयों के खिलाफ, उसकी बलि चढ़ने वाला पहला आदमी वहीं मराठा मानुष। विदर्भ में किसानों की लाशें उन्हे नजर नहीं आतीं। क्या इसके लिए भी बाहरी लोग जिम्मेवार हैं? नवी मुंबई का सेज दिखता नहीं। बहुमंजिली इमारतें दिखती नहीं।
मारे जाते हैं तो मेहनतकश मजूर। असम में भी वहीं हाल है। मूलनिवासियों के सर्वनाश के लिए जिम्मेवार लोगों का बाल बांका करने की औकात नहीं हैं, गदंगे भजडकाकार वोच और नोट साधने के मास्टरों को बांसों उछाल देते हैं हम। ऐसा सर्वत्र है। कोई बतायें, असम में क्या हो रहा है? कश्मीर में? बोकारो, टाटानगर, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र सबसे पुरातन उद्योग हैं। झारखंड और छत्तीसगढ़ अब बने हैं। कल कारखानों और खनिज संपदा इफरात होने के बावजूद बिहार, औड़ीशा, मध्य प्रदेश का क्या हुआ। भारत रत्न सरीखा टाटा की मौजूदगी के बावजूद सिंहभूम के आदिवासी या ते चाय बागानों में मरखप रहे हैं या फिर ईंट भट्ठों में। बिहारी जनता देश दुनिया में रोजी रोची के लिए भटकने को मजबूर। कालाहांडी औड़ाशा की पुरानी ततस्वीर है और हरामखोर सत्ताव्र ने समूचे देश का भूगोल कालाहांडी ब दिया। कोई आंदोलन है? नीली संस्कृति में निष्णात, अधपढ़ा, उच्चशिक्षा से वंचित, बेरोजगार युवा पीढ़ी को होश है कि किस अंधैरे काले सुराग में दाखिल हो रही है उनकी दुनिया? किसान और मजदूर आंदोलनों का क्या हुआ? वामपंथी जवाब देंगे? मुस्लिम वोट के जरिये हिंदुत्व और अमेरिको को गरियाने वाले वामपंथी उनके सबसे बड़े मददगार है। मुंहजबानी विप्लव से अबतक सर्वहारा, बुद्धिविनाशक तबकों, मजूरो और किसानों के सहारे ब्राहमण बंगाली मलयालम राष्ट्रीयताओं को प्रोत्साहन देकर मोदी मोदी अमेरिका अमेरिका चिल्लाकर मूलनिवासियों के कत्लेआम को अंजाम देने में माहिर हैं मार्क्सवादी। लालू प्रसाद यादव छठ मनाने मुंबई जायेंगे। बिहार और नयी दि्ल्ली में छठ मनाकर सारा चारा चरने के बाद इरादे क्या हैं उनके? अमर सिंह अमिताभ और अंबानी को एक साथ साधते हैं। णुंबई में आग भड़काने में इन हजरत के योगदान को कैसे भूलेंगे? हमारे महान बालीवूड में पत्ता तक नहीं हिलत बाल ठाकरे की मर्जी बगैर। ये राज ठाकरे क्या आसमान से गरा कोई नक्षत्र है? बताइये।

किसी को कोई आंच नहीं आती राजनीति की चालें चलने में। ममता महाश्वेता मेधा गरजती रहीं। चिल्लाते रहे तमाम पुरोहित। सिंगुर की बलि हो गयी तापसी मलिक। खुदकशी क वारदातें वहां आम हैं। नंदीग्राम में मारे गये दलित, पिछड़े और मुसलमान। सत्तावर्ग के पक्ष विपक्ष, सिविल सोसाइटी के रथी महारथी को आंच तक नहीं आयी। और लीजिये आपके लिए तैयार नैनो, जो भारती. सेना के काम आ.येगी। रक्षा उद्योग मे दाखिला हो गया टाटा समूह का। यूनियन कार्बाइड भोपाल गैस त्रासदी के लिए भले जिम्मेवार हो, पर हिरोशिमे और नागासाकी के दुहराव के लिए वामपंथी सलेम और कीसिंजर से हाथ मिलाने को तैयार हैं। डाउज को न्यौता ताकि भोपाल गैस त्रासदी की खेती की जाए। परमाणु सौदे का इतना विरोध, पर हरिपुर में परमाणु संयंत्र अमेरिकी रिएक्चर के साथ लगाने को बेताब। सुंदरवन में बाघों को बचाने के लिए बंगाल से बाहर बसे दलित बंगाली शरणार्थियों को बुलाकर लाने के बावजूद गोली दागकर बाघों का भोजन बना देने वाले बंगाली ब्राह्मण कम्युनिस्ट विदेशी पूंजी निवेश के लिए पूरे संदरवन को पर्यचन के लिए खोलने को तैयार है। पूरा समुद्रतट कारपोेरेटों के हवाले। गुजरात में सबसे बेहतरीन तेल ब्लाक अंबानी को । शोध खोज लागत ओएनजीसी का। वाह। वाह। औलिव कुओ की सेहत के लिए परेशान लोग औड़ीशा और आंध्र में मूलनिवासियों के कत्लेआम से बेखबर।

