चौतरफा विनाश का आलम है।
देश आजाद है पर राजकाज पर राजघरोनों का कब्जा बरकरार है। अंग्रेजी हुकूमत ने दरअसल अपने दो सौ साल के शसन में भारत क शहरीकरण और औद्यौगीकरण के बहाने भारतीय समाज के आत्मनिर्भर अार्िथक सामाजिक भूगोल को ही बदल डाला। पर अंग्रेजी शिक्षा को विकास का पर्याय मानने वाले लोग नवजागरण की महिमा बखान करते रहे। तथाकथित मनीषियों ने मूलनिवासियों, किसानों, आदिवासियों, दलितों के आंदोलनों का हमेशा विरोध किया। आज का सत्तावर्ग पठान मुगल काल से लकर समूचे बरतानिया राज के दौरा हमेशा शासकों का साथ देते हुए मूलनिवासियों के शोषण हदोहन के जरिये अपने जड़ों क मजबूत करते रहे। अंग्रेज चले गये, पर रियासत और जमींदारियां कायम हैं। गद्दारों के वंशज, जिन्होंने सन सत्तावन, नील विद्रोह, संथाल-मुंडा-कोल-भील-संन्यासी विद्रोह और आजादी की लड़ाई में देशवासियों से दगा किया, आज सेनसेक्स अप्रवासी नीले भारत के राजा महाराजा हैं।
उनकी भाषा नहीं बदली है। तब भी मूलनिवासियों के सर्वनाश के लिए वे विकास का बहाना बनाते थे। आज भी विकास दर के बहाने आम जनता को जीवन और आजीविका से बदखल करने का काम जारी है ग्लोबीकरण के बहाने।
अनंत शोकगाथा है जनजीवन। विचारधाराएं नंदीग्राम, सिंगुर, नवी मुंबई, बरनाला, नोएडा,कलिंगनगर को अंजाम गे रही हैं।
७४ करोड़ लोग ुखमरी के कगार पर।
जल, जमीन और जंगल से बेदखल लोग अपने ही घर में विस्थापित। कंप्यूटर अौर अंग्रेज के सिवाय नौकरियां नहीं। उदारीकरण से आर७ण बमतलब, पर राजनीति की आग लगी हुई है। मंदिर मसिजद बन रहे हैं, न इलाज है न रोजगार। अस्पताल में गुर्दाचोर।
वोटों के सौदागर हजारों जातियों में बंटे समाज और जनपदों को तबाह कर रहे हैं।
असम हो या राजस्थान, मुंबई हो या मणिपुर, तमिलनाडु हो या फिर कश्मीर, भाई के खिलाफ भाई को आत्मघात में उलझा गिया गया है।
लखटतिया के ख्वाब में फिर भी देश बना सिंगुर या नंदीग्राम।
भोपाल गैस त्रासदी के बाद अब पारमाणविक होड़ है। रासायनिक इलेक्रानिक कबाड़ है चारों तरफ। न हवा है अौर न पानी। हिरोशिमा और नागासाकी को जी रहे हैं पर अहसास तक नहीं।
भारतमाता को टुकड़ा टुकड़ा करके वे वंदेमातरम गाते रहे। मां बहनों का सौदा करते रहे। हमारे अपनों को मारते रहे।
और हम हैं कि सुपर पावर बनने के सपने मे नीली क्रांति में निष्णात।
अब इन वारदातों पर भी गौर फरमाएं।
भारत और अमेरिका के संबंधों में चौतरफा विकास की ओर धयान दिलाते हुए अमेरिका के राजदूत डेविड मल्फोर्ड ने कहा कि अमेरिका की इस देश के साथ संबंध महत्वपूर्ण बनेंगे।परमाणु समझौते की प्रक्रिया जल्दी पूरी करने के लिए भारत पर दबाव बनाते हुए अमेरिकी राजदूत ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के अगले प्रशासन द्वारा ऐसे समझौते की पेशकश किए जाने की संभावना नहीं है। दुसरी ओर, परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने के इरादे से भारत पर कथित दबाव बनाने के लिए वाम दलों ने रविवार को अमेरिका की कड़ी आलोचना की और सरकार के झुकने पर उससे समर्थन वापस लेने की चेतावनी भी दी। भारत में अमेरिका के राजदूत डेविड सी. मलफोर्ड के इंटरव्यू में इस समझौते के संबंध में की गई टिप्पणियों पर सख्त आपत्ति करते हुए कम्युनिस्ट नेताओं ने कहा कि करार को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को भारत पर दबाव डालने की रणनीति अपनाने का कोई अधिकार नहीं है। ...