भूखमरी, बेरोजगारी, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और सामंती राजकीय कत्लेआम में णूलनिवासी मारे जाते कीड़े मकोड़े की तरह। पर इन्हे मौका मिलता है बर्ड प्लू और एड्स के फर्जी आंकड़ों से चिकित्सा और फुटकर बाजार के कारपोटीकरण का।
अपनी अपनी जान की खैर मनाइये और हो सके तो जनन्त की असिलियत को समझने की कोशिश भी कीजिये।

सुर्खियों, विज्ञापनों और रिएलिटी शो, जिंगल और नीली क्रांति से परे भी देखिए जनाब।

गाजियाबाद जिले के बाबूगढ़ स्थित एक स्कूल में चार छात्रों ने अपने सहपाठी छात्र की गोलीमार कर हत्या कर दी। मारे गए छात्र की पहचान विपुल के रूप में हुई है। फिलहाल घटना के कारणों का पता नहींचल सका है।
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में वृद्धि को जरुरी बताते हुए इसे वापस लिए जाने की संभावना से इनकार किया।
प्रधानमंत्री आवास पर एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि दुनिया में कच्चे तेलों के मूल्यों में वृद्धि जारी है तथा देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने से वित्तीय प्रणाली के ध्वस्त होने का खतरा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में मामूली वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना है।
प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। संवाददाताओं ने डॉ. सिंह से एक अमेरिकी अधिकारी की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया माँगी थी कि समझौते को पूरा करने के लिए समय बीता जा रहा है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार के बारे में उन्होंने कहा कि ' जब ऐसा होगा तब आपको पता चल जाएगा।'

किसी मुसीबत में घिर गए हों, तो मोबाइल का एक बटन दबाइए, पुलिस मदद को हाजिर। यह अब कोई कल्पना नहीं है बल्कि इसी महीने हकीकत में तब्दील होने जा रहा है।
पिछले दिनों भारतीय संचार निगम लिमिटेड [बीएसएनएल] ने इस तकनीक का प्रदर्शन किया। बीएसएनएल का मोबाइल अब संकट के दौरान लोगों का साथ निभाएगा। मोबाइल के की-पैड पर एक चिह्नित बटन को दबाते ही पुलिस नियंत्रण कक्ष को संकट में फंसे व्यक्ति के मोबाइल का पूरी विवरण व संबंधित टावर से दूरी का पता चल जाएगा। मोबाइल प्रशासन ने लोकेशन आधारित सेवाओं के बाद डिस्टरेस अलार्म का परीक्षण करके लोगों को संकट के दौरान मदद करने का रास्ता साफ कर दिया है।
बीते दिनों संचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा ने डीजीएम महेंद्र श्रीवास्तव से डिस्टरेस अलार्म की तकनीक के बारे में पूरी जानकारी ली। डीजीएम महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस महीने के आखिर तक यह सुविधा राजधानी के लोगों को मिलने लगेगी। बाद में इसका विस्तार प्रदेश भर में करने की योजना है। उन्होंने बताया कि जल्द ही पुलिस अधिकारियों से बात करके नियंत्रण कक्ष से बीएसएनएल के सर्वर को जोड़ दिया जाएगा।

राजनीति के गलियारों में जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है उससे लगता है कि अगले आम चुनाव को अब बहुत दिनों तक टाला नहीं जा सकता। एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने के इस खेल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कूद पड़े हैं। एक बार फिर केंद्र में सत्ता हासिल करने की उम्मीद पाले एनडीए और तीसरे मोर्चे को पुनर्जीवित करने में जुटे दलों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा है कि गैरकांग्रेस दलों की सरकारें देश को विभाजित करने का काम करती हैं।
उल्लेखनीय तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री ने यह वक्तव्य एक ऐसे मंच से दिया है जहां आम तौर पर राजनीतिक बहसबाजी से गुरेज किया जाता है। प्रसिद्ध उद्योग चैंबर फिक्की के 80वें सालाना बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। देश की अर्थव्यवस्था में लगातार नौ फीसदी वृद्धि का श्रेय सीधे तौर पर अपनी सरकार और खुद को देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भी कांग्रेस की सरकार बनती है अर्थव्यवस्था में खुशहाली आती है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 1992 से वर्ष 1997 के दौरान अर्थव्यवस्था में सात फीसदी की औसत विकास दर हासिल की गई थी। लेकिन बाद में 1997-98 से वर्ष 2002 के दौरान विकास दर घट कर 5.5 फीसदी रह गई।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने तत्कालीन एनडीए सरकार को आड़ों हाथ लेते हुए कहा कि उस समय की सरकार आम आदमी की उम्मीदों को परवान नहीं चढ़ सकी। वे [एनडीए सरकार] बांटने वाले एजेंडे पर काम कर रहे थे। उनके आर्थिक एजेंडे का कोई लक्ष्य नहीं था। उन्होंने देश की विकास यात्रा को ज्यादा व्यापक बनाने और इसमें अन्य लोगों को शामिल करने की भी कोशिश नहीं की।
बताते चलें कि कई बार यह कहा जाता है कि मौजूदा तेज आर्थिक विकास दर की आधारशिला एनडीए सरकार के दौर में ही रखी गई थी। प्रधानमंत्री ने एक तरह से भाजपा की तरफ से आने वाले इस तरह के दावों को गलत साबित करने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षो में हमारा काम बेहद संतोषजनक रहा है। खासकर दो मोर्चे पर हमारा प्रदर्शन अच्छा कहा जा सकता है। पहला, उच्च आर्थिक विकास दर को बरकरार रखना और दूसरा, आर्थिक विकास में ज्यादा से ज्यादा सामाजिक समूहों को शामिल किया जाना। इससे विकास की अवधारणा पहले से ज्यादा टिकाऊ दिखाई देती है।
जाहिर है कि मौजूदा आर्थिक व्यवस्था में मीन-मेख निकाल रहे भाजपा, सपा और वाम दलों को प्रधानमंत्री ने एक तरह से आइना दिखाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दे दिया है कि आगामी बजट में सरकार ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को खासी वरीयता देने जा रही है।
आटो एक्सपो में अपनी लखटकिया कार से धमाल मचाने के बाद शनिवार से शुरू हुए डिफेंस एक्सपो में टाटा मोटर्स ने सेना के लिए लाइट स्पेशियेस्टि व्हीकल नाम से एक वाहन उतार दिया, जिसे लड़ाकू नैनो के रूप में देखा और पेश किया जा रहा है।
सेना के लिए बीस अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकने वाली यह जीपनुमा गाड़ी फौजी वर्दी की रंगत में है और सिर से लेकर बोनट तक बंदूक से लैस है। हालांकि नागरिक नैनो की तरह यह वाहन भारी भीड़ नहीं जुटा पाया, लेकिन रक्षा प्रदर्शनी में आए 40 देशों के मेहमान प्रतिनिधियों को यह बहुत लुभा रही है।
लड़ाकू नैनो को लांच करने के लिए टाटा समूह के संरक्षण रतन टाटा नहीं आए, लेकिन इसके संभावित ग्राहक के तौर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] के आला अधिकारी वहां मौजूद थे। टाटा मोटर्स और डीआरडीओ के बीच लाइट आर्मर्ड ट्रíप कैरियर के बारे में टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के करार का आदान-प्रदान किया गया।