एक अमेरिकी अधिकारी ने आरोप लगाया है कि अल कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन और तालिबान का मुखिया मुल्ला मोहम्मद उमर अपने टॉप कमांडरों समेत पाकिस्तान में छिपा हुआ है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।
अपना नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर इस अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को यह आरोप लगाते हुए कहा कि ओसामा और उमर की पाक में मौजूदगी पाकिस्तान और उसके पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। अधिकारी ने वॉशिंगटन में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अल कायदा के सरगना अयमान अल जवाहिरी और बिन लादेन पाकिस्तानी के कबायली इलाकों में छिपे हुए हैं। हमें यकीन है कि मुल्ला उमर की अगुवाई वाले तालिबान सूरा काउंसिल के नेता पाकिस्तान के क्वेटा में शरण लिए हुए हैं। गौरतलब है कि क्वेटा बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि इन आतंकवादी नेताओं की यह शरणस्थली न केवल तालिबान को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के खिलाफ लड़ाई जारी रखने में मदद पहुंचा रही है, बल्कि सेंट्रल एशिया से बाहर के इलाकों के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। अमेरिकी अधिकारी का यह बयान अल कायदा और तालिबान की पाक में मौजूदगी के बारे में अब तक दिए गए अमेरिकी बयानों में सबसे स्पष्ट है।
उधर, पाकिस्तान ने शनिवार को अमेरिकी अधिकारी के बयान का साफ तौर पर विरोध किया। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक ने कहा कि एक अज्ञात अधिकारी द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस बयान के समर्थन में खुफिया जानकारी मुहैया कराए, तो पाकिस्तान कार्रवाई करेगा। गौरतलब है कि पाक ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल माइकेल मुलेन पाकिस्तान की यात्रा पर हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की उम्मीदवारी में डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा ने नेब्रास्का, वाशिंगटन और लुइसियाना में हिलेरी क्लिंटन को पीछे छोड़ दिया है।
दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक हकबी ने कांसास में ताकतवर जॉन मैक्केन को हरा दिया है।
लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की ओर से जॉन मैक्केन की उम्मीदवारी तय है क्योंकि उनके पक्ष में टिम रोमनी अपनी दावेदारी वापस ले चुके हैं और सुपर ट्यूसडे चुनावों में प्रतिद्वंद्वी माइक हकबी काफ़ी पीछे छूट गए हैं।
ग़ौरतलब है कि ये मतदान सुपर ट्यूसडे को हुए चुनाव के बाद हो रहे हैं जिसमें हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा के बीच कांटे की टक्कर रही थी।
राष्ट्रीय स्तर पर बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन लगभग बराबरी पर चल रहे हैं।
साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीत चुकीं डॉरिस लेसिंग ने कहा है कि अगर बैरेक ओबामा अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनते हैं तो निश्चित ही उनकी हत्या कर दी जाएगी।
एक दैनिक समाचार पत्र को दिए गए इंटरव्यू में 88 वर्षीय लेसिंग ने कहा कि ओबामा जीते तो वे अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति होंगे लेकिन ज्यादा देर तक के लिए नहीं! क्योंकि राष्ट्रपति के पद पर उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे लोग (अमेरिकी) ओबामा की जान ले लेंगे।
2007 में नोबेल से सम्मानित की गईं लेसिंग ने कहा कि यही बेहतर होगा कि ओबामा की प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन इस मुकाबले में जीत जाएं और अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव हासिल करें।
लेसिंग का मानना है कि सबसे अच्छा विकल्प तो यह होगा कि ओबामा और क्लिंटन मिलकर चुनाव लड़ें। 'हिलेरी बहुत ही तेजतर्रार महिला हैं और अगर वे जीतती हैं तो शांति की उम्मीद ज्यादा है।'