टाटा मोटर्स के अधिकारियों ने बताया कि यह हल्का और खूबसूरत, लेकिन जांबाज वाहन बुलेट प्रूफ है और आतंकियों से लेकर दुश्मन की फौज तक के दांत खट्टे कर सकता है। इसे टोही गतिविधियों से लेकर आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों तक में इस्तेमाल किया जा सकता है। लड़ाकू नैनो नागरिक नैनो से बड़ी है और लखटकिया भी नहीं है। लेकिन खूबियों के मामले में नागरिक नैनो से कहीं आगे बताई जा रही है। इसे बख्तरबंद वाहन, चौकियों के गश्ती दलों, आर्टिलरी की फील्ड रेजीमेंटों और एंबुलेंस तक के कामों में काम में लाया जा सकता है।
सरकार ने निर्यातकों पर लागू राज्य स्तरीय करों को रिफंड करने का बोझ राज्यों के ही सिर पर डालने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसकी जमीन नवगठित 13वां वित्त आयोग तैयार करेगा।
इस बात का खुलासा करते हुए कमलनाथ ने कहा कि राज्यस्तरीय करों के साथ-साथ सेवा कर के रिफंड की भी व्यवस्था जल्द किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि इनसे निर्यात लागत बढ़ती है और ग्लोबल बाजार में उत्पाद प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात पर लागू करों को रिफंड किए जाने की स्थिति में उन्हें राज्यों के वित्तीय आवंटन में ही समायोजित करने पर वित्त आयोग विचार करेगा। उम्मीद है कि यह मसला जल्द हल कर लिया जाएगा। कमलनाथ शनिवार को यहां उद्योग चैंबर फिक्की की सालाना आम बैठक के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। वैसे तो राज्य स्तरीय करों के रिफंड के लिए उन्होंने एक प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा था, लेकिन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने उस पर अड़ंगा लगा दिया। उन्होंने कहा कि डालर के मुकाबले रुपये की मजबूती और लेन-देन संबंधी लागत को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्रालय इनवर्टेड शुल्क ढांचे को तर्कसंगत बनाने के भी पक्ष में है। इनवर्टेड शुल्क ढांचे का मतलब कच्चे माल पर ज्यादा शुल्क और तैयार उत्पाद पर कम शुल्क से होता है। इससे तैयार उत्पाद की लागत बढ़ जाती है और वह बाजार में गैर प्रतिस्पर्धी हो जाता है। निर्यातकों की समस्याओं को बजट और उसके बाद पेश की जाने वाली विदेश व्यापार नीति में हल करने की कोशिश की जा रही है। विशेष आर्थिक जोन [एसईजेड] स्कीम को लेकर वित्त मंत्रालय की चिंताओं पर उन्होंने कहा कि वह इस बारे में अकेले खुद कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। कोई भी बदलाव करने के लिए एसईजेड अधिनियम में संशोधन करना होगा।
डब्ल्यूटीओ व्यापार वार्ताओं का जिक्र करते हुए कमलनाथ ने कहा कि अमेरिका जैसे देश कृषि सब्सिडी बढ़ाते जा रहे हैं, फिर भी इन वार्ताओं को 'विकास के दौर की वार्ताएं' कहा जा रहा है। कृषि समझौते पर भारत किसी से दया की भीख नहीं मांग रहा है। विकसित देशों को समझाया गया है कि हमारे यहां कृषि महज व्यवसाय न होकर करोड़ों लोगों के लिए आजीविका का जरिया है। इस समय भारत की आवाज बुलंद है और उसे विकसित देशों को सुनना होगा। भारत को अपने वित्तीय नियम-कायदों के दायरे में आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के वित्तीय नियामक तंत्र ने ही उसे सब-प्राइम संकट में डाला है। दुनिया को यह भी समझना चाहिए कि भारत का अधिकांश व्यापार अन्य देशों की तरह महज वरीयता व्यापार समझौतों पर ही निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न द्विपक्षीय व्यापारिक समझौतों को जल्द ही अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि गिरवी रख कर वित्त उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को न्यूनतम एक अरब रुपये का कोष रखना और पूंजी पर्याप्तता अनुपात 10 प्रतिशत बनाए रखना जरूरी है।
इस तरह की कंपनियों के नियम तय करने वाले रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। बैंक ने कहा कि इस तरह की कंपनियां न तो जनता से जमा स्वीकार करेंगी और न ही विदेशी वाणिज्यिक उधार लेंगी।
नक्सलियों से निपटने में जुटी वायुसेना
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/terrorism/5_19_4182512/

नई दिल्ली। उड़ीसा के नयागढ़ शहर में नक्सलियों के शुक्रवार रात के हमले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए वायुसेना के हेलीकाप्टर लगाए हैं। यह पहला मौका है जब देश में नक्सलियों से निपटने के लिए वायुसेना की सेवाएं ली गई हैं। इसके अलावा वहां सीआरपीएफ के छह सौ जवानों को तैनात किया गया है। इस बीच, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि हमलावर नक्सलियों की धरपकड़ के लिए उड़ीसा सरकार की सहायता के लिए एक टास्कफोर्स गठित की गई है और हमला करने वाले नक्सलियों को पकड़ने में सहयोग के लिए हैदराबाद से वायुसेना के दो चेतक हेलीकाप्टर भेजे गए हैं।
सीआरपीएफ प्रवक्ता ने बताया कि उड़ीसा की छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और झारखंड से लगने वाली सीमाओं को सील कर नयागढ़ क्षेत्र में सीआरपीएफ की छह कंपनियां [करीब 600 जवान] तैनात किए गए हैं।
उड़ीसा में पिछले चार वर्ष में नक्सलियों का यह दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले 2004 में सैकड़ों सशस्त्र नक्सलियों ने कोरापुर जिले में पांच थानों पर हमला किया था और जिला शस्त्रागार को लूट लिया था।
इस बीच, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मारे गए जवानों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये तथा मृतक नागरिक के नागरिक के परिजनों को दो लाख रुपये वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। घटनास्थल के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों की धरपकड़ के लिए तलाश अभियान शुरू कर दिया गया है। पटनायक ने स्थिति से निपटने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की।
उड़ीसा में नक्सली हमला, 14 पुलिसकर्मी शहीद
भुवनेश्वर। उड़ीसा के नयागढ़ जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए हमलों में 14 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। हमले में 15 पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं। एक मुखबिर के भी मारे जाने की खबर है। नक्सलियों ने जिले के डीएम और एसपी के आवास पर भी गोलीबारी की। इन दोनों अफसरों के आवास पर नक्सली रात के 11 बजे से लेकर एक बजे तक जमे रहे। इसके बाद वे वहां से भाग गए।