मुंबई-देश के शेयर बाजारों में पिछले कई सप्ताह की भाँति आगामी हफ्ते भी उठापटक का दौर बने रहने की अधिक संभावना है। नौ फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देशी विदेशी निवेशकों की घबराहटपूर्ण बिकवाली से बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 778 अंक और नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 197 अंक नीचे आए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आगामी सप्ताह शेयर बाजारों में उठापटक का दौर बने रहने की अधिक संभावना है।
सीबीआई ने करोड़ों रुपये के किडनी रैकेट के सरगना डा. अमित कुमार को रविवार को मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संजीव जैन के आवास पर उनके समक्ष पेश किया। नेपाल में गिरफ्तार किए गए अमित को शनिवार को भारत लाया गया था। किडनी रैकेट के 24 जनवरी को उजागर होने के बाद से ही अमित फरार चल रहा था। उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था। नेपाल पुलिस ने बृहस्पतिवार को उसे नेपाल के एक होटल से गिरफ्तार किया था।
मल्फोर्ड ने सीएनएन-आईबीएन के डेविल्स एडवोकेट कार्यक्रम में करण थापर को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि मैं इस तरह से देखता हूं कि संबंध काफी समग्र हुए हैं। ये संबंध व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त से लेकर अन्य क्षेत्रों तक बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह किसी देश के साथ संभवत: सबसे महत्वपूर्ण संबंध हैं।
भारत अमेरिकी संबंधों में आए बदलाव के बारे में टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कई सारे समझ में आने वाले कारणों से इन संबंधों को प्राथमिक रूप से आधिकारिक द्विपक्षीय संबंधों के कारण गति मिली लेकिन आज हमने सभी बाधाओं को पार पा लिया है।
भारत और रूस ने अपने सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाते हुए अगले पांच वर्षो में ब्रह्मोस-2 बनाने का निश्चय किया है जो ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का विकसित रूप होगा।
रूस की समाचार एजेंसी रियोनोवोस्ती के अनुसार भारत और रूस रक्षा उद्योग के क्षेत्र में नवीन अनुसंधानों के जरिए ब्रह्मोस-2 का निर्माण करेंगे। वर्ष 1998 में स्थापित दोनों देशों का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए इन मिसाइलों का निर्माण करेगा।
ब्रह्मोस-2 ध्वनि की गति से पांच गुणा अधिक रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ने की क्षमता रखेगा तथा यह किसी भी वायु प्रतिरक्षा प्रणाली को बेधने में समर्थ होगा। यह मिसाइल ब्रह्मोस-1 का विकसित रूप होगा। ब्रह्मोस-2 की एक विशेषता यह है कि इसे वाहनों, जलयानों, लड़ाकू विमानों और पनडुब्बियों के जरिये छोड़ा जा सकेगा। इसके निर्माण में रूस की करीब 20 कंपनियां शामिल होंगी। यह मिसाइल सेना की किसी भी अंग के लिए एक प्रमुख मारक हथियार होगा।
ब्रह्मोस-एक मिसाइल भारतीय थलसेना में शामिल कर ली गई है जबकि भारतीय वायुसेना के लिए यह शीघ्र ही उपलब्ध करा दिया जाएगा। सुखोई-30 एमके आई को ब्रह्मोस-1 से सज्जित किया जाएगा। नौसेना में ब्रह्मोस मिसाइल को वर्ष 2006 में ही शामिल कर ली गई है। ब्रह्मोस का मारक दायरा 290 तक है तथा यह प्रति सेकेंड 920 मीटर की रफ्तार से उड़ान भरती है।
झाबुआ। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने वन अधिकार कानून को वन भूमि पर काबिज आदिवासियों के हितों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान समाज के कमजोर वर्गो के उत्थान और विकास पर है।
मध्यप्रदेश के एक दिवसीय संक्षिप्त प्रवास पर प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार आए डा. सिंह ने आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में 1286 करोड़ रुपये की लागत वाली दो रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखते हुए उम्मीद जताई है कि इनके जरिए इस पिछड़े क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगी। उन्होंने रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से अपेक्षा की कि दोनों परियोजनाएं निर्धारित आठ वर्ष की अवधि के पहले ही 2011 तक पूरी हो जाएं।