नयागढ़ थाने से पांच शव और पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से चार शव निकाले जा चुके हैं। आधिकारिक तौर पर इन लोगों के मारे जाने की पुष्टि नहीं हो पाई है। जिले के पुलिस अधीक्षक से बात करने की कोशिश की गई पर उनसे बात नहीं हो पाई। बारूदी सुरंग की आशंका से पुलिस थाने में समाचार लिखे जाने तक घुस नहीं पाई थी। नक्सलियों ने जिले के नयागढ़ थाने पर हमला कर यहां से भारी मात्रा में हथियार लूट लिया। साथ ही नुआगांव थाने पर हमला कर फूंक दिया। इसके बाद उग्रवादियों ने जिले के डीएम व आरक्षी अधीक्षक के बंगले पर हमला बोल दिया।
पहली घटना में रात 11 बजे दो ट्रकों पर असलहों से लैस करीब 400 नक्सलियों ने नयागढ़ थाने पर हमला बोल दिया। पहले बमों से जोरदार हमला किया। जब तक वहां तैनात जवान मोर्चा लेते तब तक थाने के बगल में स्थित शस्त्रागार पर हमला कर वहां रखे हथियारों को 407 ट्रक पर लाद कर चलते बने। लगभग इसी समय एक अन्य घटना में नक्सलियों ने जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर दसतल्ला के नुआगांव थाने पर भी हमला किया। लूटपाट करने के बाद थाने को फूंक दिया। वहां रखे गए सभी वाहनों में आग लगा दी। इस दौरान नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर बेथी बेहरा की गोली मारकर हत्या कर दी।

असम में चार उल्फा उग्रवादी ढेर
शिबसागर। असम के शिबसागर जिले में शनिवार सुबह सेना और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उल्फा के चार उग्रवादी मारे गए।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। उन्हें खबर मिली थी कि नफुक नाहरानी गांव के एक मकान में उल्फा उग्रवादी छिपे हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि उग्रवादियों ने सुरक्षाबल पर गोलियां चलाई। जवाबी कार्रवाई में घटनास्थल पर ही चारों उग्रवादी मारे गए। उन्होंने बताया कि उग्रवादियों ने जबरन मकान में आश्रय लिया था।
सूत्रों ने बताया कि उग्रवादियों के पास से 16 राउंड गोलियों समेत एक ऐके 56 राइफल, एक पिस्तौल, चार ग्रेनेड, एक मोबाइल फोन, खर्चे की रसीदें और कई लिफाफे बरामद किए गए।

नक्सलवाद से निपटने की दोहरी रणनीति
नई दिल्ली [राजकिशोर]। नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने अब दोहरी रणनीति पर काम शुरू किया है। इसके लिए चार राज्यों के आठ जिलों को चुना गया है। इनमें सुरक्षा प्रबंधन और विकास रेल की पटरी की तरह समांतर चलेंगे। नक्सलवाद को कुचलने के लिए सरकारी 'बुलडोजर' सुरक्षा-विकास की इस पटरी पर दौड़ेगा। अगर यह फार्मूला सफल रहा तो नक्सलवाद जैसी समस्याओं से निपटने के लिए इसी माडल को केंद्र आगे बढ़ाएगा।
पूरे देश में यूं तो नक्सलवाद से सर्वाधिक प्रभावित 33 जिले गृह मंत्रालय की फेहरिस्त में हैं। इनमें भी सबसे बुरी दशा में पहुंच गए जिले, जिनमें कई इलाकों से प्रशासन का संपर्क खत्म हो चुका है ऐसे आठ जिले चुने गए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और वीजापुर, झारखंड में चतरा व पलामू, उड़ीसा में मलकान व रायगढ़ और बिहार के औरंगाबाद व गया जिले हैं। इन सभी जिलों में नक्सलवाद के खात्मे के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के साथ सुरक्षा उपायों को विकास के साथ जोड़ने की मुहिम शुरू हुई है।
हालांकि, पिछले कई अनुभवों और काफी कीमत चुकाने के बाद सरकार को यह फार्मूला सूझा है। अभी हाल में ही नक्सलवाद प्रभावित राज्यों की हालात की समीक्षा के लिए बैठे अंतरमंत्रिमंडलीय समूह की बैठक में इस फार्मूले पर अमल की सहमति बनी है। मंत्रालय के सूत्र इस बारे में खासतौर से छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हैं। ऐसा पाया गया है कि बिना सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए विकास कार्यो को अंजाम देना तो मुश्किल है ही और अगर हो गया तो उसके भी कोई मायने नहीं।
इस कड़ी में कुछ ज्वलंत उदाहरण भी हैं। मसलन नक्सलवादियों ने कई स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाकर इलाकों को सामाजिक गतिविधि का केंद्र बनने से रोका। इसलिए अब सामाजिक गतिविधि के केंद्रों के साथ ही थाने बनाए जाएंगे। उद्देश्य स्पष्ट है कि ऐसी जगहों पर सुरक्षा अगर कड़ी नहीं हुई तो उनका कोई मतलब नहीं होगा। यही नहीं, पुलिस अधिकारियों के लिए हास्टल की व्यवस्था भी ब्लाक बनाकर की जाएगी, ताकि उसे खुद भी अपनी सुरक्षा का खतरा न रहे और मौके पर आसानी से उपलब्ध रहे।
सड़क है प्रमुख समस्या
नक्सली सबसे पहले अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों से शासन-प्रशासन का संपर्क पूरी तरह ध्वस्त करते हैं। ऐसे इलाकों में सड़क निर्माण सबसे बड़ी चुनौती है और हालत यह है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क बनाने के लिए बड़ी कंपनियां तैयार ही नहीं हो रही हैं। छोटे ठेकदार तैयार हो रहे हैं तो उनके पास इतना साजो-सामान नहीं है कि काम हो सके। इसलिए अब सरकार ने राज्य सरकारों से खुद उपकरण उपलब्ध कराने के अलावा भूतल परिवहन मंत्रालय से भी मदद लेने का फैसला किया है।
भूटान में पांव पसारने लगा है आतंकवाद
थिंपू। भूटान में भी आतंकी गतिविधियां तेजी से पांव पसारने लगी हैं। समद्रुप जोंगखार जिले के नुनाई जंगल में आतंकियों के एक शिविर पर रायल भूटान आर्मी ने शुक्रवार को धावा बोला। नेपाल से संचालित हो रहे कम्युनिस्ट पार्टी आफ भूटान के दो सदस्यों को दबोच लिया।
रायल भूटान आर्मी ने मौके से दो पिस्टल, चार रायफल और 15 बम बरामद किए। पकड़े गए दोनों आतंकियों की शिनाख्त सनमान गुरुंग और एतराज राय के तौर पर की गई है। सेना के एक प्रवक्ता के मुताबिक पकड़े गए दोनों आतंकियों ने बताया है कि शिविर में उनके 18 साथी और थे। जनवरी, 2008 से लेकर अब तक भूटान में यह तीसरा आतंकी शिविर पकड़ा गया है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के माओवादी भूटान को भी अपना ठिकाना बनाने की तैयारी में हैं। इसके लिए वे असम को गलियारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। भूटान के आधिकारिक समाचार पत्र क्वेनसेल ने बताया है कि माओ विद्रोही भूटान में घुसपैठ कर रहे हैं, भूटान की शाही सरकार के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन के लिए लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सरपांग जिले में रायल भूटान आर्मी के हत्थे चढ़े छह माओवादियों ने कुबूल किया था कि उन्होंने असम के रास्ते भूटान की सीमा में प्रवेश किया था। बुडुनीखोला में स्थानीय नागरिकों की मदद से इन लोगों ने प्रशिक्षण शिविर भी कायम कर रखा था। अपने कामरेडों की गिरफ्तारी के एक दिन पहले ही पांच माओ विद्रोही नेपाल लौट गए थे।
पुलिस सूत्रों ने बताया है कि वे इस मामले वाकिफ हैं और छानबीन कर रहे हैं। इस संबंध में असम पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि वे इस पूरे प्रकरण से वाकिफ हैं और रायल भूटान आर्मी के संपर्क में हैं।


आतंक फैला सकता है बब्बर खालसा