वन अधिकार कानून का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके जरिए आदिवासियों को जमीन का पट्टा मिलेगा और बेदखली की तलवार हटने से उन्हें राहत मिलेगी। इस कानून, रोजगार गारंटी कार्यक्रम और केंद्र प्रवर्तित कई अन्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए डा. सिंह ने राज्य सरकार से कहा कि वह इन योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम में मौजूद रेलमंत्री ने संकेत दिए कि रेल बजट लोक लुभावना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में उनका मंत्रालय 45 हजार करोड़ रुपये के लाभ की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने झाबुआ में रेल स्लीपर फैक्ट्री खोलने की भी घोषणा की। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को दलगत राजनीति से परे विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम करने वाला राजनेता बताते हुए कहा कि उनकी अपेक्षा कि है वह राज्य की अधूरी पड़ी योजनाओं को पूरा करने में मदद करने सहित सूखा प्रभावित 37 जिलों के लिए 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक का पैकेज उपलब्ध कराएं।
कार्यक्रम में भाजपा उपाध्यक्ष विक्रम वर्मा और सांसद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुमित्रा महाजन की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। श्रीमती महाजन ने यह कहते हुए शिलान्यास कार्यक्रम को अनुचित बताया था कि इस परियोजना के लिए मक्सी में भूमि पूजन पहले ही हो चुका है।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल डा. बलराम जाखड़, रेल राज्यमंत्री नारायण भाई राठवा, केंद्रीय कार्मिक और संसदीय कार्य राज्यमंत्री सुरेश पचौरी, प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री तथा स्थानीय सांसद कांतिलाल भूरिया भी उपस्थित थे।
किसानों के लिए राहत की घोषणा शीघ्र
अहमदनगर। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से चिंतित संप्रग सरकार शीघ्र ही एक राहत पैकेज की घोषणा करने जा रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे जल्द ही किसानों के लिए कर्ज राहत पैकेज की घोषणा करने जा रहे हैं। उनका कहना था कि कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की समस्याओं से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं। वित्त मंत्री पी चिदंबरम इस बारे में शीघ्र घोषणा करने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री पश्चिमी महाराष्ट्र के इस शहर में किसानों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। चालू पंचवर्षीय योजना में कृषि क्षेत्र के लिए 35 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड [सीबीएसई] सूचना प्रौद्योगिकी, फैशन डिजाइनिंग, गारमेंट मैन्यूफैक्चरिंग टेकनोलाजी, सामान्य स्वास्थ्य सेवा और रिटेल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उद्योग जगत के समर्थन से प्लस टू स्तर पर नए व्यावसायिक कोर्स शुरू कर रहा है।
सीबीएसई के अध्यक्ष अशोक गांगुली ने रविवार को बताया कि बोर्ड नेशनल स्टाक एक्सचेंज की मदद से पहले से ही वित्त बाजार प्रबंधन का एक कोर्स 90 चला रहा है।
गांगुली ने बताया कि फैशन डिजाइनिंग और गारमेंट मैंयुफैक्चरिंग टेक्नोलाजी में एक कोर्स शुरू करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नोलाजी [एनआईएफटी] के साथ सीबीएसई की बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि इसी तरह सूचना प्रौद्योगिकी [आईटी] में भी एक व्यावसायिक पैकेज कोर्स की शुरुआत के लिए नेशनल एसोसिएशन आफ साफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज [नैसकाम] के साथ चर्चा चल रही है।
सीबीएसई अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन सामान्य स्वास्थ्य सेवा, रिटेल मैनेजमेंट और अन्य क्षेत्रों में भी नए पाठ्यक्रम शुरू करेगा। गांगुली ने कहा कि इन दक्षता आधारित व्यावसायिक कोर्सो में सीबीएसई पाठ्यक्रमों का निर्धारण उद्योग के साथ मिल कर करेगा। छात्रों को सीबीएसई और एक पालक उद्योग से सर्टिफिकेट मिलेगा। सीबीएसई प्लस टू के स्तर पर फिल्म और मीडिया अध्ययन, हेरिटेज क्राफ्ट और जेंडर स्टडीज जैसे विषयों के क्षेत्र में कौशल आधारित विषय विकसित कर रहा है। गांगुली ने कहा कि हमने इस पर भी चिंतन प्रक्रिया शुरू कर दी है कि कैसे नैनो टेक्नोलाजी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
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