जैसलमेर। देश में पंजाब सहित अन्य भागों में कट्टर आतंकी संगठन बब्बर खालसा की आतंकी गतिविधियां एक बार फिर परवान चढ़ने की संभावना है।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की नई रणनीति के तहत अपने देश में बिगड़ती आंतरिक सुरक्षा की स्थिति तथा कट्टरपंथी ताकतों का ध्यान बंटाने के लिए भारत में एक बार पुन: नए सिरे से आतंकी गतिविधियां को तेज करने की साजिश रची गई है। इसके तहत बब्बर खालसा, सिमी आदि अन्य आतंकी समर्थित संगठनों को सक्रिय किया जाएगा तथा पाकिस्तान से उन्हें भरपूर मदद दी जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के नए चीफ द्वारा पाकिस्तान में बैठे इस आतंकी संगठन के आकाओं को एक बार पुन: सक्रिय होने को कहा है। इसके लिए उन्हें आरडीएक्स, हथियार एवं हेरोइन आदि के खेप के साथ भारी-भरकम धनराशि मुहैया करवाए जाने की सूचना है।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले कुछ समय में बब्बर खालसा की आतंकी गतिविधियां देश के कई भागों में पुन: दिखाई देने की आशंका है। आईएसआई के प्रमुख लतीफ ने बब्बर खालसा के मुखिया वाधव सिंह बब्बर को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है तथा उसे भारत में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान में लाहौर एवं रावलपिंडी में बब्बर खालसा के नए प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं, जहां आतंकियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया गया है। भारत से भी बब्बर खालसा से जुड़े कुछ पुराने आतंकियों एवं अन्य एजेंटों को बुलाया गया है। इन्हें हर तरह से प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईएसआई द्वारा पाकिस्तान में बैठे बब्बर खालसा के आतंकियों को आरडीएक्स, हथियार, हेरोइन के कंसाइनमेंट मुहैया करवाए गए हैं, इन्हें पंजाब एवं राजस्थान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर उपयुक्त रास्तों से भारत में भिजवाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष लुधियाना के श्रृंगार सिनेमा में हुए बम विस्फोट के पीछे बब्बर खालसा का ही हाथ था। विस्फोट के लिए उपयोग आरडीएक्स पाकिस्तान से राजस्थान की सीमा से होकर भारतीय सीमा में आया था। 22 किलो आरडीएक्स की खेप जैसलमेर निवासी अलिया ने बब्बर खालसा के गुरप्रीत सिंह को बीकानेर के बज्जू क्षेत्र में सौंपी थी। इस मामले में अलिया का साथी मुइब खान अभी तक फरार है, उसके पकड़े जाने पर बब्बर खालसा के बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।
राज ठाकरे ने बहाए घड़ियाली आंसू
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गुरुवार को घड़ियाली आंसू बहाए। उन्होंने बुधवार की हिंसा में नासिक में मारे गए हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड [एचएएल] कर्मचारी अंबादास हरिभाऊ धारराव की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज ने कहा कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा। सिर्फ मराठियों के लिए आंदोलन किया है।
राज ने पिछले दस दिनों से मनसे के उत्तर भारतीय विरोधी अभियान और बुधवार को गिरफ्तारी व जमानत पर रिहाई के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीतिक लाबी के दबाव में उन्हें और उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर अन्यायपूर्ण अपराध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि एचएएल कर्मी क